Monday, January 25, 2021
Home बड़ी ख़बर गिलगित बल्तिस्तान: LoC के उस पार का भारत, जहाँ आज भी लोग भारतीय सेनाओं...

गिलगित बल्तिस्तान: LoC के उस पार का भारत, जहाँ आज भी लोग भारतीय सेनाओं का इंतज़ार करते हैं

स्कर्दू के आसपास गाँवों के लोग आज भी जब खाना बनाते हैं तो हर घर में 10 रोटी अधिक बनती है ताकि जब भारतीय सेनाएँ उन्हें पाकिस्तान से मुक्त कराने आएँगी तो वे भूखी न जाएँ। वहाँ के लोग आज भी इस इंतज़ार में हैं कि एक दिन भारतीय सेना उन्हें पाकिस्तानी कब्जे से छुड़ाने आएगी।

भूराजनैतिक पक्ष:-

1947 में जब देश ब्रिटिश राज से मुक्त हुआ तब जम्मू कश्मीर का विलय भारत में उस प्रकार नहीं हुआ जिस प्रकार अन्य रियासतें भारत संघ का अंग बनीं। जम्मू कश्मीर राज्य भूराजनैतिक विविधताओं से भरा पड़ा है। सन ’47-’48 में भारत-पाक युद्ध के पश्चात 27 जुलाई 1949 को कराची समझौते में युद्धविराम पर हस्ताक्षर कर तत्कालीन सरकार ने उस भूमि को पुनः हासिल करने का प्रयास नहीं किया जिस पर पाकिस्तान ने जबरन कब्जा कर लिया था। जानने लायक बात यह भी है कि पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर पाकिस्तान का कोई आधिकारिक प्रांत नहीं है। आज जिसे हम PoK अथवा PoJK कहते हैं उसके शासकीय अधिकारों पर पाकिस्तान का संविधान मौन है।

बहरहाल, पाकिस्तान ने जो भूमि हथियाई थी उसे उसने दो भागों में बाँटा: एक का नाम रखा आज़ाद कश्मीर तथा दूसरे को कहा नॉर्दर्न एरिया। कथित आज़ाद कश्मीर दरअसल नियंत्रण रेखा के पश्चिम में मीरपुर मुजफ्फराबाद का क्षेत्र है, जिसकी सीमा जम्मू और कश्मीर घाटी के थोड़ा ऊपर तक लगती है। यह पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर का छोटा भाग है। (मानचित्र में देखें)

आभार : जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र (नई दिल्ली )

यह उस पूरी भूमि का मात्र 15% भाग है जिस पर पाकिस्तान ने कब्जा किया था। पाकिस्तान ने बड़ी चालाकी से इस क्षेत्र को छद्म स्वतंत्रता प्रदान की है। शेष पाकिस्तान से अलग यहाँ का एक वजीरे आजम, सुप्रीम कोर्ट आदि स्थापित किए गए हैं। मीरपुर मुजफ्फराबाद का क्षेत्र रावलपिंडी के समीप है जहाँ पाकिस्तानी फ़ौज का जनरल हेडक्वार्टर स्थित है। इसलिए रणनीतिक रूप से पाकिस्तानी फ़ौज को इस क्षेत्र को आज़ाद कश्मीर घोषित कर यहाँ से भारत विरोधी गतिविधि संचालित करने में सुविधा होती है।

पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र को कायदे से ‘पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर’ कहना चाहिए। इसके दो कारण हैं- पहला यह कि वह भारत के संवैधानिक रूप से स्वीकृत जम्मू कश्मीर राज्य का भाग है। दूसरा यह कि कथित आज़ाद कश्मीर में वास्तविक कश्मीर का एक इंच भाग भी नहीं आता। फिर भी पाकिस्तान इसे आज़ाद कश्मीर कहता है ताकि जो नैरेटिव सेट हो वह कश्मीर के नाम से हो न कि ‘भारत के जम्मू कश्मीर राज्य’ के नाम से।

पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर का दूसरा तथा बड़ा भाग (85%) गिलगित बल्तिस्तान है जिसे 2009 तक नॉर्दर्न एरिया कहा जाता था। इसकी सीमा दक्षिण में मीरपुर मुजफ्फराबाद क्षेत्र, कश्मीर घाटी और कारगिल से लगती है। पूर्व में गिलगित बल्तिस्तान की सीमा पॉइंट NJ9842 तक लेह से लगती है। पॉइंट NJ9842 के ऊपर सियाचेन ग्लेशियर है और उसके ऊपर काराकोरम दर्रा है। सियाचेन के ठीक ऊपर शक्सगाम घाटी है जो गिलगित बल्तिस्तान का ही अंग है। पाकिस्तान ने 1963 में शक्सगाम घाटी अनधिकृत रूप से चीन को दे दी थी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:-

गिलगित तथा बल्तिस्तान ऐतिहासिक रूप से दो भिन्न राजनैतिक इकाइयों के रूप में विकसित हुए थे। गिलगित को दर्दिस्तान भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ दरदी भाषा बोलने वाले लोग रहते हैं। बल्तिस्तान को मध्यकाल में छोटा तिब्बत कहा जाता था। गिलगित और बल्तिस्तान का एक प्रांत के रूप में एकीकरण डोगरा शासनकाल में हुआ। पुरातन काल में गिलगित मौर्य वंश के अधीन रहा। कराकोरम राजमार्ग पर स्थित सम्राट अशोक के 14 शिलालेख इसका प्रमाण हैं। ललितादित्य (724-761 ई०) और उसके पश्चात कार्कोट वंश के समय भी गिलगित बल्तिस्तान काश्मीर साम्राज्य का अभिन्न अंग रहा।

ललितादित्य ने अपने शासनकाल में शेष भारत से काश्मीर के ऐतिहासिक सम्बन्धों को मजबूत किया। कालांतर में गिलगित और बल्तिस्तान मुग़ल शासन के अधीन भी रहा। मुग़ल शासन के दुर्बल होने के पश्चात साठ वर्षों तक काश्मीर में अफगान शासन रहा। उस समय भी गिलगित और बल्तिस्तान काश्मीर साम्राज्य का अंग था। अफगानी शासन के अत्याचारों से पीड़ित होकर एक काश्मीरी पण्डित बीरबल धर के नेतृत्व में काश्मीर की जनता ने सिख महाराजा रणजीत सिंह से गुहार लगाई। तब महाराजा रणजीत सिंह जी ने 15 जून 1819 को काश्मीर पर आक्रमण किया और अफगानी शासन से मुक्ति दिलाई।

महाराजा रणजीत सिंह जी ने जम्मू का क्षेत्र गुलाब सिंह को जागीर के रूप में दिया। कालांतर में कई युद्ध हुए और राजनैतिक घटनाक्रम परिवर्तित हुए। अंग्रेजों द्वारा सिखों को पराजित करने और 9 मार्च 1846 की लाहौर सन्धि के फलस्वरूप समूचे जम्मू कश्मीर राज्य पर गुलाब सिंह का एकछत्र राज स्थापित हुआ। बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में रूस में हुई क्रांति और सत्ता परिवर्तन के कारण बिगड़ते शक्ति सन्तुलन से घबराये अंग्रेजों ने डोगरा महाराजा से गिलगित एजेंसी 60 वर्षों के पट्टे पर छीन ली। जब सोवियत रूस ने 1934 में चीन के शिनजिआंग प्रांत पर कब्जा कर लिया तब ब्रिटेन ने महाराजा से संधि कर जम्मू कश्मीर को 60 साल के लिए पट्टे पर ले लिया था। उसके बाद अंग्रेज़ों ने गिलगित एजेंसी बनाई और गिलगित स्काउट नामक सैन्य टुकड़ी की स्थापना की जिसमें अधिकांश अफसर ब्रिटिश थे। 3 जून 1947 को मॉउंटबैटन प्लान की घोषणा के बाद गिलगित को पुनः महाराजा को सौंप दिया गया और इसके साथ ही गिलगित स्काउट्स भी महाराजा के अधीन हो गयी।

जब महाराजा ने 30 जुलाई 1947 को गवर्नर और चीफ ऑफ़ स्टाफ को गिलगित भेजा तो उन्हें पता चला कि गिलगित स्काउट्स ने पाकिस्तानी फ़ौज में सम्मिलित होने का निर्णय लिया है। 31 अक्टूबर 1947 को गिलगित स्काउट्स ने गवर्नर का आवास घेर लिया और अंतरिम सरकार बनाने की घोषणा कर दी। 4 नवंबर को मेजर ब्राउन ने पाकिस्तान का झंडा फहरा दिया और 21 नवंबर को खुद को एक पॉलिटिकल एजेंट बताने वाले एक पाकिस्तानी ने आकर अड्डा जमा लिया।

