बिट्टू बजरंगी का दावा है कि नूहं दंगा के दौरान अरमान फरीदाबाद में जूस बेचा करता था। उसने अपनी दुकान में खुद ही आग लगा कर हिंदुओं को फँसाने की कोशिश की थी।
सबरीमाला में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। पर वामपंथी सरकार समुचित व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर नहीं दिखती। अब केरल हाई कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया है।
बिहार के पूर्णिया में मृत्युभोज को लेकर हत्या की यह खबर ऐसे समय में आई है, जब सोशल मीडिया में राजस्थान के मृत्युभोज निवारण अधिनियम 1960 को लेकर बहस छिड़ी हुई है।
जिनकी ट्रेनिंग ही लाठी वाले चरवाहा विद्यालय में हुई हो वे संसद में कूदने वाले लौंडे को झोंटा पकड़कर खींचने, मुक्का मारने, जूतियाने... को तो 'स्वागत' नहीं ही मानेंगे।