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कट्टरपंथी इस्लामी संगठन से चंदा लेने वाले जिग्नेश मेवाणी ने फैलाई फेक न्यूज़, लपेटा PM मोदी को भी

फेक न्यूज़ फ़ैलाने के बाद अपनी बढ़ती आलोचना पर खिसिया कर जिग्नेश मेवाणी ने अपने आरोप और दावे आधे-अधूरे तौर पर वापस ले लिया। लेकिन प्रधानमंत्री को टैग किए गए ट्वीट को डिलीट नहीं करके इन्होंने अपनी थेथरई...

वडगाम के ‘निर्दलीय’ विधायक और कॉन्ग्रेस-कम्युनिस्ट समर्थक जिग्नेश मेवानी आज (20 मई को) दोपहर सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ फैलाते पकड़े गए। किसी बच्चे की निर्मम पिटाई के वीडियो को पहले तो उन्होंने गुजरात के वलसाड स्थित RMVM स्कूल का बताते हुए शेयर किया। प्रधानमंत्री कार्यालय के ट्विटर हैंडल को टैग कर मोदी को लपेटने की कोशिश की और कुछ देर बाद खुद ही लोगों से पूछते नजर आए कि वीडियो हिंदुस्तान का है भी या मिस्र (ईजिप्ट) का है।

वीडियो की जाँच किए बिना शेयर करना जनप्रतिनिधि की गरिमा से नीचे

जिग्नेश मेवानी ने वीडियो शेयर करते हुए पहले लिखा, “मुझे यह संदेश मिला, ‘आप के whatsapp पे जितने भी नंबर एवं ग्रुप हैं एक भी छूटने नहीं चाहिए, ये वीडियो सबको भेजिए ये वलसाड के RMVM SCHOOL का टीचर है, इसको इतना शेयर करो कि ये टीचर और स्कूल दोनों बंद हो जाए।’ @PMOIndia, कृपया हमें बताइए यह क्या हो रहा है।” यानी उन्होंने वीडियो की सत्यता का अप्रत्यक्ष दावा करते हुए सवाल पूछा।

उसके बाद लोगों ने उनके ट्वीट के जवाब में कृत्य की भर्त्सना तो की, पर वीडियो के भारत के होने पर सवाल उठा दिए।

तब अपनी बढ़ती आलोचना पर खिसिया कर जिग्नेश मेवानी ने अपने आरोप और दावे आधे-अधूरे तौर पर वापिस लेते हुए ट्वीट कर पूछा कि यह वीडियो गुजरात की है या इजिप्ट की? विधायक साहब! अगर आपको पता ही नहीं है तो फिर देश के पीएम को संबोधित करते हुए सवाल क्यों दाग दिए थे पिछली ट्वीट में?

हमारी जाँच में पता चला कि इसी स्कूल के नाम से एक बार पहले भी पिछले साल फेक न्यूज़ फ़ैलाने की कोशिश हो चुकी है। उस समय लल्लनटॉप और ऑल्ट न्यूज़ ने इसका फैक्ट चेक कर इसे फर्जी करार दिया था। ऐसे में सवाल यह है कि अपने ही राज्य में फेक न्यूज़ और दुष्प्रचार के पहले भी शिकार हो चुके एक स्कूल के खिलाफ कुछ शेयर करने से पहले एक जनप्रतिनिधि होने के नाते मेवानी ने खुद जाँच क्यों नहीं की? या एक्ज़िट पोल के नतीजों से वह इतने सदमे में चले गए हैं कि विधायक की गरिमा और जिम्मेदारी से अब उन्हें कोई वास्ता नहीं बचा है?

आपको याद दिला दें कि जिग्नेश मेवानी ने कट्टरपंथी इस्लामी संगठन से चंदा लेकर राजनीति की पारी शुरू की थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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