एक तरफ उलेमा बोर्ड ने अपना समर्थन देने के लिए ये सारी शर्तें रखी हैं तो दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि एनसीपी नेता शरद पवार ने इन सभी स्थितियों पर संज्ञान लिया है।
रतन टाटा का जीवन इस बात की याद दिलाता है कि लीडरशिप का आँकलन केवल उपलब्धियों से ही नहीं होता, बल्कि सबसे कमजोर लोगों की देखभाल करने की उसकी क्षमता से भी होता है।