"इस बैठक में कश्मीर मसले पर विचारों का आदान-प्रदान होगा। जिसमें आधिकारिक रूप से किसी की बात का कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा और न ही उन बातों का कोई रिकॉर्ड रखा जाएगा। साथ ही इस बैठक में हुई कोई बातचीत सार्वजनिक नहीं की जाएगी, क्योंकि..."
“मुझे अपने भाई की जगह नौकरी मिली है। मैंने विभाग से अनुरोध किया था कि मुझे मेरे भाई की बंदूक ही दी जाए। नक्सली कायर हैं। मैं दंतेश्वरी फाइटर टीम को जॉइन करना चाहूँगी और अपने भाई की मौत का बदला लेना चाहूँगी।”
जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “अभी तक आपने सब कुछ अच्छे तरीक़े से संभाला हुआ है, आपका आर्मी कमांडर होने के नाते मुझे आप सभी पर गर्व है, जो भी चुनौती हमारे सामने आएगी हम उस पर अच्छी तरह से फ़तह पाएँगे।”
वह क्रिश्चियनिटी के प्रखर आलोचक थे और गुजरात में मिशनरी ईसाईयों द्वारा चलाए जा रहे धर्मान्तरण के सख्त विरोधी। 125 पुस्तकें लिखने वाले बुद्धिसागर ने मूर्तिपूजा के समर्थक थे और इसके लिए उन्होंने तर्क भी दिए थे।
ग़ौरतलब है कि वायु सेना के विंग कमांडर वर्धमान अभिननंदन ने पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान मार गिराया था। उनकी इस वीरता में उनकी सहयोगी मिंटी अग्रवाल ने अहम भूमिका निभाई थी। उस समय वो वायु सेना के रडार कंट्रोल स्टेशन पर तैनात थीं।
11वीं-12वीं शताब्दी के मंदिर में कुतुबुद्दीन ने लड़की को किसी बहाने बुलाया। फिर नशीली दवा खिलाई और कई बार बलात्कार किया। मंदिर की देखरेख करने वाले 2 लोगों ने रंगेहाथ कुतुबुद्दीन को पकड़ लिया और सबूत के तौर पर इसकी रिकॉर्डिंग भी की।
"शेख मुजीब को देखते ही मोहिउद्दीन नर्वस हो गया। उसके मुॅंह से केवल इतना ही निकला, सर आपनी आशुन (सर आप आइए)। मुजीब ने चिल्ला कर कहा-क्या चाहते हो? क्या तुम मुझे मारने आए हो? भूल जाओ। पाकिस्तान की सेना ऐसा नहीं कर पाई। तुम किस खेत की मूली हो?"