Wednesday, January 27, 2021
Home फ़ैक्ट चेक सोशल मीडिया फ़ैक्ट चेक '15 जून से देश भर में दोबारा लॉकडाउन लागू होगा' - सोशल मीडिया पर...

’15 जून से देश भर में दोबारा लॉकडाउन लागू होगा’ – सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबर का Fact Check

गृह मंत्रालय ने देश में फिर से लॉकडाउन को लागू करने के संबंध में कोई भी घोषणा नहीं की है। दोबारा लॉकडाउन को लेकर जिस फोटो को इंटरनेट पर फैलाया जा रहा है, उसको जानबूझकर अफवाह फैलाने के लिए बनाया गया है। जिस चैनल की खबर को दिखा कर यह दावा किया जा रहा, खुद उस चैनल को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।

देश में कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन को अब धीरे-धीरे खोला जा रहा है। अनलॉक फेज-1 के लागू होने के बाद से ही इंटरनेट पर एक फ़ोटो तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें यह दावा किया जा रहा कि देशव्यापी लॉकडाउन एक बार फिर 15 जून से लागू होने जा रहा है।

सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर इस वक्त तेज़ी से एक हिंदी न्यूज़ चैनल की फ़ोटो को वायरल किया जा रहा, जिसमें यह दावा किया गया है कि लॉकडाउन 15 जून से दोबारा शुरू होने वाला है। उस फ़ोटो में यह खबर लिखी गई है कि गृह मंत्रालय ने 15 जून से देशव्यापी लॉकडाउन लागू करने की दिशा में संकेत दिया है, जिसमें दोबारा से उड़ानों और ट्रेनों पर प्रतिबंध भी शामिल है।

हालाँकि, बाद में यह पता चला कि कथित तौर पर एक हिंदी समाचार चैनल से संबंधित तस्वीर फर्जी और लोगों को गुमराह करने के लिए फैलाई जा रही थी। 15 जून से देश में एक और लॉकडाउन की अफवाहों को आधिकारिक तौर पर प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की फैक्ट-चेक टीम ने खारिज किया है।

पीआईबी फैक्ट चेक के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट ने लॉकडाउन के फिर से शुरू होने की खबर को फर्जी घोषित किया है। यह जरूरी था ताकि लॉकडाउन को लेकर लोगों के बीच फैलाए जा रहे भ्रम को खत्म किया जा सके।

गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने देश में फिर से लॉकडाउन को लागू करने के संबंध में कोई भी घोषणा नहीं की है। इसके अलावा लॉकडाउन को लेकर जिस खबर की फोटो को इंटरनेट पर फैलाया जा रहा है, उसको जानबूझकर अफवाह फैलाने के लिए बनाया गया है। यहाँ तक जिस चैनल की तरफ से यह दावा किया जा रहा, उसे भी इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।

बता दें कि 1 जून से केंद्र सरकार द्वारा दोबारा से अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और आम जीवन को सामान्य करने लिए अनलॉक किए जाने वाले फैसले के बाद से ही लॉकडाउन को फिर से लागू करने वाली अफवाहें सामने आई थीं।

8 जून तक स्थानीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा अपने क्षेत्र की स्थिति के आधार पर कार्यालयों, मॉल, रेस्तरां और धार्मिक स्थलों को फिर से खोलने सहित देश ने सभी तीन चरणों को पूरा कर लिया था। सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए सरकार द्वारा फ्लाइट और ट्रेनों को दोबारा से चलाने के लिए नए-नए तरीके भी अपनाए जा रहे हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

 

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

लहराया गया खालिस्तानी झंडा, लगे भारत विरोधी नारे: वॉशिंगटन में किसान समर्थन की आड़ में खालिस्तान की माँग

वॉशिंगटन में खालिस्तानी समर्थकों ने कहा कि वह अब तक 26 जनवरी को काला दिन मना रहे थे, लेकिन इस बार एकजुटता में खड़े हैं।

ट्रैक्टर पलटने के बाद जिंदा था ‘किसान’, प्रदर्शनकारी अस्पताल नहीं ले गए… न पुलिस को ले जाने दिया: ‘Times Now’ का खुलासा

उक्त 'किसान' ट्रैक्टर से स्टंट मारते हुए पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ रहा था, लेकिन अपनी ही ट्रैक्टर पलटने के कारण खुद उसके नीचे आ गया और मौत हो गई।

11.5% की आर्थिक वृद्धि दर, 2021 में भारत के लिए IMF का अनुमान: एकमात्र बड़ा देश, जो बढ़ेगा दहाई अंकों के साथ

IMF ने भारत की अर्थव्यवस्था को 2021-22 में 11.5 प्रतिशत तक उछाल देने का अनुमान लगाया। वर्ल्ड इकॉनमिक आउटलुक रिपोर्ट में...