तत्कालीन भारतीय शासन व्यवस्था इस पूरे घटनाक्रम पर मौन रही और स्कर्दू को बचाने में भी असफल रही। इस प्रकार अंग्रेज़ों द्वारा गिलगित बल्तिस्तान समेत पूरे जम्मू कश्मीर को महाराजा के हाथों सौंपे जाने के बावजूद गिलगित स्काउट्स की गद्दारी के कारण वह हिस्सा पाकिस्तान में चला गया। सन 1947-48 के बाद के घटनाक्रम और जवाहरलाल नेहरू के कारनामे आज इतिहास का एक हिस्सा हैं। सन् 1947 में जब अंग्रेज भारत से जाने लगे तो उस समय अनेक षड्यंत्र तथा नाटकीय घटनाक्रम हुए। परन्तु यह भी सत्य है कि अंग्रेजों ने 1 अगस्त 1947 को गिलगित एजेंसी के सभी क्षेत्र महाराजा हरि सिंह को सौंप दिए थे।

इस संक्षिप्त ऐतिहासिक वर्णन से यह सिद्ध होता है कि गिलगित बल्तिस्तान पर शासन करने का पाकिस्तान का ऐतिहासिक रूप से भी कोई अधिकार नहीं बनता क्योंकि प्राचीनकाल से लेकर 1947 तक यह क्षेत्र अधिकांश समय भारतीय राजाओं के अधीन रहा। ऐसे में पाकिस्तान प्रायोजित यह प्रोपेगैंडा निराधार है कि गिलगित बल्तिस्तान भारत को अंग्रेजों ने दिया था।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य:-

आज के समय में गिलगित बल्तिस्तान सामरिक रूप से अतिमहत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहाँ प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन हैं तथा सांस्कृतिक संरचना पर इस्लामी प्रभाव होने के बावजूद विविधता है। यहाँ कई इस्लामी सम्प्रदाय के लोग रहते हैं जैसे- नूरबक्शी सम्प्रदाय, ट्वेलवर शिया सम्प्रदाय और सुन्नी मतावलंबी। गिलगित बल्तिस्तान के सिंकरी प्रदेश के निवासी गाय को पवित्र मानते थे किंतु इस्लामियों के भय के मारे अब वे अपनी प्राचीन मान्यताओं को तजने के लिए बाध्य हैं।

पाकिस्तान की सरकार ने कथित आज़ाद कश्मीर में बाहरी लोगों के बसने पर पाबन्दी लगा रखी है किंतु गिलगित बल्तिस्तान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए यहाँ शेष पाकिस्तान से आये इस्लामियों ने जनसंख्या परिवर्तन कर कट्टरपंथ को बढ़ावा देने का काम किया है। गिलगित बल्तिस्तान में पाकिस्तान सरकार के अत्याचारों और मानवाधिकार उल्लंघन पर ब्रिटिश बैरोनेस एम्मा निकोलसन ने यूरोपियन पार्लियामेंट (जब ब्रिटेन EU का सदस्य थ) में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। एक उदाहरण देखिये- गिलगित बल्तिस्तान के निवासियों को पाकिस्तान कोई नागरिक अधिकार नहीं देता।

गिलगित बल्तिस्तान का कोई निवासी वहाँ कोई रोजगार प्राप्त नहीं कर सकता। नौकरी के लिए उसे बाहर शेष पाकिस्तान के किसी नगर में जाना होगा। पाकिस्तान गिलगित बल्तिस्तान में बांध बना रहा है जिसका पानी बिजली या रॉयल्टी कुछ भी इस क्षेत्र को नहीं मिलने वाला। इस क्षेत्र के ऊपर से चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) होकर गुजरता है और शक्सगाम घाटी से निकटता के चलते चीन बड़ी आसानी से यहाँ अपने कर्मचारी भेज कर निर्माण कार्य करवा रहा है।

