आंध्र प्रदेश ने जब अपना प्रशासन हैदराबाद से अमरावती शिफ्ट किया था, तभी से चंद्रबाबू नायडू कृष्णा नदी के किनारे उंदावल्ली स्थित इस आवास में रह रहे थे। उस दौरान सरकार ने आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण के जरिए प्रजा वेदिका का निर्माण तत्कालीन मुख्यमंत्री के आवास के रूप में किया था, जिसमें 5 करोड़ का खर्चा आया था।
रघुवंश ने कहा कि तेजस्वी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं, इसीलिए उनका काम विधानसभा की परिक्रमा करना है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर में तेजस्वी की ज़रूरत नहीं है, वहाँ किसी जनसभा वाले नेता की ज़रूरत है।
“मैं और झारखंड के राष्ट्रीय जनता दल के 90 फीसदी कार्यकर्ता व नेता लालू प्रसाद यादव से नाराज हैं। अब राष्ट्रीय जनता दल में लोकतंत्र नहीं बचा है, लिहाजा हमने नई पार्टी बनाई है और अब हम खुद झारखंड के लोगों की सेवा करेंगे।”
हाल ही में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार और बेईमान अफ़सरों के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अपनाते हुए फ़रमान जारी किया था कि ऐसे अधिकारियों के लिए सरकार में कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा था कि ऐसे अधिकारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लें अन्यथा उन्हें सेवानिवृत्ति के लिए बाध्य कर दिया जाएगा।
"मेरी नजर में अखिलेश यादव की कोई अहमियत नहीं रह गई है। राम गोविंद चौधरी ने सपा के वोट भाजपा को ट्रांसफर करवा दिए लेकिन फिर भी अखिलेश ने उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की।"
भूमिहीन किसानों से लेकर व्यापारियों तक सैकड़ों लोग TMC के उन नेताओं का नाम सार्वजनिक तौर पर ले रहे हैं, जिन्होंने उनसे पैसा लिया था। ममता बनर्जी ने TMC के नेताओं को हर स्तर पर ‘कट मनी’ जिसे कमीशन भी कहा जाता है, वो वापस करने के लिए कहा है।
बसपा सुप्रीमो मायावती की अहम बैठक में उनके भाई आनंद कुमार को पार्टी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया। वहीं उनके भतीजे आकाश को नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई। साथ ही 'बुआ-बबुआ' पर लगाम लगाते हुए आगामी उपचुनाव में पार्टी नेताओं को सपा से अलग चुनाव लड़ने की तैयारी करने को कहा गया।
जब स्मृति ईरानी ने दूसरी बार अमेठी के राजनीतिक अखाड़े में राहुल गाँधी को चुनौती दी थी तो कॉन्ग्रेस नेता और पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने उनकी खिल्ली उड़ाते हुए कहा था कि अगर वह (स्मृति) राहुल गाँधी को हरा ले गईं तो सिद्धू राजनीति छोड़ देंगे।
स्वतंत्रता पूर्व भारत में एक राजनीतिक गतिरोध को देखते हुए, मुखर्जी ने दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी राजनीतिक संगठन भारतीय जनसंघ को संगठित करने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी को छोड़ दिया था। अंततः 1951 में भारतीय जनता पार्टी के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ।
1953 में जब मुखर्जी जम्मू कश्मीर की यात्रा पर निकले, तब उन्हें नज़रबंद कर लिया गया था और उसी दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई थी। मुखर्जी ने नेहरू से विवाद होने व जम्मू कश्मीर पर कॉन्ग्रेस से अपनी राय अलग होने के कारण पार्टी से दूरी बना ली। उस समय शेख अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर के प्रधानमंत्री थे।