प्रबंधन ने राजदीप के ट्वीट्स को ग्रुप की सोशल मीडिया पॉलिसी से अलग माना है। इसीलिए अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें 2 हफ़्ते के लिए ऑफ़ एयर कर दिया।
सवाल उठता है कि जो लोग इसे पवित्र निशान साहिब बोल रहे हैं, वो ये बताएँ कि ये नारा और कड़ा किसका है? यह भी बताएँ कि एक किसान आंदोलन में मजहबी झंडा कहाँ से आया? उसे कैसे डिफेंड किया जाए कि तिरंगा फेंक कर मजहबी झंडा लगा दिया गया?
हिंदुओं से घृणा का स्तर कितना अधिक व्यापक है कि यदि भाजपा की तुलना अयातुल्ला खुमैनी से भी हो जाए तो नाराजगी दिखने लगती है। मानो जैसे बेचारे अयातुल्ला ने ऐसा भी क्या कर दिया कि उसकी तुलना 'फासीवादी' भाजपा से की जाए।
राजदीप ने सर्वेक्षण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह सर्वे पर विश्वास ही नहीं कर पा रहे क्योंकि लगभग 85% लोग लॉकडाउन में अपनी आजीविका के अवसरों को खोने के बावजूद मोदी सरकार की सराहना कर रहे हैं।