Sunday, June 7, 2020
होम फ़ैक्ट चेक राजनीति फ़ैक्ट चेक अमित शाह ने माइक दबाकर नहीं, खुलकर बोला था - 'मैं बनिया हूँ': मीडिया...

अमित शाह ने माइक दबाकर नहीं, खुलकर बोला था – ‘मैं बनिया हूँ’: मीडिया गिरोह फैला रहा झूठ

अमित शाह के बयान को शब्दशः लिखना ज़रूरी है, क्योंकि उनके झारखंड में चुनावी सभा के दिए गए बयान के संदर्भ से ही छेड़छाड़ कर पत्रकारिता का समुदाय विशेष फेक न्यूज़ फैलाने के अपने नए हथियार को धार देने में जुटा है।

ये भी पढ़ें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

“…कमल के निशान पर जो वॉट (वोट) दबाओगे ना, वो वॉट तिवारी (भाजपा विधानसभा प्रत्याशी) को नहीं जाएगा, वो वोट नरेंद्र मोदी को मिलने वाला है… ये समझकर दबाना… मगर मुझे ‘हा हा’ कर रहे हो, ये बीस-पचीस हजार लोगों से तिवारी जीत जाएँगे क्या? जीतेंगे क्या?… अरे भाई, क्या ‘हा’ कह रहे हो? मैं भी बनिया हूँ… मुझे मालूम है नहीं जीतेंगे यार…” 

यहाँ गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बयान को शब्दशः लिखना ज़रूरी है, क्योंकि उनके झारखंड में चुनावी सभा के दिए गए बयान के संदर्भ से ही छेड़छाड़ कर पत्रकारिता का समुदाय विशेष फेक न्यूज़ फैलाने के अपने नए हथियार को धार देने में जुटा है। इस नए हथियार का नाम है ‘सही तथ्य की फेक न्यूज़’। 

झूठे तथ्यों और झूठे नैरेटिव के फ़ैल हो जाने के बाद मीडिया गिरोह यह नया, परिष्कृत हथियार लेकर आया है- जिसमें न मुख्य तथ्य के साथ छेड़छाड़ होती है और न ही किसी तरह का नैरेटिव दिया जाता है। केवल उस तथ्य के आसपास का संदर्भ गोल कर दिया जाता है, तोड़-मरोड़ दिया जाता है, या फिर उस तथ्य की रिपोर्टिंग ऐसे अंदाज़ में की जाती है कि जो झूठ शब्दों में न आ पाए, वह टोन में आ जाए। अमित शाह के झारखंड की चुनावी रैली में दिए गए भाषण को लेकर ऐसी ही ‘सही तथ्य की फेक न्यूज़’ प्रचारित हो रही है- और इसे करने में अग्रणी है द टेलीग्राफ, और इसके वरिष्ठ संवाददाता अंकुर भारद्वाज।

जैसा कि उनके भाषण के ऊपर दिए गए शब्दों से साफ़ है, और ऊपर के वीडियो में भी देखा जा सकता है, अमित शाह ने यह बात एक रौ में जनता से संवाद करते हुए कही थी। लेकिन अलग-अलग मीडिया गिरोह इसे अलग-अलग तरीके से ‘स्पिन’ देने की कोशिश कर रहा है, वह भी फेक न्यूज़ का। कहीं कोई वॉट्सऍप फॉरवर्ड मिल रहा है जिसमें केवल “अरे भाई, मैं भी बनिया हूँ” चल रहा है, कहीं कोई अख़बार या पोर्टल लिख रहा है कि अमित शाह यह बात मंच पर बैठे कुछ ही लोगों से कहना चाहते थे और माइक बंद न होने से ‘गलती से’ यह सबको सुनने को मिल गया। 

लेकिन अमित शाह के भाषण के वीडियो और उनके शब्दों से यह साफ है कि उन्होंने यह बात अपना भाषण सुन रहे लोगों को इंगित कर के ही कही थी। इस दौरान न ही वे मंच की ओर मुड़े और न ही माइक बंद करने की कोई कोशिश की। लेकिन टेलीग्राफ़ की रिपोर्ट में भी, और उसे साझा करते हुए उनके वरिष्ठ संवाददाता अंकुर भारद्वाज के ट्वीट में भी, माइक के बंद होने-न होने का ज़िक्र कर ऐसा जताने की कोशिश की गई है कि भूलवश अमित शाह ने खुले ,माइक पर यह बात कह दी।

