Sunday, November 29, 2020
Home फ़ैक्ट चेक मीडिया फ़ैक्ट चेक Alt News: 'आसमानी गणित' के सहारे COVID-19 पर भारत की बेहतर स्थिति को फर्जी...

Alt News: ‘आसमानी गणित’ के सहारे COVID-19 पर भारत की बेहतर स्थिति को फर्जी साबित करने की बचकाना कोशिश

इस कथित फैक्ट चेक में ऑल्टन्यूज़ की गणित के खेल को अगर समान्य शब्दों में समझना चाहें तो ऑल्टन्यूज़ ने भारत की प्रति मिलियन मृत्यु दर की तुलना एशिया से और प्रति मिलियन जाँच दर की तुलना अमेरिका और ब्रिटेन के साथ की है।

कई महीनों तक COVID-19 के ‘केरल मॉडल’ का महिमामंडन करते रहने के बावजूद उसे सफल साबित करने में नाकामयाब रहे फैक्ट चेक के नाम पर मजहबी विचारधारा का प्रचार करने वाली स्वघोषित फैक्ट चेकर वेबसाइट ‘ऑल्टन्यूज़’ को नया सरदर्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई स्पीच ने दिया है। ऑल्टन्यूज़ ने बेहद घटिया हिंदी में दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनिंदा आँकड़ों के जरिए COVID-19 महामारी के मामले में भारत की स्थिति को बेहतर बताने का प्रयास किया है।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत 20 अक्टूबर को ही त्योहारों से पहले कोरोना वायरस के बारे में चेतावनी जारी करते हुए अपने भाषण में कहा था कि भारत में कोरोना वायरस के कारण मृत्यु दर प्रति 10 लाख लोगों पर 83 है, जबकि अमेरिका, ब्रिटेन और ब्राज़ील में ये आँकड़ा 600 से ऊपर है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने अब तक 10 करोड़ के करीब परिक्षण किए हैं और भारत अन्य देशों के मुकाबले कोरोना वायरस महामारी से बचने में कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

ऑल्टन्यूज़ का दर्द है कि भाषण के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ ही आँकड़ों को रखा और अपने इस कथित फैक्ट चेक में कहा है कि उन्होंने इन आँकड़ों की तुलना संयुक्त राज्य अमेरिका या फिर यूनाइटेड किंगडम और ब्राजील के साथ क्यों की गई?

यह बात और है कि खुद ऑल्टन्यूज़ अपने इसी गंदी हिंदी में लिखे शब्दों के संग्रह, जिसे वो ‘फैक्ट चेक’ का नाम देते हैं, में इन्हीं देशों से भारत की तुलना करते हुए भ्रम को स्थापित करने का बचकाना और विफल प्रयास करते हैं। वास्तव में, ऑल्टन्यूज़ के इस फैक्ट चेक का पहला दोष तो यही है।

ऑल्टन्यूज़ ने पहले खुद ही आपत्ति जताई कि ब्रिटेन और अमेरिका से तुलना क्यों की गई ?

‘फैक्ट चेक’ करने के नाम पर ऑल्टन्यूज़ ने यह तुलना अमेरिका और ब्रिटेन के साथ सिर्फ इस कारण की क्योंकि भारत विश्व में कोरोना परीक्षण करने वाले देशों में दूसरे स्थान पर है। लेकिन यह दिखाने के लिए, कि भारत में कम परीक्षण हुए हैं, ऑल्टन्यूज़ ने अमेरिका और ब्रिटेन के साथ भारत की तुलना करना जरुरी समझा।

इसी रिपोर्ट में खुद ऑल्टन्यूज़ ने ही अमेरिका और ब्रिटेन से तुलना कर ऑल्टन्यूज़ ने थूककर चाटने का काम किया है

ऑल्टन्यूज़ ने मोदी सरकार के आँकड़ों को सेलेक्टिव बताया है। जबकि भारत में कोरोना वायरस से होने वाली मृत्यु के मामले में प्रति मिलियन में होने वाली मौत के मामले में भारत विश्व या अमेरिका, या फिर ब्रिटेन के औसत से कहीं बेहतर दशा में है।

