Fact Check: CM खट्टर ने नहीं दिया कश्मीर से लड़कियाँ लाने वाला बयान, देखें वीडियो

खट्टर ने साफ़-साफ़ कहा कि 'लोग ऐसा कह रहे हैं' और ऐसे बयानों को 'मजाक की बातें' भी कहा लेकिन कई लोगों ने उन्हें ऐसे निशाना बनाना शुरू कर दिया, जैसे उन्होंने ही कश्मीर से लड़कियाँ लाने की बात कही हो।

मीडिया ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बयान को ग़लत तरीके से पेश किया। खट्टर ने हरियाणा में सुधरते लिंगानुपात की बात करते हुए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ की सफलता की चर्चा की। इस दौरान मीडिया ने सीएम के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश कर इसे विवादित बयान बताया। कई मीडिया पोर्टल्स ने ख़बर प्रकाशित किया कि खट्टर ने कश्मीर से लड़कियों को बहू बना कर लाने की बात कही है। आपको बता दें कि यह फेक न्यूज़ है। न मुख्यमंत्री ने ऐसा कुछ कहा है और न ही उनके बयान का यह अर्थ था। आइए आपको बताते हैं कैसे मीडिया ने इस बयान के साथ छेड़छाड़ कर इसे पेश किया।

सबसे पहले जानते हैं कि मुख्यमंत्री ने कहा क्या था? लिंगानुपात व ‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ की बात करते हुए खट्टर ने कहा कि हरियाणा का नाम पहले बदनाम था और यह बेटी मारने वाले प्रदेश के रूप में कुख्यात हो गया था। बेटियों को बचाने के लिए चलाई गई विभिन्न योजनाओं की सफलता पर बात करते हुए खट्टर ने बताया कि पहले हरियाणा में लिंगानुपात 850 था, अर्थात प्रति 1000 लड़कों पर 850 लड़कियों का अनुपात। वहीं अगर ताज़ा आँकड़ों की बात करें तो यह बढ़ कर 933 हो गया है, जो दिखाता है कि इस मामले में हरियाणा बड़े सुधार की ओर अग्रसर है।

लिंगानुपात के 850 ने 933 होने को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एक बहुत बड़ा परिवर्तन बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी बुजुर्ग या नौजवान इस बात को समझ सकता है कि लिंगानुपात घटने पर भविष्य में बहुत बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा, क्योंकि लड़कियों की संख्या कम हो जाएगी और लड़कों की संख्या बहुत ज्यादा हो जाएगी। इसके बाद अब मुख्यमंत्री के उस बयान पर आते हैं, जिसे लेकर विवाद खड़ा हुआ है। सीएम ने कहा,

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“हमारे धनखड़ जी ने कहा कि बिहार से (बहुएँ) लानी पड़ेंगी। अब कुछ लोग कह रहे हैं कि कश्मीर खुल गया, अब वहाँ से लेकर आएँगे। ‘मजाक’ की बातें अलग हैं। लेकिन समाज में लिंगानुपात ठीक होगा तो संतुलन बैठेगा।”

वीडियो को ध्यान से देखें और सुनें: खट्टर ने कुछ भी विवादित नहीं कहा, मीडिया ने ग़लत ख़बर चलाई

इस बयान को आप ऊपर संलग्न की गई वीडियो में भी सुन सकते हैं। दरअसल, खट्टर ने हरियाणा भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ओपी धनखड़ के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने बिहार और हरियाणा के बीच एक सामाजिक गठबंधन के द्वारा हरियाणा में लिंगानुपात सुधारने की बात कही थी। ऐसा उन्होंने हरियाणा में बिहारी लड़कियों की ट्रैफिकिंग रोकने का निदान सुझाते हुआ कहा था।

अब देखिए कैसे खट्टर के इस बयान को लेकर उन पर निशाना साधा गया। खट्टर ने साफ़-साफ़ कहा कि ‘लोग ऐसा कह रहे हैं’ और ऐसे बयानों को ‘मजाक की बातें’ भी कहा लेकिन कई लोगों ने उन्हें ऐसे निशाना बनाना शुरू कर दिया, जैसे उन्होंने ही कश्मीर से लड़कियाँ लाने की बात कही हो। शेखर गुप्ता की ‘द प्रिंट’ की कॉरेस्पोंडेंट ज्योति यादव ने हरियाणा की लिंगानुपात को लेकर पूरे हरियाणा को ही निशाने पर लिया और वहाँ के लोगों को भला-बुरा कहा।

स्क्रॉल ने भी खट्टर के इस बयान को ग़लत तरीके से पेश किया, जिसे दक्ष प्रोपेगंडाबाज अशोक स्वेन ने शेयर करते हुए आरोप लगाया कि आरएसएस के लोग कश्मीरी लड़कियों को ‘सेक्स स्लेव’ बनाना चाहते हैं।

स्क्रॉल की फेक ख़बर के आधार पर अशोक स्वेन ने लगाया बड़ा आरोप

स्क्रॉल की इस ख़बर को हामिद मीर और अरशद शरीफ जैसे पाकिस्तानी पत्रकारों ने भी शेयर किया। कर्नाटक यूथ कॉन्ग्रेस नेता श्रीवत्स ने इस फेक न्यूज़ के आधार पर लिखा कि जनता को खट्टर जैसे नेताओं को नकार देना चाहिए।

‘द हिन्दू’ जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों ने भी फेक न्यूज़ को अपनी वेबसाइट पर जगह दी

जेएनयू के विवादित छात्र नेता उम्र खालिद भी पीछे नहीं रहे और उन्होंने लिखा कि खट्टर जैसे मुख्यमंत्री के रहते हमें ट्रॉल्स की कोई ज़रूरत ही नहीं है।

‘इंडिया टुडे’ ने भी फैलाया फेक न्यूज़

कॉन्ग्रेस नेता तहसीन पूनावाला तो एक क़दम और आगे बढ़ गए। उन्होंने सीएम खट्टर को ‘घिनौनी और विकृत मानसिकता वाला व्यक्ति’ बता दिया। कॉन्ग्रेस नेता ने एक मुख्यमंत्री को उस बयान के लिए अपशब्द कहे, जो बयान उन्होंने दिया ही नहीं था।

गिरोह विशेष के सदस्यों के कुछ अन्य ट्वीट्स पर नजर डालिए। बिना सच जाने और ख़बर की सच्चाई की पुष्टि किए बिना उन्होंने फेक न्यूज़ के आधार पर सीएम खट्टर को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया। ये रहे ट्वीट्स:

कई मीडिया संस्थानों व पत्रकारों ने खट्टर के बयान को अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन से जोड़ा और संघ से लेकर भाजपा तक की मानसिकता पर सवाल खड़े किए। कॉन्सपिरेसी थ्योरी के एक्सपर्ट्स ने एक से बढ़ कर एक झूठ का सहारा लिया और अपनी मानसिकता का परिचय दिया। लेकिन, वीडियो के सामने आने के बाद उनकी पोल खुल गई।

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