फोगाट परिवार के मुताबिक, बबीता ने हरियाणा पुलिस के इंस्पेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया है। ऐसी अटकलें हैं कि बबीता को दादरी जिले के बड़हरा या दादरी विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है।
दिग्विजय सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का हवाला देते हुए कहा कि सरकार देखे कि कश्मीर में क्या हो रहा है। कश्मीर हमारे हाथ से निकल जाएगा। जबकि प्रशासन अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की ख़बरों को मनगढंत बताकर पहले ही ख़ारिज कर चुका है।
रामपुर से सपा सासंद आजम खान हाल ही में भू-माफिया घोषित किए गए थे। वह जौहर विश्वविद्यालय के चांसलर हैं और कई लोगों की जमीन हड़पने के आरोपी भी हैं। उनके ऊपर 'आलिया मदरसा' से किताबें चुरानें और रामपुर में क्लब से शेर की मूर्तियाँ चुराने का भी आरोप है।
महबूबा के साथ विवाद के दौरान उमर उन पर चिल्ला पड़े। उन्होंने महबूबा के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद पर भाजपा के साथ 2015 में गठबंधन करने का आरोप मढ़ा। महबूबा ने भी उमर को याद दिलाया कि किस तरह से उनके पिता फारूक अब्दुल्ला ने भाजपा का साथ दिया था।
इस बयान को लेकर सोशल मीडिया में लोगों ने चिदंबरम को आड़े हाथों लिया है। यूजर्स ने कहा है कि पार्टी के गर्त में पहुॅंचने के बाद भी कॉन्ग्रेसी सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। कुछ लोगों ने कॉन्ग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति पर सवाल उठाए हैं, तो कुछ ने चिदंबरम से पूछा है कि यदि जम्मू-कश्मीर हिन्दू बहुल राज्य होता तो क्या नेहरू आर्टिकल 370 की सौगात देते?
जौहर यूनिवर्सिटी पर छापा ऐसे वक्त पड़ा है, जब पहले से ही आज़म ख़ान जमीन कब्जाने के कई मामले में घिरे हुए हैं। उन पर जमीन हड़पने को लेकर कुल 27 मुकदमे दर्ज हैं। रामपुर में लग्जरी रिसॉर्ट के लिए जमीन कब्जाने को लेकर नोटिस जारी किया गया है।
मैग्सेसे विजेता संदीप पांडेय जिस रिहाई मंच के बैनर तले अनुच्छेद 370 को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वाले थे, वह संगठन आतंकवाद आरोपितों की पैरवी करता रहा है। इस संगठन ने मोदी के भाषण में बाधा पहुँचाने वाले लोगों का सम्मानित भी किया था।
राहुल ने बरसों पहले कहा था, "कॉन्ग्रेस एक परिवार है जिसमें तेजी से बदलाव की जरूरत है। सोच-समझकर, प्यार से और सबकी सुनकर बदलाव करना है।" इसलिए राहुल का उत्तराधिकारी चुनने के लिए कॉन्ग्रेसियों ने तेजी से बदलाव करते हुए उनकी मॉं को चुन लिया है।
जवाहरलाल नेहरू शेख अब्दुल्ला के साथ मिल कर जम्मू कश्मीर को सेकुलरिज्म का एक नया मॉडल बनाना चाहते थे और इसके लिए अब्दुल्ला को अम्बेडकर को मनाने को कहा। लेकिन अम्बेडकर ने अब्दुल्ला को जो जवाब दिया, उसे आपको जानना ज़रूरी है।
"यह परिक्रमा राहुल गाँधी से शुरू होकर सोनिया गाँधी तक और सोनिया गाँधी से शुरू होकर राहुल गाँधी पर जाकर खत्म होती है। ये दर्शाता है कि कॉन्ग्रेस के लिए राहुल गाँधी एक बड़ी भूल हैं।"