इसलिए, ऑल्टन्यूज़ ने इसकी तुलना एशिया से की, जहाँ कि इस वायरस के जनक राष्ट्र चीन ने वायरस से जुड़ी लगभग हर जानकारी पर भ्रम फैलाया है और झूठ बोलते हुए अपने आँकड़ों को दुरुस्त बताने का काम करता आया है।

इसके अलावा, COVID-19 में भारत की स्थिति दिखाते हुए, प्रोपेगेंडा फैक्ट चेकर वेबसाइट ऑल्टन्यूज़ ने केस फेटलिटी रेट (CFR) यानी, मृत्यु दर की तुलना नहीं की, क्योंकि भारत में मृत्यु दर भी विश्व के औसत, एशिया के औसत, ब्रिटेन और अमेरिका के औसत से कम है। यही तथ्य पीएम मोदी ने भी अपने उस भाषण में रखे, जिसका फैक्ट चेक करने ऑल्टन्यूज़ निकला था। पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि भारत की रिकवरी दर अधिक और मृत्यु दर कम है।

लेकिन अगर ऑल्टन्यूज़ इन आँकड़ों को रखता तो यह उनके अजेंडा के विपरीत होता। जबकि ऑल्टन्यूज़ को तो यह साबित करना है कि भारत कोरोना वायरस महामारी से निपटने में असफल रहा है।

ऑल्टन्यूज़ के इस फर्जीवाड़े को अंकुर सिंह ने सामने रखा है –

इस कथित फैक्ट चेक में ऑल्टन्यूज़ की गणित के खेल को अगर समान्य शब्दों में समझना चाहें तो ऑल्टन्यूज़ ने भारत की प्रति मिलियन मृत्यु दर की तुलना एशिया से और प्रति मिलियन जाँच दर की तुलना अमेरिका और ब्रिटेन के साथ की है। ऐसा करने के पीछे ऑल्टन्यूज़ के क्या कारण थे, उन्होंने इसके लिए किस ‘डाटा इंटेलिजेंस यूनिट’ की सहायता ली और क्यों ली, यह कॉन्ग्रेस पोषित फैक्ट चेकर्स का मसीहा ही बेहतर जानता होगा।

ऑल्टन्यूज़ ने इन सभी फर्जीवाड़ों और आसमानी गणित के सहारे ऑल्टन्यूज़ ने आरोप लगाया है कि पीएम मोदी ने चुनिंदा आँकड़ों के माध्यम से ये दिखाने की कोशिश की है कि अन्य विकसित देशों के मुकाबले भारत कोरोना वायरस महामारी से लड़ने में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत के लिए गृहमंत्री अमित शाह ने संभाला मोर्चा, कहा- पहले हाईवे खाली कर तय मैदान में जाएँ

“मैं प्रदर्शनकारी किसानों से अपील करता हूँ कि भारत सरकार बातचीत करने के लिए तैयार है। कृषि मंत्री ने उन्हें 3 दिसंबर को चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। सरकार किसानों की हर समस्या और माँग पर विचार करने के लिए तैयार है।”

ओवैसी के गढ़ में रोड शो कर CM योगी आदित्‍यनाथ ने दी चुनौती, गूँजा- आया आया शेर आया… देखें वीडियो

सीएम योगी के रोड शो के में- ‘आया आया शेर आया.... राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की’, योगी-योगी, जय श्री राम, भारत माता की जय और वंदे मातरम के भी गगनभेदी नारे लगाए गए।

प्रदर्शन करने वाले किसानों को $1 मिलियन का ऑफर, खालिस्तान के समर्थन में खुलेआम नारेबाजी: क्या है SFJ का मास्टरप्लान

किसान आंदोलन पर खालिस्तान समर्थक ताकतों ने कब्ज़ा कर लिया है। SFJ पहले ही इस बात का ऐलान कर चुका है कि वह खालिस्तान का समर्थन करने वाले पंजाब और हरियाणा के किसानों को 10 लाख रूपए की आर्थिक मदद करेगा।

शादी में पैसा, फ्री कार, मस्जिद-दरगाहों का विकास: तेलंगाना में ‘अल्पसंख्यकों’ पर 6 साल में ₹5600 करोड़ खर्च

