1 Nation-1 Poll: कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता ने दिया मोदी का साथ, अपनी पार्टी को याद दिलाया 1967 का इतिहास

"1967 में ऐसा हो चुका है। यह बहुत अच्छा प्रस्ताव है, चर्चा योग्य प्रस्ताव है। इसके लिए समर्थन जुटाने का प्रयास सरकार को जारी रखना चाहिए।"

मुंबई रीजनल कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा ने पार्टी लाइन से अलग रुख अख्तियार करते हुए ‘वन नेशन-वन पोल’ का समर्थन किया है। देवड़ा ने इतिहास की बात करते हुए गिनाया कि 1967 में ऐसा हो चुका है। उन्होंने केंद्र सरकार के प्रस्ताव को चर्चा योग्य बताते हुए कहा कि इसके लिए समर्थन जुटाने का प्रयास सरकार को जारी रखना चाहिए। देवड़ा ने यह बयान उसी समय दिया, जब दिल्ली में इसे लेकर सर्वदलीय बैठक हो रही थी। मिलिंद देवड़ा ने अपनी राय बताते हुए कहा कि लगातार चुनावी मोड में रहना गुड गवर्नेन्स और वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने में बाधक होता है। उन्होंने आगे कहा कि देश के नागरिक जिन गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं, चुनावी मौसम में दिए जाने वाले लोकलुभावन वादे निश्चित रूप से उसका दीर्घकालिक समाधान नहीं कर पाते हैं।

हालाँकि, देवड़ा ने चुनाव के कारण कोष पर पड़ने वाले दबाव के तर्क़ को अनावश्यक करार दिया और कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए हमें कोई भी क़ीमत चुकाने को तैयार रहना चाहिए। उन्होंने सरकार को इस मामले में शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों, छात्र संगठनों व जनता से राय लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि देश का राजनीतिक वर्ग चर्चा की परम्परा को भूल रहा है, जो कि लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। उन्होंने ख़ुद को भी इस समस्या का हिस्सा बताया। ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ से सत्ताधारी पार्टी को लाभ होने की बात को उन्होंने सिरे से खारिज़ कर दिया। ताज़ा लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ओडिशा, आंध्र प्रदेश और अरुणाचल में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव हुए। इन राज्यों के परिणाम को देखते हुए सत्ताधारी पार्टी को एकतरफा लाभ वाली बात तार्किक नहीं है।

देवड़ा ने याद दिलाया कि आंध्र और ओडिशा में जीतने वाली पार्टी भाजपा नहीं है और न ही भाजपा के साथ गठबंधन में है। उधर जगन मोहन रेड्डी की पार्टी ने ‘वन नेशन-वन पोल’ के समर्थन की बात कही है। आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में एकछत्र राज कायम करने वाली वाईएसआर कॉन्ग्रेस के एक राज्यसभा सांसद ने कहा कि बार-बार चुनाव होते रहने से पैसों की बर्बादी होती है। हालाँकि, आंध्र की विपक्षी पार्टी टीडीपी ने इसका विरोध किया है। नायडू ने केंद्र सरकार को लिखे पत्र में कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने कुछ सोच कर ही लोकसभा व विधानसभा चुनावों को पृथक रखा होगा।

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सर्वदलीय बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने जानकारी दी कि पीएम मोदी ने इस सम्बन्ध में एक कमिटी गठित करने का निर्णय लिया है, जो इससे जुड़ी सलाह देगी। सिंह ने कहा कि सर्वदलीय बैठक के लिए उन्होंने 40 राजनीतिक दलों को निमंत्रण भेजा था, जिसमें से 21 दलों के अध्यक्षों ने इसमें भाग लिया जबकि 3 दलों ने पत्र के माध्यम से अपनी राय ज़ाहिर की। यह कमिटी एक समयावधि के भीतर रिपोर्ट देगी। सिंह ने कहा कि वामपंथी दलों ने ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ को लेकर आपत्ति जताई लेकिन इसका उन्होंने किसी तरह से विरोध नहीं किया। वामपंथी दलों को इसके कार्यान्वयन से दिक्कत है।

इसके अलावा बैठक में संसद में चर्चाओं की गुणवत्ता बढ़ाने और कार्यकलाप को लेकर भी चर्चा हुई। ममता बनर्जी की तृणमूल और मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने इस बैठक में भाग नहीं लिया, जबकि केसीआर की टीआरएस और केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने अपने प्रतिनिधि भेजे।

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