बीपीएससी आंदोलन के जरिए प्रशांत किशोर ने अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की है, लेकिन बिहार की राजनीति का जातिगत और जमीनी स्वरूप उनके आड़े आ सकता है।
बिरेन सिंह ने बताया कि 1992-97 के बीच मणिपुर में 1600 से अधिक लोग मारे गए थे। उन्होंने पूछा कि तब प्रधानमंत्री रहे नरसिम्हा राव या आइके गुजराल क्यों नहीं मणिपुर पहुँचे थे।