गिलगित बल्तिस्तान में कई प्राचीन भाषाएँ विलुप्त होने की कगार पर हैं। गिलगित के समीप स्थित चित्राल घाटी के आसपास कलश समुदाय के लोग रहते हैं। इनकी बेटियों को विवश होकर इस्लाम कबूल करना पड़ता है क्योंकि गर्मियों में कामांध भेड़िये अपनी हवस मिटाने इनके पास आते हैं। पाकिस्तानी शासन में ऐसी अनेक विषमताओं से जूझते हुए गिलगित बल्तिस्तान और आसपास के लोग कश्मीर नामक स्वर्ग में नरक भोगने को मजबूर हैं। सन 2005 में आये भूकंप के पश्चात स्थिति और खराब हुई है। कैप्टन सिंकदर रिज़वी अपने भाषणों में बताते हैं कि वहाँ के बच्चों के लिए चीनी जैसी चीज़ एक लक्ज़री की तरह है। स्कर्दू के आसपास गाँवों के लोग आज भी जब खाना बनाते हैं तो हर घर में 10 रोटी अधिक बनती है ताकि जब भारतीय सेनाएँ उन्हें पाकिस्तान से मुक्त कराने आएँगी तो वे भूखी न जाएँ। वहाँ के लोग आज भी इस इंतज़ार में हैं कि एक दिन भारतीय सेना उन्हें पाकिस्तानी कब्जे से छुड़ाने आएगी।

वैसे तो गिलगित-बल्तिस्तान दुनिया सबसे बड़े ग्लेशियर्स में से एक का क्षेत्र है लेकिन इसी वर्ष फरवरी में खबर आई कि गिलगित-बल्तिस्तान में रहने वाले लोगों में पानी के लिए हाहाकार मचना शुरू हो गया है। रिहायशी इलाकों में पीने लायक पानी उपलब्ध नहीं है। इसके पीछे पाकिस्तान का एक खतरनाक प्लान काम कर रहा है। इस प्लान के तहत सिलसिलेवार तरीके से गिलगित बल्तिस्तान में ‘Water-Crisis’ पैदा किया जा रहा है ताकि लोग पानी की कमी के चलते पाकिस्तान के दूसरे शहरी इलाकों दूसरे इलाकों में बसें या फिर गिलगित बल्तिस्तान के ही प्लानंड रिहायशी इलाकों लोगों को बसाया जाये। इसके दो प्रमुख कारण हैं- 1. गिलगित-बल्तिस्तान में डेमोग्राफी चेंज कर, यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करना 2. चीन के बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के लिए उपयुक्त माहौल पैदा करना।

भविष्य की चिंताएँ तथा उपाय:-

भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जी ने 1 अक्टूबर 2015 को पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर की राजनैतिक दुर्व्यवस्था पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित कराया था। IDSA की एक रिपोर्ट बताती है कि 2006 में गिलगित बल्तिस्तान के छात्रों ने भारत के IIT और IIM में दाखिले में आरक्षण की मांग की थी। गिलगित बल्तिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर वाखन दर्रा एवं सड़क मार्ग स्थित है जो शक्सगाम घाटी के समीप ही है। युद्धकाल में यह चीन को अपनी सेनाएं गिलगित में घुसाने का अवसर प्रदान करेगा। सेंगे हसनान सेरिंग अमरीका में Institute for Gilgit Baltistan Studies नामक संस्था चलाते हैं। वे बताते हैं कि चीन गिलगित में मिसाइलें ले जाने हेतु सुरंगे बना रहा है। अजमल आमिर कसाब और डेविड कोलमैन हेडली इन दोनों ने स्वीकार किया था इन्हें PoJK में आतंकी प्रशिक्षण मिला था।

उपरोक्त तथ्य एवं चिंताओं पर समूचे भारत में विमर्श तथा जागरूकता आवश्यक है। हमारी सीमाओं पर यह समस्याएँ एक दिन अथवा एक दशक में समाप्त नहीं होने वालीं। इसके लिए व्यापक जनसमर्थन आवश्यक है। महत्वपूर्ण यह भी है कि जब लिबरल बुद्धिजीवी रोहिंग्यों के लिए आँसू बहा रहे होते हैं तब उन्हें गिलगित बल्तिस्तान में रह रहे लोगों की सिसकियाँ सुनाई नहीं देतीं। कुछ साल पहले तक दूरदर्शन समाचार गिलगित बल्तिस्तान क्षेत्र के मौसम की जानकारी भी देता था लेकिन अब वह जानकारी भी नहीं मिलती। जबकि यह स्थापित सत्य है कि नियंत्रण रेखा के उस पार के लोग बड़ी उम्मीदों से भारत की ओर देख रहे हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

