‘The Hindu’ के चेयरमैन बने जज: चिदंबरम को कॉन्ग्रेस के कार्यक्रम में दी क्लीन चिट, कहा- कोई सबूत नहीं

एन राम ने दावा किया कि हत्या के आरोपित इन्द्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी के बयानों को छोड़कर चिदंबरम पर आरोप लगाने का कोई आधार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत को चिदंबरम को जमानत देनी चाहिए क्योंकि किसी भी दस्तावेज को दबाए जाने या उससे छेड़छाड़ किए जाने का कोई खतरा नहीं था।

कस्तूरी एंड संस के अध्यक्ष और ‘द हिंदू’ ग्रुप के मालिक एन राम ने दावा किया है कि पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम निर्दोष हैं और हत्या की आरोपित इंद्राणी मुखर्जी के बयान के अलावा उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है।

द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एन राम ने ये बातें रविवार (15 सितंबर, 2019) को चेन्नई में तमिलनाडु कॉन्ग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित बैठक में कही। बता दें कि यह बैठक चिदंबरम की गिरफ्तारी की निंदा करने के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें एन राम ने भी हिस्सा लिया और चिदंबरम के पक्ष में बात की। एन राम ने कहा कि चिदंंबरम ने कुछ भी गलत नहीं किया है। उन्होंने चिदंबरम के जेल भेजे जाने को सरासर गलत और अन्यायपूर्ण बताया। एन राम ने कहा कि पी चिदंबरम को जेल भेजकर बहुत बड़ा अन्याय किया गया।

इतना ही नहीं, चिदंबरम को जेल भेजने के लिए एन राम देश की अदालतों की आलोचना करने से भी नहीं चूके। उन्होंने कहा कि इस गिरफ्तारी की साजिश करने वालों का मकसद सिर्फ और सिर्फ चिदंबरम की आजादी पर बंदिश लगाना था और दुर्भाग्यवश देश की सबसे बड़ी अदालतें भी इसकी चपेट में आ गईं।

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चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट की आलोचना करते हुए एन राम ने कहा, “असल में उन्होंने अभियोजन के मामले को स्वीकार किया है। 7 महीनों तक फैसला सुरक्षित रखा गया। जज के रिटायरमेंट से ठीक पहले फैसला आया, जिसकी वजह से चिदंबरम को अपील करने का मौका नहीं मिला।”

राम ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा कि जस्टिस आर भानुमति और बोपन्ना के आदेश में तथ्यात्मक गलतियाँ थीं। उन्होंने दावा किया कि न्यायाधीशों ने कहा कि चिदंबरम की संपत्ति जब्त कर ली गई है, जो पूरी तरह से गलत है। उन्होंने जल्द ही एक समीक्षा याचिका दायर करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

एन राम ने दावा किया कि हत्या के आरोपित इन्द्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी के बयानों को छोड़कर चिदंबरम पर आरोप लगाने का कोई आधार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत को चिदंबरम को जमानत देनी चाहिए क्योंकि किसी भी दस्तावेज को दबाए जाने या उससे छेड़छाड़ किए जाने का कोई खतरा नहीं था। उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्म की बात है कि इस मामले में न्याय नहीं मिला।

वहीं, कॉन्ग्रेस सांसद के जयकुमार और पीटर अल्फोंस ने भी आरोप लगाया कि चिदंबरम को बीजेपी द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। पीटर अल्फोंस ने इसे ‘कानूनी नहीं, राजनीतिक लड़ाई’ करार दिया। उन्होंने कहा कि एक ऐसी सरकार जो अपने पार्टी के लोगों के खिलाफ दर्ज बड़े मामलों में कोई ऐक्शन नहीं लेती, वह उस शख्स के खिलाफ उन मामलों पर एक्शन ले रही है, जिसने कोई गलती नहीं की और वह एक प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ हैं।

इसके अलावा, द्रविड़ इयाक्का थमीझार पेरवई के अध्यक्ष सूबा वीरपांडियन ने कहा कि कॉन्ग्रेस पर एक मनोवैज्ञानिक युद्ध की छाप छोड़ी जा रही है, ताकि वह फिर से उठकर खड़ा न हो सके।

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