कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी से CAA और NRC के खिलाफ लगाए गए सभी विज्ञापनों को हटाने का आदेश दिया है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब 9 जनवरी 2020 को होगी।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इन ज़िंदा व इस्तेमाल की गई कारतूसों की बरामदगी 'शांतिपूर्ण ढंग से कर रहे विरोधियों’ से हुई है। ऐसे में यह सवाल एकाएक ही उठ जाता है कि दंगाइयों का अगर यह ‘शांतिपूर्ण ढंग से किया गया विरोध-प्रदर्शन है, तो फिर अशांतिपूर्ण तरीक़ा क्या होगा?
वीडियो में उपद्रवियों की भीड़ को मंदिर में प्रवेश करते हुए और मूर्ति को तोड़ते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में मौजूद शख्स बोलते हुए सुना जा सकता है, “हिंदुओं के साथ खिलवाड़ किया गया है। वो लोग हमारे मंदिर में घुसकर मूर्तियों को तोड़ रहे हैं।”
यमुनानगर में रहने वाले पाकिस्तानी हिंदुओं ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चुनावों में अपना समर्थन दिया था, क्योंकि हुड्डा कहते थे कि उन्हें नागरिकता दिलवाएँगे, लेकिन आज जब मोदी सरकार ने बिल पास कर दिया है, तो वे इसका विरोध कर रहे हैं।
हयातुननिसा एक सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका थी। उसने दो-दो बार कर्ज उठाकर शौहर मुस्तफा को बिजनेस के लिए दिया। लेकिन, मुस्तफा नहीं सुधरा। इस बात को लेकर अक्सर दोनों के बीच विवाद होता रहता था।
एक शरणार्थी ने बताया था कि पाकिस्तान के अंदर हिन्दू होना गुनाह है, क्योंकि वहाँ हिन्दुत्व की कोई अहमियत ही नहीं है। यहाँ हिन्दुस्तान में हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सारे भाई-भाई है। भारत ही वो जगह है, जहाँ हम हिन्दू सुरक्षित हैं, इसलिए वो पाकिस्तान से भारत में रहने आए हैं।
Zee News के सीनियर प्रोड्यूसर अमित कुमार सिंह ने आज़मी के झूठ का पर्दाफ़ाश फेसबुक पर किया। उन्होंने कहा है कि आज़मी न केवल जामिया के छात्रों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि इस्लाम के नाम पर झूठ भी बोल रहे हैं।
व्याख्याता परीक्षा का मुद्दा राजस्थान में गरमा गया है। छात्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री इसे इगो का मुद्दा बना रहे हैं। गौर करने लायक बात यह है कि ज्यादातर नाराज़ छात्र मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक हैं।
संबित पात्रा के साथ गौरव वल्लभ के टीवी डिबेट का एक वीडियो सोशल मीडिया में खूब चला था। इससे उत्साहित होकर कॉन्ग्रेस ने गौरव को झारखंड के चुनावी मैदान में उतार दिया। लेकिन, जमशेदपुर पूर्वी सीट पर उनका गणित बुरी तरह गड़बड़ा चुका है।
अधिकारियों ने बताया कि रामपोरा में झेलम नदी पर प्रस्तावित 166 मीटर लंबे दो लेन वाले पुल को बनाने के लिए वर्ष 2002 में 10 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की गई थी। लेकिन, रास्ते में मस्जिद के आने की वजह से काम अटका पड़ा था। मुस्लिम समुदाय की सहमति से इसे हटाने का काम शुरू हो गया है।