अभिनेता शिवाजी और TV9 के तत्कालीन सीईओ रवि प्रकाश धोखाधड़ी के इस मामले में मुख्य साज़िशकर्ता हैं और उन पर आरोप है कि दोनों ने फ़र्ज़ी काग़ज़ातों के आधार पर TV9 के 40,000 शेयर्स पर कब्ज़ा कर लिया।
"कपिल सिब्बल ने हमें आश्वासन दिया था कि चैनल दो साल के लिए चलेगा, तो हम यहाँ आ गए। लेकिन अब करोड़ों कमाने के बावजूद चैलन हमें नियमानुसार तीन महीने की सैलरी देने से मना कर रहा है।"
ट्विटर पर शेयर किए गए इस मीम में एक खिलाड़ी भगवा और नीली रंग की जर्सी पहने नज़र आ रहा है। उसके सिर पर मुकुट है और हाथ में बल्ले की जगह गदा है, तो वहीं सामने से आती गेंद की जगह एक तीर है जिसका बचाव करते यानी रोकते हुए खिलाड़ी को दिखाया गया।
केवल कोहली और भगवा जर्सी पर नाराज़गी जताने से मन नहीं भरा तो लिबरल गिरोह ने 'समय-यात्रा' कर के मोदी के भगवाकरण प्लान में गांगुली का 2001 में टी-शर्ट लहराना शामिल कर लिया। उनके हिसाब से गांगुली के लॉर्ड्स में टी-शर्ट लहराते समय उनके शरीर पर मौजूद गंडे-ताबीज़ आदि धार्मिक और आस्था के प्रतीक-चिह्न 'शर्मनाक' और 'अंधविश्वासी' थे!
अभिषेक उपाध्याय ने यह भी जोड़ा कि बच्चे को गोद लेना एक शांत प्रक्रिया होती है, ताकि बड़े होकर बच्चे को अपने गोद लिए हुए होने को लेकर किसी असहज स्थिति का सामना न करना पड़े। अतः अगर कापड़ी दम्पति का सच में बच्ची को गोद लेने का इरादा होता, तो वे इतना शोर-शराबा न करते।
ध्रुव राठी की इस घटिया हरकत पर ट्विटर यूज़र्स ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उसे जमकर लताड़ लगाई। साथ ही, ध्रुव राठी को यह याद दिलाया कि पेट्रोल पम्प पर काम करने वाले लोगों की भी इज्जत होती है और वो एलिटिज्म के नाम पर समाज को तोड़ने के षड्यंत्र भी नहीं रचते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि तबरेज़ अंसारी के पिता मस्कुर अंसारी की भी लगभग 15 साल पहले मॉब लिंचिंग कर दी गई थी। मीडिया रिपोर्टिंग में कहा गया है कि जमशेदपुर के बागबेड़ा इलाके में चोरी करते हुए मस्कुर को भीड़ ने पकड़ लिया था और लिंच कर दिया था।
यहाँ एक निश्चित पैटर्न उभर रहा है। ये उनमें से केवल दर्जन भर घटनाएँ हैं। 'हेट-ट्रैकर’ के माध्यम से नकली 'हेट क्राइम' के निर्माण के लिए मीडिया गिरोह और लिबरल पूरी तरह समर्पित हैं। ये डेटा और फैक्ट को तोड़-मरोड़कर, मुसलमानों को बारहमासी पीड़ित और हिंदुओं को निर्दयी हमलावर बताने की फिराक में रहते हैं।
वीडियो में हम देख सकते हैं कि इसमें जर्नलिस्ट इमरान खान सरकार की जमकर खिंचाई कर रहा था, वहाँ बैठे सत्ताधारी PTI के सीनियर नेता मसरूर अली सियाल से ये देखा नहीं गया और वरिष्ठ पत्रकार इम्तियाज़ खान की तुरंत धुनाई शुरू कर दी।