 

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

RSS को ‘निकरवाला’ बोला राहुल गाँधी ने, ‘लिकरवाला’ सुन जनता हुई ‘मस्त’: इस लेटेस्ट Video में है बहुत मजा

राहुल गाँधी जब बोलते हैं, बहुत मजा देते हैं। उनके मजे देने वाले वीडियो आप खोजेंगे 1 मिलेंगे 11... अब एक और वीडियो जुड़ गया है, एकदम लेटेस्ट।

‘लता मंगेशकर ने 1947 में नेहरू के लिए गाया था ऐ मेरे वतन के लोगों’: विशाल डडलानी ने बताया इतिहास – Fact Check

विशाल डडलानी ने दावा किया है कि लता मंगेशकर ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लिए 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाना गाया था।

ThePrint को रूसी विदेश मंत्रालय से पड़ी लताड़, भारत-रूस का नाम ले फैला रहा था फेक न्यूज

रूसी विदेश मंत्रालय ने शेखर गुप्ता की 'द प्रिंट' को जम कर लताड़ लगाई। उसने भारत-रूस के बीच होने वाली वार्षिक बैठक को लेकर फेक न्यूज़ फैलाई थी।

रामतीर्थम पहुँची भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की नई प्रतिमा, धड़ से अलग कर दिया गया था 400 साल पुरानी मूर्ति का सिर

आंध्र प्रदेश में दिसंबर में उपद्रवियों ने भगवान की मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया था। नई मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा 28 जनवरी को होगी।

नेपाल में चीन पैंतरे नाकाम, कम्युनिस्ट पार्टी ने कार्यकारी PM ओली को पार्टी से निकाला

नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी ने कार्यकारी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पार्टी से निकाल कर उनकी सदस्यता रद्द कर दी है।

राहुल गाँधी बोले- किसान मजबूत होते तो सेना की जरूरत नहीं होती… अनुवादक मोहम्मद इमरान बेहोश हो गए

इरोड में राहुल गाँधी के अंग्रेजी भाषण का तमिल में अनुवाद करने वाले प्रोफेसर मोहम्मद इमरान मंच पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।

प्रचलित ख़बरें

12 साल की लड़की का स्तन दबाया, महिला जज ने कहा – ‘नहीं है यौन शोषण’: बॉम्बे HC का मामला

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने शारीरिक संपर्क या ‘यौन शोषण के इरादे से किया गया शरीर से शरीर का स्पर्श’ (स्किन टू स्किन) के आधार पर...

मदरसा सील करने पहुँची महिला तहसीलदार, काजी ने कहा- शहर का माहौल बिगड़ने में देर नहीं लगेगी, देखें वीडियो

महिला तहसीलदार बार-बार वहाँ मौजूद मुस्लिम लोगों को मामले में कलेक्टर से बात करने के लिए कह रही है। इसके बावजूद लोग उसकी बात को दरकिनार करते हुए उसे धमकाते हुए नजर आ रहे हैं।

राहुल गाँधी बोले- किसान मजबूत होते तो सेना की जरूरत नहीं होती… अनुवादक मोहम्मद इमरान बेहोश हो गए

इरोड में राहुल गाँधी के अंग्रेजी भाषण का तमिल में अनुवाद करने वाले प्रोफेसर मोहम्मद इमरान मंच पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।

निकिता तोमर को गोली मारते कैमरे में कैद हुआ था तौसीफ, HC से कहा- मैं निर्दोष, यह ऑनर किलिंग

निकिता तोमर हत्याकांड के मुख्य आरोपित तौसीफ ने हाई कोर्ट से घटना की दोबारा जाँच की माँग की है। उसने कहा कि यह मामला ऑनर किलिंग का है।

‘जिस लिफ्ट में ऑस्ट्रेलियन, उसमें हमें घुसने भी नहीं देते थे’ – IND Vs AUS सीरीज की सबसे ‘गंदी’ कहानी, वीडियो वायरल

भारतीय क्रिकेटरों को सिडनी में लिफ्ट में प्रवेश करने की अनुमति सिर्फ तब थी, अगर उसके अंदर पहले से कोई ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी न हो। एक भी...

