पाकिस्तान ने आतंक के खिलाफ लड़ाई का ढोंग करते हुए मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद के संगठन लश्कर-ए-तैयबा के चार टॉप आतंकियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार चारों आतंकी की पहचान प्रोफेसर जफर इकबाल, याहया अजीज, मुहम्मद अशरफ और अब्दुल सलाम के रूप में हुई है।
इस रैली के लिए हाफिज सईद ने सभी आतंकवादियों को बुलावा भेजा है। मुजफ्फराबाद में 14 अक्टूबर को होने वाली इस रैली में जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल के अधिकतर आतंकी शामिल होंगे।
उत्तर सुमात्रा के गवर्नर ने प्रस्ताव दिया था कि उनका प्रशासन हलाल पर्यटन को बढ़ावा देगा, लेकिन स्थानीय लोगों ने अब पोर्क उत्सव का आयोजन करके एक अनोखे तरीके से हलाल पर्यटन का विरोध करने का फ़ैसला किया है।
आरिफ अजाकिया ने कहा, "इमरान ने सत्ता में आने के लिए अपनी पूरी साख को दाँव पर लगा दी। बाजवा इससे जो कहता है, ये करता है और जब ये बजवा के कहने चुपचाप पर चल रहा है तो फिर ये इसको क्यूँ हटाएँगे? उन्होंने कहा कि बाजवा जब इसे भीख माँगने के लिए भेजता है तो ये कभी सऊदी चला जाता है, तो कभी कहीं और। बाजवा ने कश्मीर पर हल्ला मचाने के लिए कहा तो कर दिया। खुद बाजवा, जिसने 70 साल तक इस कौम को कश्मीर के नाम पर लूटा, वो चुप है।"
पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट में नमृता की मौत के कारणों को नहीं बताया गया है, उसमें कहा गया है कि सबूतों से मालूम चलता है कि उन्होंने आत्महत्या ही की। लेकिन इस बात के कोई सबूत नहीं मिले जिससे पता चले उनकी हत्या हुई।
इस्लामिक स्ट्रेटेजिक स्टडीज़ सेंटर की सालाना सूची में 500 मुस्लिमों के नाम होते हैं। इनमें महिलाएँ भी शामिल होती हैं। क्रिकेट और राजनीति के करियर के कारण इमरान खान को ये अवॉर्ड मिला है।
एक उइगर कार्यकर्ता ने बताया कि उसके दादा के दादा जिस कब्रगाह में दफ़न किए गए थे, उस कब्रगाह को तबाह कर दिया गया है। उइगर कार्यकर्ताओं ने बताया कि उनके इतिहास, उनकी पहचान और उनकी पूर्वजों की हर एक निशानी मिटाई जा रही है।
आतंकी मौलाना उमर को भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ सनाउल हक़ के नाम से चिह्नित करती है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के संभल का रहने वाला था। उसे 2014 में अलकायदा के मुखिया और ओसामा बिन लादेन के उत्तराधिकारी अल जवाहिरी द्वारा 'भारतीय उपमहाद्वीप अलकायदा (AQIS)' का प्रमुख बनाया गया था।
अपने कार्यकाल के पहले वर्ष में ही इमरान सरकार ने पूर्व के सभी रिकॉर्डों को तोड़ते हुए बेतहाशा कर्ज ले लिया है। आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक इमरान सरकार के सत्ता संभालने के बाद देश के कुल कर्ज में 7509 अरब पाकिस्तानी रुपए की वृद्धि हुई है।