तेलंगाना में अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के लिए सरकारी खजाने का नायाब उपयोग सामने आया है। तेलंगाना सरकार ने पिछले 6 वर्षों में राज्य में अल्पसंख्यक केंद्रित योजनाओं पर 5,639.44 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

ना MSP ख़त्म होगी, न APMC पर कोई फर्क पड़ेगा: जानिए मोदी सरकार के कृषि कानूनों को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों का सच

MSP हट जाएगा? APMC की शक्तियाँ ख़त्म हो जाएँगी? किसानों को फसल का नुकसान होगा? व्यापारियों की चाँदी होगी? कॉन्ट्रैक्ट कर के किसान फँस जाएँगे? जानिए सारी सच्चाई।

कैसे बन रही कोरोना वैक्सीन? अहमदाबाद और हैदराबाद में PM मोदी ने लिया जायजा, पुणे भी जाएँगे

कोरोना महामारी संकट के बीच शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में कोरोना वैक्सीन की तैयारियों का जायजा ले रहे हैं। इसके तहत पीएम मोदी देश के तीन शहरों के दौरे पर हैं।

प्रचलित ख़बरें

‘कबीर असली अल्लाह, रामपाल अंतिम पैगंबर और मुस्लिम असल इस्लाम से अनजान’: फॉलोवरों के अजीब दावों से पटा सोशल मीडिया

साल 2006 में रामपाल के भक्तों और पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें 5 महिलाओं और 1 बच्चे की मृत्यु हुई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे। इसके बाद नवंबर 2014 में उसे गिरफ्तार किया गया था।

मैं नपुंसक नहीं.. हिंदुत्व का मतलब पूजा-पाठ या मंदिर का घंटा बजाना नहीं, फ़ोर्स किया तो हाथ धोकर पीछे पड़ जाऊँगा: उद्धव ठाकरे

साक्षत्कार में उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें विरोधियों के पीछे पड़ने को मजबूर ना किया जाए। इसके साथ ही ठाकरे ने कहा कि हिंदुत्व का मतलब मंदिर का घंटा बजाना नहीं है।

‘उसे मत मारो, वही तो सबूत है’: हिंदुओं संजय गोविलकर का एहसान मानो वरना 26/11 तुम्हारे सिर डाला जाता

जब कसाब ने तुकाराम को गोलियों से छलनी कर दिया तो साथी पुलिसकर्मी आवेश में आ गए। वे कसाब को मार गिराना चाहते थे। लेकिन, इंस्पेक्टर गोविलकर ने ऐसा नहीं करने की सलाह दी। यदि गोविलकर ने उस दिन ऐसा नहीं किया होता तो दुनिया कसाब को समीर चौधरी के नाम से जानती।

दिल्ली दंगों के दौरान मुस्लिमों को भड़काने वाला संगठन ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों को पहुँचा रहा भोजन: 25 मस्जिद काम में लगे

UAH के मुखिया नदीम खान ने कहा कि मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे लोगों को मदद पहुँचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।

ये कौन से किसान हैं जो कह रहे ‘इंदिरा को ठोका, मोदी को भी ठोक देंगे’, मिले खालिस्तानी समर्थन के प्रमाण

मीटिंग 3 दिसंबर को तय की गई है और हम तब तक यहीं पर रहने वाले हैं। अगर उस मीटिंग में कुछ हल नहीं निकला तो बैरिकेड तो क्या हम तो इनको (शासन प्रशासन) ऐसे ही मिटा देंगे।

31 का कामिर खान, 11 साल की बच्ची: 3 महीने में 4000 मैसेज भेजे, यौन शोषण किया; निकाह करना चाहता था

कामिर खान ने स्वीकार किया है कि उसने दो बार 11 वर्षीय बच्ची का यौन शोषण किया। उसे गलत तरीके से छुआ, यौन सम्बन्ध बनाने के लिए उकसाया और अश्लील मैसेज भेजे।

दिवंगत वाजिद खान की पत्नी ने अंतर-धार्मिक विवाह की अपनी पीड़ा पर लिखा पोस्ट, कहा- धर्मांतरण विरोधी कानून का राष्ट्रीयकरण होना चाहिए

कमलरुख ने खुलासा किया कि कैसे इस्लाम में परिवर्तित होने के उनके प्रतिरोध ने उनके और उनके दिवंगत पति के बीच की खाई को बढ़ा दिया।

