अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में 25 मार्च को गुरुद्वारे पर आातंकी हमला हुआ था। हमले के वक्त वहॉं 150 श्रद्धालु मौजूद थे। 27 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि आठ अन्य घायल हो गए थे।
अमेरिका के स्टेट्स डिपार्टमेंट और मीडिया के अनुसार 1990 में वहाँ 1 लाख हिन्दू और सिख आबादी थी, जोकि अब 3000 के आसपास है। यह समझना कोई कठिन काम नहीं है कि उन 97,000 हिन्दुओं और सिखों के साथ क्या हश्र हुआ होगा।
कोरोना संक्रमण से निपटने में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति जनता कर्फ्यू के दिन पूरे देश की जनता ने आभार जताया था। यह कुछ लिबरलों और तथाकथित बुद्धिजीवियों को रास नहीं आया। लेकिन, अब उसी रास्ते पर बढ़ते हुए ब्रिटेन ने कोरोना वारियर्स के प्रति आभार व्यक्त किया है।
कई लोगों ने इस भीड़ को देख कर नोटबंदी के बाद बैंकों में लगी भीड़ को याद किया। मेरठ ही नहीं बल्कि अलीगढ़ में भी भीड़ जुटी। एक बैंक के अधिकारी ने बताया कि अफरातफरी के माहौल के कारण लोग 100 रुपए भी निकाल के ले जा रहे हैं।
पीएम मोदी से नर्स छाया ने कहा कि वो देवता की तरह हैं और दुनिया के सभी देशों को उनके जैसा प्रधानमंत्री मिले। पीएम मोदी ने छाया को उनकी भावनाओं के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि वो जो भी कर रहे हैं, वो उनका कर्तव्य है। पीएम ने वुहान से लौटे एक कश्मीरी मेडिकल छात्र से भी बातचीत की।
मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए क्विंट ने गिरधर ज्ञानी को डॉक्टर बताया। टास्क फ़ोर्स का संयोजक तक बता डाला। जबकि वे ना मेडिकल प्रैक्टिस करते हैं और ना कोई महामारी विशेषज्ञ हैं। यहॉं तक कि ऐसा कोई टास्क फोर्स भी नहीं है जिसका वामपंथी वेबसाइट ने दावा किया।
"लोगों के बीच जागरूकता बहुत कम है। उन्हें जागरूक करने के लिए हमने कुछ अलग करने की सोची। हमने एक हेलमेट डिजाइन किया है जो कोरोना वायरस की तरह दिखता है। हमने कुछ ऐसा करने के बारे में सोचा, जो लोगों को डराए और उन्हें घर पर बनाए रखे।"
आइसोलेशन कोच तैयार करने के लिए बाथरूम, गलियारे और दूसरी जगहों पर भी बदलाव किया गया है। बोगियों में आइसोलेशन वॉर्ड के साथ ही मरीजों के लिए साफ-सुथरे टॉयलेट का भी प्रबंध किया है।
गाँव में पहले से ही एक युवक कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। इसके बाद भी समुदाय के लोग मस्जिद में एकत्र होकर नमाज अदा करने सा बाज नहीं आ रहे। और तो और, मौलाना मस्जिद में बैठकर माइक से लोगों को नमाज के लिए इकट्ठा करने का ऐलान कर रहा था।