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कश्मीर में मीडिया प्रोपेगेंडा: BBC-अल जज़ीरा से सरकार ने माँगे असली वीडियो, अभी तक नहीं आया जवाब

BBC को अक्सर इसके देशविरोधी पूर्वग्रहों के लिए जाना जाता है। फरवरी में हुए पुलवामा हमले के बाद भारत द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में भी बीबीसी ने अपने प्रोपेगैंडा को खूब हवा दी थी।

गत शुक्रवार (अगस्त 02, 2019) को BBC और अल जज़ीरा ने अपनी रिपोर्ट्स में दावा किया कि कश्मीर में धरना-प्रदर्शन चल रहे हैं। हालाँकि उसी दिन गृह मंत्रालय द्वारा स्पष्ट किया गया था कि कश्मीर में इस प्रकार का कोई भी विरोध नहीं हो रहा है। गृह मंत्रालय ने कश्मीर में दस हजार लोगों के प्रदर्शन की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए वहाँ पर ऐसे किसी प्रदर्शन को निराधार और असत्य बताया था। साथ ही स्पष्ट किया था कि प्रदर्शनकारियों पर आँसू गैस के गोले या पैलेट गन का इस्तेमाल किए जाने वाली खबरें भी बेबुनियाद हैं।

इसके बाद BBC ने अल जज़ीरा की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए कहा कि सरकार झूठ कह रही है और कश्मीर में विरोध प्रदर्शन जारी है। BBC की इस रिपोर्ट को कई समाचार संस्थाओं ने शेयर किया है। हालाँकि सरकार ने इस वीडियो फुटेज की विश्वसनीयता पर संदेह व्यक्त करते हुए इसे ‘एडिटेड’ बताया है।

कश्मीर को लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, गृह मंत्रालय और इंटेलिजेंस ब्यूरो लगातार नजर रख रहे हैं। इस दौरान उन्होंने अपनी रिपोर्ट में चार वीडियो और सात रिपोर्ट्स को ‘भ्रामक और फेक’ के रूप में चिह्नित किया है। इनमें घाटी में भारत विरोध प्रदर्शन, तनाव और उग्रवाद में वृद्धि जैसे कारक शामिल हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें विदेशी मीडिया संस्थानों से प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन अभी तक वे वीडियो नहीं दे पाए हैं। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने पुष्टि करते हुए कहा कि सभी लोग बीबीसी उर्दू के वीडियो का जिक्र कर रहे हैं और अब तक रॉ-फुटेज उपलब्ध नहीं करवाए हैं।

सरकार का कहना है कि मीडिया संस्थानों की ओर से रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कश्मीर घाटी में 10,000 से अधिक लोगों ने शुक्रवार सुबह भारत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लिया और एक अन्य में कहा गया कि सेना ने पश्चिमी श्रीनगर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का मुकाबला करने के लिए हिंसा का सहारा लिया है।

सरकारी अधिकरियों द्वारा की गई पूछताछ में पता चला है कि वीडियो को पहले अल जज़ीरा और फिर बीबीसी ने जारी किया। इसके अलावा बीबीसी ने इसे अपने सभी क्षेत्रीय चैनलों में प्रसारित किया। 

वीडियो में दिख रहे प्रदर्शनकारियों के बैनर हैं संदेहास्पद

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार, सरकार का कहना है कि जो वीडियो सबसे ज्यादा चिंताजनक है वह यह है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने एक बैनर तले मार्च करते हुए कहा कि वो आजादी चाहते हैं और अनुच्छेद 370 पर फैसले को अस्वीकार करते नजर आ रहे हैं। यह उस समय हुआ है जब कथित तौर पर शुक्रवार की सुबह कुछ घंटों के लिए कर्फ्यू में ढील दी गई।

गृह मंत्रालय ने बीबीसी की इस वीडियो को एडिटेड (Edited) बताते हुए इस पर जाँच करने की बात कही है। सरकार ने इन खबरों का खंडन करते हुए कहा कि केवल श्रीनगर और बारामुला में विरोध प्रदर्शन हुआ, जहाँ 20 से अधिक लोग मौजूद नहीं थे। जम्मू और कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम ने बाद में स्पष्ट किया कि पुलिस ने पिछले छह दिनों में एक भी गोली नहीं चलाई गई है और स्थिति शांत है।

गृह मंत्रालय का कहना है कि इन समाचार एजेंसियों द्वारा अभी तक भी कोई जवाब या स्पष्टीकरण नहीं मिला है। BBC को अक्सर इसके देशविरोधी पूर्वग्रहों के लिए जाना जाता है। फरवरी में हुए पुलवामा हमले के बाद भारत द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में भी बीबीसी ने अपने प्रोपेगैंडा को खूब हवा दी थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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