Homeदेश-समाजपति दे रहा खुशी-खुशी तलाक, पत्नी करना चाहती है पुराने प्रेमी से शादी

पति दे रहा खुशी-खुशी तलाक, पत्नी करना चाहती है पुराने प्रेमी से शादी

उसने फैमिली कोर्ट में कहा है कि उसने पत्नी को मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन पत्नी ज़िद पकड़ कर बैठी है कि उसे अब पति नहीं, प्रेमी के साथ ही रहना है जिससे वह और दूर नहीं रह सकती।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक अचम्भित कर देने वाले वाकये में एक पति ने अपनी पत्नी को तलाक देने की अर्ज़ी दी है। इसमें अचम्भित कर देने वाली बात यह है कि इस तलाक के पीछे उसकी मंशा है अपनी पत्नी को उसके प्रेमी से मिलाने की, जिससे पत्नी ने रिश्ते सात साल की शादी के दौरान भी कथित तौर पर कायम रखे। पति-पत्नी के दो बच्चे भी हैं, और पति उन्हें भी अपने पास रख कर पालने को तैयार हो गया है। उसने पत्नी को उनसे जब चाहे मिलने देने की बात भी कही है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति भोपाल के कोलार क्षेत्र का रहने वाला है। उसने फैमिली कोर्ट में कहा है कि उसने पत्नी को मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन पत्नी ज़िद पकड़ कर बैठी है कि उसे अब पति नहीं, प्रेमी के साथ ही रहना है जिससे वह और दूर नहीं रह सकती। मैरिज काउंसिलर के पास जाने का भी कोई फायदा नहीं हुआ है।

पत्नी और उसके प्रेमी का अफ़ेयर शादी के पहले से चल रहा था। उसके पिता अंतर्जातीय विवाह के लिए तैयार नहीं हुए और पत्नी को तथाकथित रूप से मजबूरी में वर्तमान पति से शादी करनी पड़ी। लेकिन, नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद भी दोनों के संबंध बरकरार रहे। इस बीच उसके दो बच्चे भी पैदा हो गए।

जब बच्चे बड़े हुए तो, मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पति-पत्नी के बीच दूरियाँ बढ़ने लगीं और मामला फैमिली कोर्ट पहुँचा, जहाँ दोनों को मैरिज काउंसिलर के पास भेजा गया। इसके बाद पत्नी ने प्रेमी से अपने संबंधों का खुलासा किया, कथित तौर पर पति के साथ रहने से इंकार कर दिया और प्रेमी के साथ जाने की ज़िद पकड़ ली।

इसके बाद पत्नी को हर हालत में खुश देखने की इच्छा का दावा करने वाले पति ने तलाक की अर्ज़ी दे दी है। उसने बच्चों की कस्टडी अपने पास रख कर उनके पालन-पोषण की भी इच्छा जताई है, बावजूद इसके कि पत्नी ने कहा था वह प्रेमी के पास जाते समय बच्चों को अपने साथ ले जाने के लिए राज़ी है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

क्या भारत की राजनीति पहली बार पूरी तरह ‘हिन्दू-केंद्रित’ हो गई है?

क्या भारत की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव चुनावी नतीजों में नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस के केंद्र में हुआ है? PM मोदी मजबूत हों या कमजोर, सत्ता में BJP रहे या विपक्ष आए, क्या हिन्दू पहचान और हिन्दू समाज से जुड़े सवाल अब भारतीय राजनीति के केंद्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं?

कुएँ में कूदने की जगह नहीं बची तो रोने लगीं हिंदू महिलाएँ: जानिए- 1947 में रावलपिंडी के तोहा खालसा में 90 हिंदू-सिख महिलाओं ने...

जानिए 1947 के रावलपिंडी दंगों में तोहा खालसा की 93 हिंदू महिलाओं के कुएँ में एक साथ कूदकर जान देने की दर्दनाक कहानी।
- विज्ञापन -