हॉस्टल की पहली कक्षा में एक बच्ची है। उसके क्लास के दोस्त उसे बहुत प्यार करते हैं और वह पढ़ने-लिखने में भी अच्छी है, लेकिन वह अकेले में रोया करती है। दरअसल, वह अपनी माँ के पास जाना चाहती है, जिसे चीन में एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। लेकिन...
सीएए विरोधी रैली में उपद्रव मचाने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी के परिजनों से मिलने के लिए प्रियंका ने यूपी पुलिस को चकमा दिया था। उस दौरान उन्होंने एक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता की स्कूटी के पीछे बैठ कर अपनी यात्रा तय की थी।
ईसाई मिशनरी भोले-भाले लोगों को प्रलोभन दे रहा था और अपने मजहब की श्रेष्ठता का बखान कर रहा था। तभी वहाँ पहुँचे बौद्ध भिक्षु सुमनरत्ना ने उसे ऐसा चाटा मारा कि उसका चश्मा ज़मीन पर जा गिरा और वो व्यक्ति लड़खड़ाते हुए कुछ क़दम पीछे जा खड़ा हुआ।
ये वही इलाक़ा है, जहाँ एक वर्ष पूर्व मिन्हाज अंसारी नामक व्यक्ति ने बीफ का फोटो और भड़काऊ बयान शेयर किया था। बाद में पुलिस की हिरासत में उसकी मौत हो गई थी। कॉन्ग्रेस विधायक डॉक्टर इरफ़ान अंसारी ने 'दहशतगर्दों पर कार्रवाई' की बात कही है।
पाकिस्तान की अनीला एहसान ने पैगंबर मुहम्मद पर सवाल उठाकर वहाँ के कट्टरपंथियों को बैठे-बिठाए एक मुद्दा दे दिया। अब उन्हें इस्लामिक क़ानून के अनुसार, 'ईशनिंदा' के आरोप का सामना करना पड़ सकता है।
एक साल में 940 बच्चों की मौत। मुख्यमंत्री गहलोत कहते हैं कि ये कोई नई बात नहीं। वो हेमंत सोरेन के शपथ ग्रहण समारोह में व्यस्त हैं। मीडिया चुप है क्योंकि ये भाजपा शासित राज्य में नहीं हुआ है। जाँच में पता चला है कि अस्पताल में व्यवस्थाएँ लचर हैं। अगर बच्चे मरते रहें तो सरकार किस लिए?
अपने दुख को भूल डॉ. अर्चना सिंह यह सुनिश्चित करने में जुटी थीं कि प्रियंका गॉंधी की सुरक्षा में सेंध न लगे। तब शायद ही उन्होंने सोचा होगा कि प्रियंका के सामने उनके साथ बदसलूकी होगी और उलटे आरोप उन पर ही मढ़ दिया जाएगा।
"सैल्यूट है मेरठ के सिटी एसपी अखिलेश नारायण सिंह को, पाकिस्तान ज़िंदाबाद और भारत मुर्दाबाद के नारे लगा रहे उपद्रवियों को करारा जवाब देने के लिए। अब कुछ तथाकथित प्रबुद्धों को अफ़सोस है कि भारत मुर्दाबाद और पाकिस्तान ज़िंदाबाद बोलने वाले गद्दारों को पाकिस्तान जाने को क्यों कहा।"
आयशा ने प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि वो देश में अल्पसंख्यक राजनीति को उभरते हुए देखना चाहती हैं। उन्होंने अल्पसंख्यक राजनीति का अर्थ समझाते हुए बताया कि इसका आशय 'मुस्लिम-बहुजन पॉलिटिक्स' से है।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में 2 दशक तक राजनीतिक विज्ञान पढ़ाने वाले गौतम सेन का कहना है कि धर्मांतरण के अलावा 'चर्च प्लांटिंग' भी एक अहम मुद्दा है। इसके तहत राज्य के कई गाँवों में मंदिरों से ज्यादा चर्च बना दिए गए हैं ताकि उसका प्रभाव दिखे।