कमलनाथ ने भी राज्यपाल टंडन को पत्र लिखा था, जिस पर राज्यपाल ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें लिखे गए पत्र की भाषा अशोभनीय है और संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
NSUI नेता अहर्निश मिश्रा बार-बार प्रोफ़ेसर पर यह बोलने का भी दबाव बना रहा था कि “बोल, मैं अतुल, मेरी माँ का भो#$@।” NSUI नेताओं ने माँ सरस्वती के लिए भी अपशब्दों का प्रयोग किया और संस्कृत भाषा का मजाक बनाया। जान से मार डालने की धमकी दी।
MP में कुल विधानसभा सदस्यों की संख्या 230 है। इनमें से 2 विधायकों की मृत्यु हो चुकी है। यानी वर्तमान संख्या 228 है। कॉन्ग्रेस में हुई बगावत के पहले पार्टी के पास थे 114 विधायक, भाजपा के पास थे 107, सपा के एक , बसपा के दो और निर्दलीय विधायक थे कुल चार। अब इसमें से अगर उन 22 कॉन्ग्रेसी विधायकों को निकाल दिया जाए, जिन्होंने अपने इस्तीफे...
आरके मिश्रा ने बताया कि किस तरह से न्यू जर्सी से दिल्ली लौटे एक व्यक्ति ने देखा कि वहाँ एयरपोर्ट पर जाँच की पूरी सुविधा थी और ऐरोप्लेन के दरवाजे पर ही सारे यात्रियों का सिलसिलेवार तरीके से चेकअप किया जा रहा था। इस ट्वीट का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि उनकी सरकार लगातार प्रयासरत है कि सभी स्वस्थ रहें और जिनमें जरा भी इस वायरस के लक्षण दिखें, उनका तुरंत इलाज हो।
ये इंटरव्यू उसी महीने का है, जिस महीने नेहरू का निधन हुआ था। उसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि हिन्दुओं ने कभी धर्मान्तरण नहीं किया लेकिन इस्लाम का ये हमेशा से एक अंग रहा है।
सीएम कमलनाथ ने राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर फ्लोर टेस्ट रोकने की माँग की थी। पत्र में उन्होंने कहा था कि वर्तमान परिस्थिति में फ्लोर टेस्ट कराना अलोकतांत्रिक होगा। कमलनाथ ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने कॉन्ग्रेस के कई विधायकों को कर्नाटक में बंदी बना लिया है। ऐसी स्थिति में फ्लोर टेस्ट कराना अलोकतांत्रिक है।
“ये जेएनयू की विरासत के लिए शर्म की बात है कि इस आदमी का नाम इस विश्वविद्यालय में रखा गया है। सावरकर और उनके लोगों के लिए विश्वविद्यालय के पास न कभी जगह थी और न ही कभी होगी।”
सोमवार को कमलनाथ सरकार का फ्लोर टेस्ट होगा या नहीं यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन, इतना तय है कि यदि मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार गई तो उसका असर राजस्थान जैसे दूसरों राज्यों पर भी पड़ेगा। गुजरात, झारखंड और छत्तीसगढ़ के भी कॉन्ग्रेस विधायकों में असंतोष है।
मायावती ने रावण को बीजेपी का एजेंट करार देते हुए अपने समर्थकों को उससे दूर रहने को कहा था। बावजूद इसके उनकी पार्टी के कई पूर्व सांसद और विधायक नई पार्टी में शामिल हुए हैं।
मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, और छत्तीसगढ़ के बाद अब झारखंड के कॉन्ग्रेसी विधायकों में असंतोष की खबर सामने आ रही है। इससे झारखंड में राज्यसभा की चुनाव रोचक हो गया है। प्रथम वरीयता के दो वोट सहयोगी दल को देकर जेएमएम भी किरकिरी से बचना चाहती है।