प्रशासन का कहना है कि गणेश पूजा के दौरान हुए हादसे के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है। लेकिन, कारीगर दुविधा में हैं। अचानक से नया नियम तय किए जाने के बाद उन्हें इस बात की चिंता सता रही है कि अब उनकी मूर्तियाँ कौन ख़रीदेगा?
उद्धव ठाकरे ने कहा है कि कोर्ट का निर्णय कुछ भी आए लेकिन जिस तरह से कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला केंद्र सरकार के किया, उसे उसी हिम्मत से राम मंदिर का निर्माण भी शुरू करवाना चाहिए।
कोडेला शिवा प्रसाद राव 6 बार विधानसभा चुनाव जीत चुके थे और टीडीपी के वरिष्ठ नेताओं में से एक थे। एनटी रामाराव और चंद्रबाबू नायडू की सरकार में वह मंत्री भी रहे थे। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव और भाजपा ने टीडीपी नेता के निधन पर शोक जताया है।
अधिकारियों ने बताया कि निजी क्षेत्र में आरक्षण दिए जाने की व्यवहारिकता, स्वीकार्यता, संभावनाओं और प्रभावों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। सरकार इसके लिए व्यापार जगत से बातचीत करेगी और उनकी प्रतिक्रिया आते ही इसे मूर्त रूप दिया जाएगा।
आरोपों की पुष्टि के लिए पीड़िता के पिता ने एसआईटी को 43 वीडियो क्लिप्स सौंपी है। पीड़िता के पिता ने कहा कि जौनपुर से सांसद रहे चिन्मयानन्द ने सबूत मिटाने की कोशिश की है। पीड़िता का आरोप है कि चिन्मयानन्द ने कई अन्य छात्राओं का भी बलात्कार किया है।
एन राम चिदंबरम को जेल भेजने के लिए देश की अदालतों की आलोचना करने से भी नहीं चूके। उन्होंने कहा कि इस गिरफ्तारी की साजिश करने वालों का मकसद सिर्फ और सिर्फ चिदंबरम की आजादी पर बंदिश लगाना था और दुर्भाग्यवश देश की सबसे बड़ी अदालतें भी इसकी चपेट में आ गईं।
"हिंदुओं को पूजा करने का मौलिक अधिकार मुस्लिमों के संपत्ति के अधिकार से ऊपर है। जब भी दोनों के बीच कोई विवाद होता है, तो सुप्रीम कोर्ट हमेशा मौलित अधिकारों के पक्ष में फैसला सुनाता है। मुझे विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय नवंबर में हमारे पक्ष में अपना फैसला सुनाएगा।"
देश में NRC ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है। असम में पिछले दिनों राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की लिस्ट जारी कर दी गई है। इस लिस्ट में 19 लाख से अधिक लोगों के नाम इस लिस्ट में नहीं है।
सिंधिया की रैली की बात बात करें तो सारा हंगामा तब शुरू हुआ जब एक के बाद एक कार्यकर्ताओं ने मंच पर चढ़ना शुरू कर दिया। उस समय सिंधिया मंच पर ही मौजूद थे। होड़ लगा कर सिंधिया से मिलने मंच पर पहुँच रहे कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर कुर्सियाँ उछालनी शुरू कर दी।
नोटिस के बाद 50% से अधिक पूर्व सांसदों ने सरकारी आवास खाली कर दिया था। बावजूद इसके 82 ऐसे पूर्व सांसद हैं , जो सरकारी आवास खाली करने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। नियमानुसार, दोबारा चुन कर न आए सांसदों को लोकसभा भंग होने के एक महीने के भीतर सरकारी आवास खाली करना होता है।