प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत के लिए गृहमंत्री अमित शाह ने संभाला मोर्चा, कहा- पहले हाईवे खाली कर तय मैदान में जाएँ

“मैं प्रदर्शनकारी किसानों से अपील करता हूँ कि भारत सरकार बातचीत करने के लिए तैयार है। कृषि मंत्री ने उन्हें 3 दिसंबर को चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। सरकार किसानों की हर समस्या और माँग पर विचार करने के लिए तैयार है।”

खालिस्तानियों के बाद कट्टरपंथी PFI भी उतरा ‘किसान विरोध’ के समर्थन में, अलापा संविधान बचाने का पुराना राग

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ओएमए सलाम ने भी घोषणा किया कि उनका इस्लामी संगठन ‘दिल्ली चलो’ मार्च का समर्थन करेगा। वह किसानों की माँगों के साथ खड़े हैं।

ओवैसी के गढ़ में रोड शो कर CM योगी आदित्‍यनाथ ने दी चुनौती, गूँजा- आया आया शेर आया… देखें वीडियो

सीएम योगी के रोड शो के में- ‘आया आया शेर आया.... राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की’, योगी-योगी, जय श्री राम, भारत माता की जय और वंदे मातरम के भी गगनभेदी नारे लगाए गए।

भोपाल स्टेशन के सालों पुराने ‘ईरानी डेरे’ पर चला शिवराज सरकार का बुलडोजर, हाल ही में हुआ था पुलिस पर पथराव

साल 2017 के एक आदेश में अदालत ने इस ज़मीन को सरकारी बताया था लेकिन अदालत के आदेश के बावजूद ईरानी यहाँ से कब्ज़ा नहीं हटा रहे थे।

मुंबई मेयर के ‘दो टके के लोग’ वाले बयान पर कंगना रनौत ने किया पलटवार, महाराष्ट्र सरकार पर कसा तंज

“जितने लीगल केस, गालियाँ और बेइज्जती मुझे महाराष्ट्र सरकार से मिली है, उसे देखते हुए तो अब मुझे ये बॉलीवुड माफिया और ऋतिक-आदित्य जैसे एक्टर भी भले लोग लगने लगे हैं।”

प्रदर्शन करने वाले किसानों को $1 मिलियन का ऑफर, खालिस्तान के समर्थन में खुलेआम नारेबाजी: क्या है SFJ का मास्टरप्लान

किसान आंदोलन पर खालिस्तान समर्थक ताकतों ने कब्ज़ा कर लिया है। SFJ पहले ही इस बात का ऐलान कर चुका है कि वह खालिस्तान का समर्थन करने वाले पंजाब और हरियाणा के किसानों को 10 लाख रूपए की आर्थिक मदद करेगा।

SEBI ने NDTV के प्रमोटरों प्रणय रॉय, राधिका रॉय और विक्रम चंद्रा समेत 2 अन्य को किया ट्रेडिंग से प्रतिबंधित, जानिए क्या है मामला

भारत के पूँजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने विवादास्पद मीडिया नेटवर्क NDTV के प्रवर्तकों प्रणय रॉय और राधिका रॉय को इनसाइडर ट्रेडिंग से अनुचित लाभ उठाने का दोषी पाया है।

शादी में पैसा, फ्री कार, मस्जिद-दरगाहों का विकास: तेलंगाना में ‘अल्पसंख्यकों’ पर 6 साल में ₹5600 करोड़ खर्च

तेलंगाना में अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के लिए सरकारी खजाने का नायाब उपयोग सामने आया है। तेलंगाना सरकार ने पिछले 6 वर्षों में राज्य में अल्पसंख्यक केंद्रित योजनाओं पर 5,639.44 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

ना MSP ख़त्म होगी, न APMC पर कोई फर्क पड़ेगा: जानिए मोदी सरकार के कृषि कानूनों को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों का सच

MSP हट जाएगा? APMC की शक्तियाँ ख़त्म हो जाएँगी? किसानों को फसल का नुकसान होगा? व्यापारियों की चाँदी होगी? कॉन्ट्रैक्ट कर के किसान फँस जाएँगे? जानिए सारी सच्चाई।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,444FollowersFollow
358,000SubscribersSubscribe