अंकुर भरद्वाज के ट्वीट ने एक और झूठ फैलाया- कि अमित शाह ने यह बात मंच पर मुड़ कर कहने की कोशिश की थी। वीडियो देखने से यह साफ हो जाएगा कि उन्होंने यह बात नीचे बैठे श्रोताओं से ही कही थी। इतना छोटा झूठ फ़ैलाने का क्या लाभ?- यह सवाल जायज़ है। इसका जवाब यह है कि इसके ज़रिए ऐसा दिखाने की कोशिश की जा रही है कि अमित शाह किसी जातिवादी संदर्भ में अपनी जाति का ज़िक्र कर रहे थे, और इसे छिपाने की कोशिश कर रहे थे- जबकि सच्चाई इससे कोसों दूर है। 

उन्होंने यह बात किसी जातिवादी संदर्भ में नहीं बल्कि कम भीड़ पर नाराज़गी जताने के लिए कही थी- और जिस लहजे में उन्होंने यह कहा था, वह भारत के आम जीवन में बहुत आम है। अमूमन हम में से हर कोई अपनी जाति को किसी न किसी गुण से जोड़ता है, और अगर किसी स्थिति में उसे लगता है कि उस गुण विशेष में कोई उससे इक्कीस बनने की कोशिश कर रहा है तो अपनी जाति का हवाला उस व्यक्ति को हम यह याद दिलाने के लिए देते हैं कि इस गुण विशेष में हमने भी कच्ची गोलियाँ नहीं खेलीं। अमित शाह के मामले में यह गुण (चुनावी) गणित और वह दूसरा व्यक्ति सामने बैठी जनता है। 

अमित शाह ने जब पूछा, “ये बीस-पचीस हजार लोगों से तिवारी जीत जाएँगे क्या?” तो भीड़ में से कुछ लोग या तो उनका गुस्सा समझे नहीं, या समझ गए लेकिन और कोई जवाब नहीं सूझा तो “हाँ-हाँ” करने लगे। उसी पर खीझ कर उन्होंने याद दिलाया कि वे भी बनिया हैं (बनियों को आम अवधारणा में व्यवहारिक हिसाब किताब में कुशल माना जाता है), और इसलिए संगठन के लोग उन्हें मूर्ख न बनाएँ, गलत आश्वासन न दें। इस बात को उन्होंने पूरे आत्मविश्वास, पूरी ठसक के साथ कहा- क्योंकि पता था कि न ही वे किसी दूसरी जाति को नीचा दिखा रहे हैं और न ही जाति के आधार पर वोट  माँग रहे हैं। लेकिन इसी बात को माइक के ज़िक्र के साथ जोड़कर मीडिया ने ऐसा दिखाने की कोशिश की है जैसे वे यह जानते हुए कि कुछ गलत बोल रहे हैं, इसीलिए यहाँ माइक का ज़िक्र ज़रूरी है। 

और जाते-जाते एक और बात- अभी कुछ दिन पहले कहीं से गुज़रते हुए मैंने संयोगवश झगड़ रहे लोगों की बहस में से एक वाक्य सुना, “…साले, तुम्हें पता नहीं है- खटिक हैं हम, काट देंगे एक्कै बार में…”। मुझे किसी संदर्भ, किसी परिप्रेक्ष्य, दूसरे इंसान की जाति का अता-पता नहीं है, लेकिन इतना जानता हूँ कि पारम्परिक रूप से हिन्दुओं में सबसे अधिक कसाई और माँस-व्यापार करने वाली जाति खटिक दलितों में आती है- ऐसा माना जाता है कि तथाकथित ब्राह्मणवादियों द्वारा सबसे अधिक कथित तौर पर उत्पीड़ित जातियों में से एक है। और अगर उसका व्यक्ति भी आज के समय में वक्त और परिस्थिति के हिसाब से किसी जगह अपनी जाति का हवाला एक गुण के रूप में देता है, तो इसका मतलब साफ़ है कि जाति का हवाला भर देना हर जगह जातिवाद नहीं बन जाता।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

ख़ास ख़बरें

कार में पड़ी मिली दिल्ली दंगों की जाँच कर रहे पुलिस अधिकारी की लाश, चोट के कोई निशान नहीं: मौत का कारण स्पष्ट नहीं

सब-इंस्पेक्टर विशाल खानवलकर शव पर चोट के कोई निशान नहीं थे, जिससे फ़िलहाल मौत के कारण का अंदाजा नहीं लगाया जा सका है।

