कहाँ गायब हो गया दुर्घटनाग्रस्त AN-32 को खोजने के लिए निकला ‘लोकल टार्ज़न’?

40 वर्षीय यूबी को स्थानीय अधिकारियों ने 15 किलो चावल और कई अन्य चीजें देकर इस विमान का पता लगाने को कहा।

भारतीय वायुसेना के गायब हुए विमान AN-32 का मलबा मिल गया है और इसमें सवार सभी 13 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। इस दुःखद घटना के बाद इस ट्रांसपोर्ट विमान का ब्लैक बॉक्स भी मिल गया है। पर्वतारोहियों व वायुसेना की टीम ने सभी जवानों व पायलट के शवों को घने जंगल से बरामद किया। उन शवों को वहाँ से निकालने के लिए हैलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया। ये विमान 3 जून को गायब हुआ था, ऐसे में इसे खोजने के लिए वायुसेना को ख़ासी मशक्कत करनी पड़ी। रूस निर्मित इस विमान के उड़ान भरने के 33 मिनट बाद गायब हो जाने की ख़बर आने के बाद पूरा देश इसमें सवार वायुसैनिकों की सलामती की दुआएँ कर रहा था।

जब यह विमान रडार से गायब हुआ था, तभी वायुसेना के जवानों को यह एहसास हो गया था कि अरुणाचल प्रदेश की पहाड़ियों में उसे ढूँढना कितना कठिन है। बचाव कार्य या फिर विमान को खोज निकाल कर मलबों व शवों को ढूँढने के लिए सिर्फ़ टेक्नोलॉजी से काम नहीं चलेगा, यह बात वायुसेना से जुड़े अधिकारियों को पता थी। टी यूबी नामक एक स्थानीय व्यक्ति को उधर के गाँवों में ‘लोकल टार्ज़न’ के नाम से जाना जाता है। बता दें कि टार्ज़न एक ऐसा किरदार है, जो जंगल व जानवरों से निकटता के कारण जाना जाता है और जंगलों में बेख़ौफ़ होकर विचरण करना उसकी ख़ासियत है।

AN-32 को खोजने निकले ‘लोकल टार्ज़न’ के बारे में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की ख़बर (साभार: TOI)

टी यूबी भी बयोर पर्वत के चप्पे-चप्पे से परिचित हैं और इन जंगलों में अक्सर शिकार करते रहने के कारण उन्हें इसकी दुर्गमता के पूरा अनुभव है। 40 वर्षीय यूबी को स्थानीय अधिकारियों ने 15 किलो चावल और कई अन्य चीजें देकर इस विमान का पता लगाने को कहा और यूबी इस कार्य के लिए निकल भी गए। यूबी के साथ शिकारियों, ग्रामीणों व पुलिस वालों की टीमें भी भेजी गईं, जो साथ-साथ इस कार्य में उनकी मदद कर सके और ज़रुरत पड़ने पर ज़रूरी कार्य कर सकें।

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वायुसेना को AN 32 का मलबा तो मिल गया लेकिन अफ़सोस, अभी तक यूबी का कुछ पता नहीं चला है। अभी तक उनके लौटने की कोई सूचना नहीं है। यूबी ने खोजी अभियान के दौरान अधिकारियों को कई सूचनाएँ दी थीं और काफ़ी मदद भी की थी लेकिन उनका अभी तक नहीं लौटना इलाक़े में चर्चा का विषय है। तमूत और टेकसेंग नामक पर्वतारोहियों ने परी अदि पहाड़ के पास विमान के मलबे को देखा और वहाँ तक चढ़ाई शुरू की। वायुसेना के एक चॉपर ने पर्वतारोहियों को वहाँ तक पहुंचाया। 

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