बरखा दत्त ने एक इंटरव्यू में कबूल किया था कि मुंबई हमले के दौरान टीवी चैनलों और उनके पत्रकारों ने जिस तरह की रिपोर्टिंग की उससे सैकड़ों लोगों की जान ख़तरे में आ गई थी। यहॉं तक कि सुरक्षा बलों के जवानों की जान भी ख़तरे में पड़ गई थी।
“एर्नाकुलम शहर के पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर एक आदमी ने मेरे चेहरे पर मिर्च पाउडर छिड़क दी। पुलिस बहुत गैर जिम्मेदार है और उन्होंने उस बदमाश को गिरफ्तार करने की कोशिश नहीं की, जिसने उन पर हमला किया।”
"आप जज क्यों बन जाते हो, 'संस्कृत विभाग और मुस्लिम विरोध लिखकर' पूरे देश को गुमराह कर दिया। आप बताओ तो सही कि मामला क्या है? नियुक्ति संस्कृत विभाग में नहीं बल्कि 'संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय' में हुई है और ये मुस्लिम विरोध नहीं बल्कि सनातन धर्म की रक्षा का प्रश्न है। बाकी निर्णय क्या होगा ये आप छोड़ दीजिए, पहले सही मुद्दा तो सामने आए।"
दहेज के लिए आरोपितों ने पहले पीड़िता को जमकर पीटा। फिर 22 नवंबर की सुबह पति ने उसे तीन तलाक दे दिया और उसी रात ससुर ने अपने साथी के साथ मिल उसकी अस्मत लूट ली।
बाजवा 29 नवंबर को रिटायर होने वाले थे। लेकिन इमरान ख़ान के नेतृत्व वाली सरकार ने अगस्त में उनका कार्यकाल 3 साल के लिए बढ़ा दिया था। बाजवा नवंबर 2016 में पाक फौज के जनरल बने थे।
बशीर अहमद की गिरफ्तारी बेहद अहम सफलता मानी जा रही है। अनुच्छेद 370 के निष्क्रिय होने के बाद 8 अगस्त 2019 को आंचर इलाके में हुए विरोध-प्रदर्शन में उसकी मुख्य भूमिका थी।
कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा है कि वे हमेशा सोचते हैं कि अगर अमेरिका में मुंबई जैसा हमला होता तो वह पाकिस्तान का बुरा हाल करता। मनमोहन सरकार ने 26/11 के बाद वैसी सख्ती नहीं दिखाई थी, जिसकी उस वक़्त दरकार थी।
पडसलगीकर ने मुंबई हमलों की जॉंच में बेहद अहम भूमिका निभाई थी। पाकिस्तान की संलिप्तता के सबूत जुटाए थे। अमेरिका से 'वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल' हासिल कर आतंकियों और उनके आकाओं के बीच हुई बातचीत की जाँच की थी।
गैंगरेप के बाद आरोपितों ने घटना का वीडियो वायरल कर दिया था। कहा जा रहा है कि इससे नाराज लोग आरोपितों का घर जलाना चाहते थे। हालात को देखते हुए इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सदन में वोटिंग की विडियोग्राफी कराने के भी आदेश दिए हैं। साथ ही कहा है वोटिंग ओपन बैलेट से होगा। सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य प्रोटेम स्पीकर होंगे।