वो मंदिर भी जाएगा, पूजा भी करेगा: ‘द जज’ के निर्देशक से जानिए ‘लव जिहाद’ पर फिल्म बनाने की वजह

जीतू आरवमुधन ने 'स्वराज्य मैग' में एक लेख लिख कर बताया है कि उन्होंने लव जिहाद पर 'द जज' नामक फिल्म क्यों बनाई।

जब तिब्बत की संस्कृति और लोगों को तबाह कर रहा था चीन, उसके सैनिकों के लिए नेहरू ने भेजे थे चावल

आत्ममुग्ध नेहरू ने ​कई भूल किए। इनमें से एक तिब्बत भी है। विश्वनेता बनने की उनकी चाह ने चीन की सभी इच्छाएँ पूरी की थी।

माफ़ करना, मैं तुम्हारे प्रोग्राम्स नहीं देखता: CM केजरीवाल ने की राहुल कँवल की ऑनलाइन बेइज्जती

राहुल कँवल ने बखान किया कि वो इस बात से अभिभूत हैं कि सीएम अरविन्द केजरीवाल ने उनका शो देखा। केजरीवाल ने उनकी बात पूरी तरह नकार दी

डर का माहौल है… क्योंकि हिंदुत्व बड़ी निर्दयी चीज है, इससे ज्यादा लचक तो आतंकवाद में है

जिस हिंदुत्व का रोना रोकर पाकिस्तान से लेकर भारत तक वाममार्गी इसे खतरनाक जताने की कोशिश करते हैं उसका न तो दहशतगर्दी का अतीत है, न वर्तमान। फिर भी वही है खतरा।

हथिनी की मौत के बाद ऑल्टन्यूज ने मुस्लिम आरोपितों को बचाने की कोशिश में किए खबर में कई बदलाव

ऑल्टन्यूज़ अभी भी अपने इस दावे पर खड़ा है कि इसमें मुस्लिम नजरिए जैसी कोई बात नहीं थी और यह मुस्लिमों को निशाना बनाने के लिए गढ़ी गई, साथ ही यह भी रिपोर्ट को 'डेवलपिंग स्टोरी' बताते हुए खत्म किया है।

प्रचलित ख़बरें

लव जिहाद में मारी गई एकता: भाभी रेशमा ने किया था नंगा, शाकिब और अब्बू सहित परिवार ने किए थे शरीर के टुकड़े

पीड़िता की माँ सीमा शाकिब का साथ देने वाली उसकी दोनों भाभियों रेशमा और इस्मत से पूछती रहीं, क्या एकता के कपड़ें उतारते हुए, उसे नंगा करते हुए...

हथिनी के बाद, अब हिमाचल में गर्भवती गाय को बम खिलाने की बात सोशल मीडिया पर आई सामने

सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे इस वीडियो में हिमाचल प्रदेश के गुरदयाल सिंह इस जख्मी गाय के साथ नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि लोग गौरक्षा की बात कर रहे हैं जबकी......

तुम्हारी मॉं हिंदू थी, हम तुम पर कैसे यकीन कर लें: नवाजुद्दीन सिद्दीकी की भतीजी ने किए चौंकाने वाले खुलासे

एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी के परिवार में महिलाओं का शोषण आम है। यह दावा उनकी ही भतीजी साशा सिद्दीकी ने किया है। पढ़िए, शोषण के अंतहीन सिलसिले के बारे में।

ऑपरेशन ब्लू स्टार: जब सेना को स्वर्ण मंदिर पर चढ़ाने पड़े टैंक, जिसके कारण मारी गईं इंदिरा गाँधी

लेफ्टिनेंट जनरल केएस बरार को जाना मनीला था, लेकिन कमान मिली ऑपरेशन ब्लू स्टार की जो 6 जून 1984 को खत्म हुआ।

दरभंगा: नजीर के घर बड़ा धमाका, 1 किमी तक गूॅंजी आवाज; लोगों ने पूछा- बम बना रहा था या पटाखा?

