Wednesday, April 8, 2020
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फैक्ट चेक: केरल को बाढ़ राहत फंड देने पर कौन कर रहा है बदले की राजनीति, India Today या केंद्र सरकार?

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की वेबसाइट पर थोड़ा सा और गहराई में जाने पर पता चलता है कि केरल सरकार के पास पहले से ही 1 अप्रैल 2019 तक भी 2107 करोड़ रुपए का फंड मौजूद था। यानी, यह राशि 2018 की बाढ़ के समय भी इस्तेमाल नहीं किया गया था, जो कि जान-माल के नुकसान के मामले में 2019 की बाढ़ से भी ज्यादा भीषण थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

इंडिया टुडे ने हाल ही में एक लेख के जरिए केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए लिखा कि केंद्र ने केरल में बाढ़ पीड़ितों को राहत फंड देने में उन्हें राजनीतिक कारणों से नजरअंदाज किया है। इंडिया टुडे ने इस खबर को राजनीतिक रंग देते हुए केंद्र की दक्षिणपंथी भाजपा सरकार पर केरल की ‘लेफ्ट/वामपंथी’ सरकार से बदले की भावना का इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए।

क्या है मामला

इंडिया टुडे की हैडलाइन में लिखा गया था- “केरल सरकार को कोई राहत फंड नहीं, केंद्र ने फिर किया लेफ्ट शासित राज्य को नजरअंदाज।”

यह खबर पहली नजर में हैरान करने वाली लगती है और यह सवाल पैदा करती है कि वर्ष 2019-2020 के लिए तय किए गए 5908 करोड़ रुपए में से केरल के लिए कोई भी मदद राशि क्यों नहीं दी गई। मेनस्ट्रीम मीडिया ने अपना ध्येय वाक्य बनाया हुआ है कि प्रोपेगंडा के बीच में तथ्यों को नहीं आने देना है। लेकिन ऑपइंडिया मेनस्ट्रीम मीडिया के इसी प्रोपेगैंडा की मशीनरी को तोड़ने के लिए काम करता है।

क्या है वास्तविकता

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हमने सार्वजनिक प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कुछ तथ्यों को ढूँढा, जिन्हें कि इंडिया टुडे और अन्य समाचार पोर्टल्स भी केंद्र सरकार पर आरोप लगाने से पहले आसानी से जाँच सकते थे। हमने देखा कि पिछली बार केरल में बाढ़ के दौरान केंद्र सरकार को इन्हीं कुछ चुनिंदा मीडिया चैनल्स ने एक विलेन की भूमिका में दिखाया था।

मीडिया गिरोहों द्वारा UAE द्वारा मदद के लिए दी जा रही 700 करोड़ रुपए की मदद (जो कि मात्र एक अफवाह थी) पर वाहवाही तक दी गई और इसके लिए मीडिया गिरोह द्वारा बाढ़ के आपदा प्रबंधन में केंद्र सरकार की मदद को शून्य बताया गया। यह सब वर्ष 2018 की बात है।

केरल में वर्ष 2019 में भी बाढ़ आई थी लेकिन यह वर्ष 2018 के मुकाबले ज्यादा भीषण नहीं थी और इसलिए इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित नहीं किया गया। यही वजह थी कि NDRF के फंड को उन राज्यों को दिया गया, जिन्हें इसकी ज्यादा आवश्यकता थी।

आपदा प्रबंधन डिवीज़न की वेबसाइट NDRF को निम्नवत परिभाषित करती है-

यदि SDRF के पास सहायता राशि अपर्याप्त पड़ती है तो आपदा प्रबंधन एक्ट, 2005 के सेक्शन 46 के अंतर्गत निर्मित राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (National Disaster Relief Fund) राज्यों में SDRF (State Disaster Response Fund) को सहायता राशि उपलब्ध करवाता है।

यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि NDRF द्वारा यह फंड दो चरणों में बाँटा जाता है। 10,000 करोड़ रुपए की पहली किश्त की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी, दूसरी किश्त (5908 करोड़ रुपए) हाल ही में सामने आई है, जिस पर कि मीडिया गिरोह अपना षड्यंत्र रच रहा है।

आपदा प्रबंधन के लिए राज्यों को दी गई राशि पर नजर डालने से इस मामले पर पूरा प्रकाश पड़ता है। वर्ष 2019 में केंद्र ने केरल राज्य को 168.75 करोड़ रुपए दिए जबकि केरल की राज्य सरकार ने 56.25 करोड़ रुपए केरल SDRF के लिए तय किए। इसमें से भी केरल सरकार द्वारा सिर्फ 52.275 करोड़ रुपए ही इस्तेमाल किए गए।

जिसका सीधा सा आशय यह है कि केरल सरकार के SDRF के पास 2019 में जारी किए गए फंड का 173 करोड़ रुपए अभी भी शेष है और इस्तेमाल नहीं किया गया है। यहाँ से प्रश्न तो यह उठता है कि केरल की सरकार ने यह फंड अभी तक इस्तेमाल क्यों नहीं किया है? क्या मीडिया गिरोह को यह सवाल नहीं करना चाहिए कि अब केरल सरकार यह फंड इस्तेमाल ना कर के किस बदले की राजनीति कर रही है?

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की वेबसाइट पर थोड़ा सा और गहराई में जाने पर पता चलता है कि केरल सरकार के पास पहले से ही 1 अप्रैल 2019 तक भी 2107 करोड़ रुपए का फंड मौजूद था। यानी, यह राशि 2018 की बाढ़ के समय भी इस्तेमाल नहीं किया गया था, जो कि जान-माल के नुकसान के मामले में 2019 की बाढ़ से भी ज्यादा भीषण थी।

अब केरल सरकार के पास मौजूद वर्ष 2018 के बचे हुए राहत फंड और 2019 के बचे हुए फंड (2280 करोड़ रूपए में से, जो कि केंद्र सरकार द्वारा ही पहुँचाया गया था) पर नजर डालकर देखिए कि बदले की राजनीती कौन सी सरकार कर रही है, केंद्र कि दक्षिणपंथी सरकार या फिर केरल राज्य की वामपंथी सरकार?

जो लोग इस पूरे प्रकरण में भाजपा पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं वो केंद्र द्वारा पहले चरण में 1000 करोड़ रुपए, 3000 करोड़ रुपए और 500 करोड़ रुपए की सहायता राजस्थान, ओडिशा, और आंध्र प्रदेश राज्यों, जो कि गैर-भाजपा शासित राज्य हैं, को देने को किस तरह से नजरअंदाज कर देते हैं? क्या उनके पास दूसरे चरण में गैर-भाजपा शासित मध्य प्रदेश को दिए गए 1749 करोड़ रुपए के फंड और महाराष्ट्र को दिए गए 956 करोड़ रुपए देने के लिए कोई तर्क है?

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