कोर्ट ने सारे सबूत देखते हुए माना कि इन दोनों ने दलित समाज के लोगों को प्रलोभन देकर सामूहिक धर्म परिवर्तन करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही विधि विरुद्ध ढंग से उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित कराया।
कोर्ट ने अब इसी मामले में ये पाया कि प्रतिवादियों को ये साबित करना था कि वादी की बड़ी बेटी अब हिंदू नहीं है, लेकिन वो लोग ऐसा नहीं कर पाए। ऐसे में बेटी को पिता की संपत्ति में अधिकारी होगी।