नजीर के परिवार के 5 लोगों जख्मी हैं। इनमें तीन बच्चे हैं। जबरदस्त धमाके के साथ हुए विस्फोट में लगभग एक दर्जन घर क्षतिग्रस्त हो गए।

सीता माता पर अभद्र टिप्पणी करने वाले ट्रेनी ऑफिसर आसिफ खान को GoAir ने बाहर निकाला

GoAir ने आसिफ खान को बाहर का रास्ता दिखाते हुए कहा है कि किसी व्यक्ति या कर्मचारी के निजी विचारों से उसका कोई लेना-देना नहीं है।

Covid-19: भारत में कोरोना के कुल 115942 सक्रिय मरीज, अब तक 6642 ने गँवाई जान

भारत में 6 जून तक कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 236656 हो गई है, जिसमें से 115942 सक्रिय मामले हैं, 114072 लोग ठीक हो चुके हैं और 6642 लोगों की मौत हो चुकी है।

अमूल ने जारी किया चीनी सामान के बहिष्कार का पोस्टर: ट्विटर ने अमूल का ट्विटर एकाउंट किया सस्पेंड

अमूल के प्रबंध निदेशक आर एस सोढ़ी ने ट्विटर पर जानकारी देते हुए कहा कि ट्विटर इंडिया के एमडी मनीष माहेश्वरी से बातचीत की है जिन्होंने यह दावा.....

सभी सिख अपना अलग खालिस्तान चाहते हैं: ऑपरेशन ब्लूस्टार की वर्षगाँठ पर अकाल तख्त जत्थेदार की माँग

अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने भी सिंह के विचारों का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "यदि सरकार हमें खालिस्तान पेश करती है तो हम इसे स्वीकार करेंगे।"

कार में पड़ी मिली दिल्ली दंगों की जाँच कर रहे पुलिस अधिकारी की लाश, चोट के कोई निशान नहीं: मौत का कारण स्पष्ट नहीं

सब-इंस्पेक्टर विशाल खानवलकर शव पर चोट के कोई निशान नहीं थे, जिससे फ़िलहाल मौत के कारण का अंदाजा नहीं लगाया जा सका है।

दिल्ली के अस्पताल में लावारिस हालत में पड़े शवों के बीच चल रहा कोरोना मरीजों का इलाज, भाजपा नेता ने दिखाई हकीकत

व्यक्ति ने आरोप लगाया कि उसकी भाभी को कोरोनो वायरस से मरे 5 घंटे से अधिक हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उनकी डेड बॉडी को कवर नहीं किया......

‘सिंथिया रिची के साथ सेक्स करना चाहते थे इमरान खान, दिया था ऑफर’: अमेरिकी ब्लॉगर के करीबी का खुलासा

अभिनेता अली सलेम ने कहा कि इमरान खान ने सिंथिया को उनके साथ सेक्स करने का ऑफर दिया था, ये बात सिंथिया रिची ने उन्हें खुद बताई थी।

राजस्थान: सदस्यता अभियान के नाम पर हड़पे करोड़ों रुपए, यूथ कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित चार पर FIR दर्ज

थाना प्रभारी राजेन्द्र खदाव ने बताया कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय यूथ कॉन्ग्रेस की कार्यकारिणी के पदाधिकारियों पर रुपए हड़पने का.......

‘इंशाल्लाह! अबकी प्रदर्शन और हिंसक होगा’: बैंकर ‘अफसार भाई’ साथियों संग रच रहा अमेरिका की तर्ज पर दंगे की साजिश

बैंक ऑफ बड़ौदा में कार्यरत 'अफसार भाई' द्वारा लखनऊ में एक हिंसक प्रदर्शन व दंगे की तैयारी करने की बात सामने आ रही है। उसके फेसबुक कमेंट्स से ऐसा पता चलता है।

वो मंदिर भी जाएगा, पूजा भी करेगा: ‘द जज’ के निर्देशक से जानिए ‘लव जिहाद’ पर फिल्म बनाने की वजह

जीतू आरवमुधन ने 'स्वराज्य मैग' में एक लेख लिख कर बताया है कि उन्होंने लव जिहाद पर 'द जज' नामक फिल्म क्यों बनाई।

पालघर पर चुप रहने वाले, फेयरनेस क्रीम का प्रचार करने वाले ‘ब्लैक लाइव्स’ पर ज्ञान बाँच रहे: कंगना रनौत

“हर देश के अपने अलग-अलग मुद्दे होते है, हमें दुनिया को सुधारने की कोशिश करने से पहले अपने भीतर की बुराई से निपटना होगा। और ऐसा करने में हम असफल हो रहे हैं।"

हमसे जुड़ें

213,130FansLike
61,542FollowersFollow
246,000SubscribersSubscribe