बहन को फुफेरे भाई कासिम से था इश्क, निक़ाह के एक दिन पहले बड़े भाई फिरोज ने की हत्या: अश्लील फोटो बनी वजह

इस्लामुद्दीन की 19 वर्षीय बेटी फिरदौस के निक़ाह की तैयारियों में पूरा परिवार जुटा हुआ था। तभी शनिवार की सुबह घर में टूथपेस्ट कर रही फिरदौस को अचानक उसके बड़े भाई फिरोज ने तमंचे से गोली मार दी।
- विज्ञापन -

 

RSS को ‘निकरवाला’ बोला राहुल गाँधी ने, ‘लिकरवाला’ सुन जनता हुई ‘मस्त’: इस लेटेस्ट Video में है बहुत मजा

राहुल गाँधी जब बोलते हैं, बहुत मजा देते हैं। उनके मजे देने वाले वीडियो आप खोजेंगे 1 मिलेंगे 11... अब एक और वीडियो जुड़ गया है, एकदम लेटेस्ट।

‘लता मंगेशकर ने 1947 में नेहरू के लिए गाया था ऐ मेरे वतन के लोगों’: विशाल डडलानी ने बताया इतिहास – Fact Check

विशाल डडलानी ने दावा किया है कि लता मंगेशकर ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लिए 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाना गाया था।

ThePrint को रूसी विदेश मंत्रालय से पड़ी लताड़, भारत-रूस का नाम ले फैला रहा था फेक न्यूज

रूसी विदेश मंत्रालय ने शेखर गुप्ता की 'द प्रिंट' को जम कर लताड़ लगाई। उसने भारत-रूस के बीच होने वाली वार्षिक बैठक को लेकर फेक न्यूज़ फैलाई थी।

कॉन्ग्रेसी सांसद ने कहा- खालिस्तानी कर रहे किसान आंदोलन को हाइजैक, पार्टी के सुर कुछ और ही

कॉन्ग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा है कि कृषि कानून के खिलाफ हो रहे किसान आंदोलन को खालिस्तानी तत्व हाइजैक करने का प्रयास कर रहे है।

रामतीर्थम पहुँची भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की नई प्रतिमा, धड़ से अलग कर दिया गया था 400 साल पुरानी मूर्ति का सिर

आंध्र प्रदेश में दिसंबर में उपद्रवियों ने भगवान की मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया था। नई मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा 28 जनवरी को होगी।

मुस्लिम बहुल मालवणी में मुंबई पुलिस ने फाड़ दिए थे भगवान राम के पोस्टर, कार्रवाई को लेकर बीजेपी का प्रदर्शन

मुंबई के मुस्लिम बहुल इलाके मालवणी में भगवान राम के पोस्टर फाड़ने को लेकर बीजेपी ने प्रदर्शन किया। दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मॉंग की।

नेपाल में चीन पैंतरे नाकाम, कम्युनिस्ट पार्टी ने कार्यकारी PM ओली को पार्टी से निकाला

नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी ने कार्यकारी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पार्टी से निकाल कर उनकी सदस्यता रद्द कर दी है।

बिशप का गोपनीय पत्रः चर्च समर्थक कैंडिडेट को टिकट दें, ईसाई कम्युनिस्ट पार्टी का समर्थन करेंगे

केरल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी से विधानसभा चुनावों में एक चर्च समर्थित उम्मीदवार को टिकट देने की सिफारिश कर एक कैथोलिक बिशप विवादों में घिर गए हैं।

राहुल गाँधी बोले- किसान मजबूत होते तो सेना की जरूरत नहीं होती… अनुवादक मोहम्मद इमरान बेहोश हो गए

इरोड में राहुल गाँधी के अंग्रेजी भाषण का तमिल में अनुवाद करने वाले प्रोफेसर मोहम्मद इमरान मंच पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।

26 जनवरी पर ट्रैक्टर रैली को दिल्ली पुलिस की हरी झंडी, SFJ ने कहा-भिंडरावाले के पोस्टर लहराना

नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों को 26 जनवरी पर ट्रैक्टर रैली निकालने की अनुमति मिल गई है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
385,000SubscribersSubscribe