रचना ने जावेद और उसकी पत्नी पिंकी को घर के बाहर बहस करते सुना। उसने जावेद और पिंकी को बुलाकर उन्हें शांत कराने और विवाद सुलझाने की कोशिश की। तभी जावेद ने पिस्तौल निकाली और हवा में फायरिंग कर दी। रचना को लहू लुहान देख वह फरार हो गया।
शेख रशीद ने कहा कि वह जेल में बंद किसी भी नेता को मिली AC या TV की सुविधा हटाने के विरोध में नहीं हैं लेकिन वह नवाज़ शरीफ सहित अन्य नेताओं को टेप रिकॉर्डर और मुकेश के गानों की सीडी देने के पक्ष में ज़रूर हैं।
बलूचिस्तान के नेताओं को पाकिस्तान के डर से देश से बाहर रहना पड़ रहा है। पीओके के समाजसेवी पाकिस्तान पर आरोप लगा रहे हैं। सिंध में लड़कियों का जबरन धर्मांतरण हो रहा है। लेकिन, मलाला कश्मीर पर पाकिस्तानी नैरेटिव चलाने में लगी हैं, वो भी बिना सबूतों के।
पियूष गोयल के एक बयान पर ट्विटर पर RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के एक फर्जी अकाउंट के ट्वीट को सच मानकर प्रोपगेंडा वेबसाइट The Quint, इकोनॉमिक टाइम्स, और आउटलुक ने खबर प्रकाशित कर दी।
बैंकों के विलय और विदेशी निवेशकों को राहत के बाद अब सरकार ने एक्सपोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए क़दम उठाए हैं। वित्त मंत्री ने बताया कि महंगाई दर नियंत्रण में है। RBI को खुदरा महंगाई दर 2% से 6% के दायरे में रखने का लक्ष्य दिया गया है।
स्वामी की ‘legacy’ के आकलन में पार्टी, विचारधारा और निष्ठा को एक ही चीज़ मानकर देखने पर वे शायद ‘मौकापरस्त’, नज़र आएँगे। लेकिन किसी नेता को आंकने के पैमाने के तौर पर उसके कर्म उसके शब्दों से अधिक सटीक होते हैं और स्वामी को इसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए।
ममता बनर्जी ने अपने क़रीबी पुलिस अधिकारी का बचाव करते हुए कहा कि वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पुलिस अधिकारियों में से एक हैं। ममता ने कहा कि राजीव कुमार की वीरता, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा सवालों से परे है। उन्होंने उन पर लगे आरोपों को झूठा बताया।
हरिजन ने कहा कि लोगों में अंधविश्वास है कि अगर वे देवताओं का अनादर करेंगे तो कुछ बुरा होगा। उसने यही दिखाने के लिए कि कोई भी देवता उसे नुकसान नहीं पहुँचा सकता, उसने शिवलिंग पर पेशाब कर दिया। मगर उसके साथ कुछ भी बुरा नहीं हुआ, वह सामान्य जिंदगी जी रहा है।
गयूर अहमद की शादी अनीशा ने 7 वर्ष पहले हुई थी। उनके दो बच्चे भी हैं। इसी दौरान अनीशा को पड़ोस में रहने वाले क़सीम से प्यार हो गया। क़सीम सऊदी में कारपेंटर का काम करता था। पहले तो दोनों चोरी-छिपे मिलते थे, बाद में खुलेआम मिलना-जुलना चालू हो गया।
राज ठाकरे की चुनावी राजनीति से दिलचस्पी इस कदर कम हो गई है उन्होंने पार्टी के नेताओं को सलाह दी है कि देश की इकॉनामी ठीक न होने के कारण विधानसभा चुनाव से उन सबको दूर रहना चाहिए। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में जो तर्क दिए हैं वो उनके ही पार्टी के नेताओं के गले के नीचे नहीं उतर रही।