राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने बताया कि इस बार कुल 35 बैठकें हुईं और 104.92 प्रतिशत कामकाज हुआ। वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि यह 1952 के बाद सबसे स्वर्णिम सत्र रहा है। इसमें 134 फीसदी कामकाज हुआ।
भाजपा नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने और राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांटने का प्रस्ताव पेश किया था।
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद इन नेताओं की गिरफ्तारियाँ हुईं हैं। सुरक्षा के लिहाज से यहाँ इंटरनेट कनेक्शन और मोबाइल सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। साथ ही धारा 144 भी लागू है।
तृणमूल और सीपीआई के अलावा एनसीपी के राष्ट्रीय दर्जे पर भी तलवार लटक रही है। अगर किसी पार्टी से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छिन जाता है तो वह एक ही चुनाव चिह्न पर पूरे देश में चुनाव लड़ने के योग्य नहीं रह जाती है।
मुराद ने कहा है कि मुफ़्ती और अब्दुल्ला ने देश की सरकार के ख़िलाफ़ जनता को भड़काते हुए 370 हटाने का विरोध किया। उनके मुताबिक, "इन नेताओं ने देश के अन्य राज्यों के लोगों के बीच दुश्मनी बढ़ाने की कोशिश की है। उन्होंने देश की एकता और अखंडता चोट पहुँचाई है।"
दिग्विजय अकेले नहीं हैं कॉन्ग्रेस में। पार्टी के तौर पर जहाँ कॉन्ग्रेस ने दोनों सदनों में बिल के खिलाफ मतदान किया, वहीं लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कश्मीर मसले पर बिल लाने की सरकार की हैसियत को ही चुनौती दे डाली थी।
ताहिर को कश्मीर में सायरा नाम की युवती से प्यार करने के कारण झांसा देकर मार दिया गया था। लड़की के परिजनों ने ताहिर के आतंकी हमले में मारे जाने की जानकारी उसके परिवारवालों को दी थी। लोगों का मानना है कि अगर 370 नहीं होता तो ताहिर की जान नहीं जाती।
नामग्याल ने कहा कि विपक्ष के लोग सिर्फ़ एक रोड और छोटे से मार्केट को कारगिल समझ बैठे हैं। अगर असली करगिल देखना है तो ज़न्स्कार, वाखा, मुलबेक, शर्गोल, आर्यन घाटी आदि जगहों पर जाना चाहिए। उन्होंने कहा की 70% भू-भाग के लोग निर्णय का स्वागत करते हैं।
जब 1977 में जॉर्ज फर्नांडीस ने जेल से लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन भरा तो सुषमा ही दिल्ली से मुजफ्फरपुर पहुॅंचीं और हथकड़ियों में जकड़ी जॉर्ज की तस्वीर दिखा प्रचार किया। उन दिनों 'जेल का फाटक टूटेगा, जॉर्ज हमारा छूटेगा' का उनका दिया नारा सबकी ज़ुबान पर था।
सुषमा स्वराज ने ट्विटर डिप्लोमेसी का दरवाजा खोला। ट्विटर पर सक्रिय रहते हुए लोगों की मदद करना इतना चर्चित हुआ कि वाशिंगटन पोस्ट ने उन्हें 'सुपरमॉम ऑफ द स्टेट' कहा। उनके देहांत के साथ ही भारतीय राजनीति का एक शालीन अध्याय समाप्त हो गया है।