राहुल गाँधी के समर्थकों द्वारा किए गए ट्वीट्स के भरमार को देखकर यकीन होता है कि राहुल गाँधी के फॉलोवर उन्हीं की तरह हैं। जो बिना तथ्यों की जाँच परख किए समाज में झूठ फैलाने में लग जाते हैं।
नन्द कुमार बघेल को 'राष्ट्रीय मतदाता जाग्रति मंच एवं कल्याण समिति' का अध्यक्ष बताया गया है। इसमें दावा किया गया है कि 'मोदी कोरोना' से निपटने के लिए बुद्ध और गाँधी के रास्ते पर चलते हुए छत्तीसगढ़ के 13 स्थानों पर लॉकडाउन का उल्लंघन किया जाएगा।
वह विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ चुका है। बीजेपी और मोदी के खिलाफ जहर उगलता है। उसके पिता सीएम रिलीफ फंड में दान देते हैं तो राज्य के गृह मंत्री खुद ट्वीट करते हैं। ऐसे में इस बात का जवाब विनय दुबे ही बेहतर दे सकता है कि उसने राजनीतिक हसरत पूरा करने के लिए ये सब किया या फिर किसी के इशारे पर वह ऐसा कर रहा था।
एक तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लाखों लोगों के भोजन की व्यवस्था का दावा कर रहे हैं। दूसरी ओर प्रवासी श्रमिकों की जो तस्वीरें आ रही है वह उनके दावों की पोल खोल रहे हैं। इन्हें एक वक्त का भोजन नसीब है और वह भी एक गुरुद्वारे से मिल रहा।
खुद को सामाजिक कार्यकर्ता और उद्यमी बताने वाले विनय दुबे भाजपा के खिलाफ लगातार जहर उगलता रहा है। एनसीपी और मनसे के नेताओं से उसकी करीबी दिखाई पड़ती है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार सबका ख्याल रख रही है और राज्य पूरे देश को कोरोना से लड़ने की नई दिशा दिखा रहा है। अमित शाह ने भी उद्धव ठाकरे से फोन पर बात करके स्थिति का जायजा लिया।
ये सब बोर्ड के अधिकारियों की मौजूदगी में किया जाएगा। दिक्कत ये है कि इससे भक्तों की भावनाएँ आहत होंगी क्योंकि उनके द्वारा दान की गई चीजों के बदले में सोना लेकर उसे रिजर्व बैंक में डाल दिया जाएगा और श्रद्धालुओं को पता ही नहीं चलेगा कि उन्होंने जो चीजें दान दी हैं, वो कहाँ हैं और किस हालत में हैं।
महाराष्ट्र के हाउसिंग मिनिस्टर जितेंद्र आव्हाड के सुरक्षाकर्मी के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद हड़कंप मच गया। इस खबर की सूचना होते ही एनसीपी नेता ने खुद को क्वारंटाइन कर लिया। आव्हाड खुद को क्वारंटाइन करने वाले राज्य के पहले मंत्री हैं।