Sunday, October 17, 2021
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आतंकियों के हमले में जवान के साथ हुई थी बच्चे की मौत, सेना पर हत्या का दोष मढ़ रहे इस्लाम और पाक परस्त

आतंकवादियों की करतूत पर पर्दा डालने के लिए कश्मीरी अलगाववादी और पाकिस्तानी हैंडल वाले अकाउंट सोशल मीडिया में कूद पड़े हैं। वे सेना द्वारा बच्चे की हत्या किए जाने का दुष्प्रचार कर रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के बिजबेहारा इलाके में आतंकियों ने सीआरपीएफ के गश्ती दल को निशाना बनाकर 26 जून को हमला किया था। हमले में एक जवान वीरगति को प्राप्त हो गया। छह साल के एक बच्चे की भी मौत हो गई। मृत बच्चे की पहचान निहान यवर के रूप में हुई है।

आतंकवादियों की इस करतूत पर पर्दा डालने के लिए कश्मीरी अलगाववादी और पाकिस्तानी हैंडल वाले अकाउंट सोशल मीडिया में कूद पड़े हैं। वे सेना द्वारा बच्चे की हत्या किए जाने का दुष्प्रचार कर रहे हैं।

कश्मीरी अलगाववादियों और पाकिस्तानी ट्विटर हैंडल ने कश्मीरी आतंकवादी के बच्चे की हत्या का इस्तेमाल यह दावा करने के लिए किया कि भारत कश्मीरियों पर अत्याचार कर रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी माँग की कि जिहादियों को कश्मीर पहुँचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ मामले में हस्तक्षेप करें।

न्यूजलॉन्ड्री के स्तंभकार शरजील उस्मानी ने भी इस प्रोपेगेंडा को हवा देने के लिए इस फर्जी खबरों को रीट्वीट करके आगे बढ़ाया।

शरजील उस्मानी का रीट्वीट

हालाँकि, कश्मीर पुलिस ने स्पष्ट किया कि सीआरपीएफ के गश्ती दल पर आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलियाँ चलाई थी, जिसमें बच्चे की मौत हो गई।

गौरतलब है कि इस तरह की फर्जी खबरें कोई नई बात नहीं है, पाकिस्तानी हैंडल कश्मीर में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए इस तरह के दुष्प्रचार में शामिल होने के लिए जाने जाते हैं। स्वघोषित पाकिस्तानी ‘ट्रोल’ फरहान विर्क ने हाल ही में एक डॉक्यूमेंट्री में खुलासा किया था कि किस तरह से पाकिस्तानी राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोपेगेंडा फैलाया जाता है।

विर्क ने यह भी खुलासा किया था कि पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा किए गए बालाकोट हवाई हमले के दौरान नुकसान को कम दिखाने के लिए भी इस तरह का प्रोपेगेंडा फैलाया था। उसने कहा था, “मेरी विचारधारा राष्ट्रीय हित की है। अपने राष्ट्रीय हित की रक्षा के लिए, भले ही आप कुछ ऐसा कहें जो सच नहीं है, लेकिन यह लोगों को सकारात्मक तरीके से प्रभावित करता है, तो फिर मैं इसे प्रोपेगेंडा नहीं मानता।”

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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