उपद्रवियों ने पथवारी देवी मंदिर पर पथराव किया। वो यहीं पर नहीं रुके, आगे दो और मंदिरों पर ईंट-पत्थर फेंके। इससे हिंंदुओं में रोष व्याप्त हो गया। स्थानीय लोग विरोध में आ गए और महिलाएँ धरने पर बैठ गईं। हिंदू समुदाय के लोग उपद्रवियों पर कार्रवाई की माँग करने लगे।
दिल्ली दंगों के दौरान केजरीवाल सरकार पर बहुत सवाल उठे। जाने-माने पत्रकारों से लेकर कई बड़ी हस्तियों ने उनसे इस मामले पर बोलने की गुहार लगाई। लेकिन अपनी मनमानी चलाने के विख्यात केजरीवाल को ये आलोचना रास नहीं आई और उन्होंने फौरन उन्हें अनफॉलो कर दिया।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा है कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि दो महीने से ज्यादा समय से धरना चल रहा था। लेकिन, कल जिस तरह हिंसा हुई वह बर्दाश्त नहीं है।
दंगाइयों ने जिस हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की जान ली वह मूलरूप से राजस्थान के रहने वाले थे। दो दिन पहले ही माँ से फोन पर बात की थी। उनसे एक वादा किया था। लेकिन, मॉं को क्या पता था यह बेटे से आखिरी बात है।
दिल्ली की हिंसा छत्तीसिंहपुरा के नरसंहार की याद दिला रही है। तब भी केंद्र में बीजेपी की सरकार थी। भारत-अमेरिका संबंध नया मोड़ ले रहा था। देश की छवि खराब करने की साजिशें तब भी रची गई थी।
नार्थ-ईस्ट दिल्ली में हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। मौजपुर और ब्रह्मपुरी इलाके में पत्थरबाजी की खबर है। कई वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया। दिल्ली पुलिस और आरएएफ के जवान इलाके में मार्च कर रहे हैं।
शाहरुख ने सोमवार को मौजपुर-जाफराबाद सड़क पर ताबड़तोड़ कई राउंड फायर किए थे। उसने करीब 8 राउंड फायर किए। इस दौरान एक पुलिसवाले ने उसे रोकने की काफी कोशिश की लेकिन वो नहीं रूका और फायर करते रहा।
संत तिरुमानकई अलवार की 15वीं शताब्दी की यह कांस्य प्रतिमा वर्ष 1967 के साउथबेई की नीलामी में नीलाम की गई और इस तरह आखिरकार यह प्रतिमा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एश्मोलीन संग्रहालय पहुँची।
CAA का विरोध करने वाली यह भीड़ इतनी 'शांतिप्रिय' है कि इसने आज पेट्रोल पम्प से लेकर बाइक, ऑटो, रिक्शा आदि को आग के हवाले कर दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी पिस्टल लेकर पहुँच गया, जिसने 8 राउंड फायरिंग भी की। आज ही कई मेट्रो स्टेशंस के पास मुस्लिमों को अपने बोरिया-बिस्तरों के साथ इकट्ठा होते हुए भी देखा जा रहा है। पूछने पर पता चला कि किसी 'दुआ' के लिए सभी लोग इकट्ठे हो रहे हैं।