एक ट्विटर यूजर ने लिखा है कि शेहला जैसे लोगों को सुरक्षा कवर देना जनता के टैक्स का ग़लत इस्तेमाल है। एक अन्य यूजर ने लिखा कि अब जब जम्मू-कश्मीर पुलिस केंद्र सरकार के अधीन होगी, क्या शेहला रशीद अपनी सुरक्षा वापस कर देगी?
विपक्ष की उलूल-जुलूल बयानबाजी से पाकिस्तान और अलगाववादियों को भी शह मिल रही है। इसके कारण सोशल मीडिया में यूजर्स जमकर विपक्ष पर निशाना साध रहे हैं और कह रहे हैं कि देश के विपक्षी नेताओं ने अपने रुख से पाकिस्तान को भी हैरान कर दिया है।
शाह फैसल पहले भी धमकी देते रहे हैं। वे ख़ुद को अलगाववादी घोषित कर चुके हैं। एक बयान में उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों को भड़काने की कोशिश करते हुए कहा कि वे तब तक ईद नहीं मनाएँगे जब तक बेइज्जती का बदला नहीं ले लेते।
पाकिस्तान की तरफ से जारी गीदड़ भभकियों के बीच 8 अगस्त को मीका ने कराची में परफॉर्म किया था। कराची में जिस व्यक्ति के यहाँ मीका ने परफॉर्म किया, वह पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का कजन भाई है।
वैष्णव मान्यताओं में इस कहानी की प्रतीकों के रूप में मान्यता भी है। ऐसा माना जाता है कि हाथी यहाँ जीव का स्वरूप है, मगरमच्छ उसके पाप और माया हैं, जिस नदी के कीचड़ जैसे स्थान में हाथी मगरमच्छ के जबड़े में फँसा है, वो कीचड़ संसार है।
तृणमूल सुप्रीमो और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाया था कि वह दुर्गा पूजा समितियों जैसे स्थानीय संगठनों को भाजपा के लिए काम करने पर मजबूर करना चाहती है, इसीलिए उन्हें दबाने की कोशिश हो रही है।
मंगलवार को पाकिस्तान के मंत्री फवाद हुसैन ने ट्वीट करते हुए लिखा था- "मैं भारतीय सेना में मौजूद पंजाबियों से अपील करता हूँ कि वे कश्मीर में हो रहे जुल्म का हिस्सा ना बनें और कश्मीर में ड्यूटी से इनकार कर दें।"
जाँच एजेंसी ने बर्दवान धमाके को भारत में JMB की बड़ी साज़िश का हिस्सा बताया था। उसके मुताबिक भारत में लोगों को उग्रवाद की ओर मोड़ने, उनकी JMB में भर्ती और उन्हें ट्रेनिंग और हथियार मुहैया कराने के मकसद से हो रहे इस ऑपरेशन का अंतिम ध्येय भारत और बांग्लादेश में आतंक फ़ैलाने और इन देशों की लोकतान्त्रिक ढंग से चुनी गई सरकारों के खिलाफ जंग छेड़ना था।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने रहमान मलिक के प्रोपेगंडा गुब्बारे में पिन चुभोते हुए खुलासा किया कि जो वीडियो वह बाँट रहे हैं, वह एक बम धमाके का पुराना वीडियो है। यह पाकिस्तान और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI की साइबर युद्धनीति का हिस्सा है, जिससे हिंदुस्तान में, और खासकर सुरक्षा बलों में, तनाव भड़का कर शांति भंग किया जा सके।
कुछ लोगों का कहना है कि लिबरल पत्रकार जिस डर की बात कर रहे थे, प्रियंका गाँधी के गुंडे बस यही समझा रहे हैं। वहीं कुछ यूज़र्स का मानना है कि पत्रकार को प्रियंका वाड्रा के से सवाल नहीं करना चाहिए था क्योंकि उन्होंने मना कर दिया था।