153 पुलिसकर्मी घायल, 7 FIR दर्ज: किसी का सर फटा तो कोई ICU में, राकेश टिकैत ने पुलिस को ही दिया दोष

दिल्ली पुलिस ने 'किसानों' द्वारा हुई हिंसा के मामलों को लेकर 7 FIR दर्ज की है। दिन भर चले हिंसा के इस खेल में 153 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं।

Video: किसानों के हमले में दीवार से एक-एक कर गिरते रहे पुलिसकर्मी, 109 घायल

वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

प्रचलित ख़बरें

दिल्ली में ‘किसानों’ ने किया कश्मीर वाला हाल: तलवार ले पुलिस को खदेड़ा, जगह-जगह तोड़फोड़, पुलिस वैन पर पथराव

दिल्ली में प्रदर्शनकारी पुलिस के वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। 'किसानों' द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं।

महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को जबरन घेर कर कोने में ले गए ‘अन्नदाता’, किया दुर्व्यवहार: एक अन्य जवान हुआ बेहोश

महिला पुलिस को किसान प्रदर्शनकारी चारों ओर से घेरे हुए थे। कोने में ले जाकर महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

तेज रफ्तार ट्रैक्टर से मरा ‘किसान’, राजदीप ने कहा- पुलिस की गोली से हुई मौत, फिर ट्वीट किया डिलीट

राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है।

दलित लड़की की हत्या, गुप्तांग पर प्रहार, नग्न लाश… माँ-बाप-भाई ने ही मुआवजा के लिए रची साजिश: UP पुलिस ने खोली पोल

बाराबंकी में दलित युवती की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया। पुलिस ने बताया कि पिता, माँ और भाई ने ही मिल कर युवती की हत्या कर दी।

हिंदुओं को धमकी देने वाले के अब्बा, मोदी को 420 कहने वाले मौलाना और कॉन्ग्रेस नेता: ‘लोकतंत्र की हत्या’ गैंग के मुँह पर 3...

पद्म पुरस्कारों में 3 नाम ऐसे हैं, जो ध्यान खींच रहे- मौलाना वहीदुद्दीन खान (पद्म विभूषण), तरुण गोगोई (पद्म भूषण) और कल्बे सादिक (पद्म भूषण)।

रस्सी से लाल किला का गेट तोड़ा, जहाँ से देश के PM देते हैं भाषण, वहाँ से लहरा रहे पीला-काला झंडा

किसान लाल किले तक घुस चुके हैं और उन्होंने वहाँ झंडा भी फहरा दिया है। प्रदर्शनकारी किसानों ने लाल किले के फाटक पर रस्सियाँ बाँधकर इसे गिराने की कोशिश भी कीं।
- विज्ञापन -

 

राजस्थान में महादेव मंदिर के 75 वर्षीय सेवादार की हत्या: हाथ-पाँव रस्सी से बँधे, मुँह में ठूँस डाला था कपड़ा

75 वर्षीय वृद्ध सेवादार गिरिराज मेहरा की हत्या कर दी गई। जयपुर के सोडाला इलाके में राकड़ी स्थित मेहरा समाज के राकेश्वर महादेव मंदिर की घटना।

लहराया गया खालिस्तानी झंडा, लगे भारत विरोधी नारे: वॉशिंगटन में किसान समर्थन की आड़ में खालिस्तान की माँग

वॉशिंगटन में खालिस्तानी समर्थकों ने कहा कि वह अब तक 26 जनवरी को काला दिन मना रहे थे, लेकिन इस बार एकजुटता में खड़े हैं।

ट्रैक्टर पलटने के बाद जिंदा था ‘किसान’, प्रदर्शनकारी अस्पताल नहीं ले गए… न पुलिस को ले जाने दिया: ‘Times Now’ का खुलासा

उक्त 'किसान' ट्रैक्टर से स्टंट मारते हुए पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ रहा था, लेकिन अपनी ही ट्रैक्टर पलटने के कारण खुद उसके नीचे आ गया और मौत हो गई।

11.5% की आर्थिक वृद्धि दर, 2021 में भारत के लिए IMF का अनुमान: एकमात्र बड़ा देश, जो बढ़ेगा दहाई अंकों के साथ

IMF ने भारत की अर्थव्यवस्था को 2021-22 में 11.5 प्रतिशत तक उछाल देने का अनुमान लगाया। वर्ल्ड इकॉनमिक आउटलुक रिपोर्ट में...

153 पुलिसकर्मी घायल, 7 FIR दर्ज: किसी का सर फटा तो कोई ICU में, राकेश टिकैत ने पुलिस को ही दिया दोष

दिल्ली पुलिस ने 'किसानों' द्वारा हुई हिंसा के मामलों को लेकर 7 FIR दर्ज की है। दिन भर चले हिंसा के इस खेल में 153 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं।

लालकिला में देर तक सहमें छिपे रहे 250 बच्चे, हिंसा के दौरान 109 पुलिसकर्मी घायल; 55 LNJP अस्पताल में भर्ती

दिल्ली में किसान ट्रैक्टर रैली का सबसे बुरा प्रभाव पुलिसकर्मियों पर पड़ा है। किसानों द्वारा की गई इस हिंसा में 109 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं, जिनमें से 1 की हालात गंभीर बताई जा रही है।

Video: किसानों के हमले में दीवार से एक-एक कर गिरते रहे पुलिसकर्मी, 109 घायल

वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन आदि में भी हो चुकी हैं ट्रैक्टर रैलियाँ, लेकिन दिल्ली वाला दंगा कहीं नहीं हुआ

दिल्ली में जो आज हुआ, स्पेन, आयरलैंड, और जर्मनी के किसानों ने वो नहीं किया, हालाँकि वो भी अन्नदाता ही थे और वो भी सरकार के खिलाफ अपनी माँग रख रहे थे।

किसानों के आंदोलन में खालिस्तानी कड़े और नारे का क्या काम?

सवाल उठता है कि जो लोग इसे पवित्र निशान साहिब बोल रहे हैं, वो ये बताएँ कि ये नारा और कड़ा किसका है? यह भी बताएँ कि एक किसान आंदोलन में मजहबी झंडा कहाँ से आया? उसे कैसे डिफेंड किया जाए कि तिरंगा फेंक कर मजहबी झंडा लगा दिया गया?

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
386,000SubscribersSubscribe