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गाँव में रात 10 बजे घूम रहा था आसिफ, टोकने पर सुबह साथियों के साथ किया हिंदुओं पर हमला: धनराज मौर्या की मौत, वारिस-साजिद-सलीम समेत 6 गिरफ्तार, बलरामपुर का मामला

आसिफ अपने पिता वारिस अली, भाइयों साजिद, सलीम, माजिद, आकिब और वाजिद के साथ लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से लैस होकर राजू मौर्य के घर में घुस गया।

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। गैंड़ास बुजुर्ग थाना क्षेत्र के पिपराराम गाँव में महज एक सामान्य पूछताछ और टोकने की बात पर शुरू हुआ विवाद अगले दिन तड़के एक सोची-समझी हिंसक वारदात में बदल गया। रात में 10 बजे के बाद गाँव में संदिग्ध परिस्थितियों में घूम रहे आसिफ को जब स्थानीय निवासी ने सुरक्षा के लिहाज से रोका, तो उसने इसे अपना अपमान मान लिया। अगले दिन सुबह वह अपने पूरे कुनबे और धारदार हथियारों के साथ आया और एक हिंदू परिवार पर जानलेवा हमला बोल दिया।

इस बर्बर और अमानवीय हमले में गंभीर रूप से घायल हुए धनराज मौर्य ने आखिरकार लखनऊ के अस्पताल में दम तोड़ दिया।

क्या था पूरा मामला, जिसमें आसिफ ने बनाया हिंदू परिवार को खत्म करने का प्लान

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना की शुरुआत 26 मई 2026 की रात करीब 10 बजे हुई थी। ग्रामीण परिवेश में रात के समय सुरक्षा को लेकर अमूमन लोग सतर्क रहते हैं। इसी सतर्कता के तहत, पिपराराम गाँव के निवासी राजू मौर्य ने गाँव की गलियों में देर रात संदिग्ध परिस्थितियों में घूम रहे मोहम्मद आसिफ खान को देखा। इतनी रात गए किसी बाहरी या संदिग्ध गतिविधि को देखकर राजू मौर्य ने आसिफ को रोक लिया और वहाँ घूमने की वजह पूछी।

एक जिम्मेदार नागरिक और ग्रामीण होने के नाते राजू मौर्य की यह पूछताछ बेहद सामान्य और सुरक्षा के दृष्टिकोण से आवश्यक थी। लेकिन अहंकार और आपराधिक प्रवृत्ति से ग्रस्त मोहम्मद आसिफ खान को यह बात नागवार गुजरी। उसने इस सामान्य टोकने को अपनी झूठी शान के खिलाफ माना। मौके पर ही आसिफ ने राजू मौर्य के साथ तीखी बहस शुरू कर दी और गाली-गलौज पर उतर आया। ग्रामीणों के हस्तक्षेप के बाद उस वक्त तो मामला शांत हो गया, लेकिन आसिफ वहां से जाते-जाते राजू मौर्य को ‘सुबह देख लेने’ और अंजाम भुगतने की खुली धमकी देकर गया।

सोची-समझी साजिश के तहत सुबह के समय मुस्लिमों के गुट ने किया हमला

आसिफ रात की बात को भूला नहीं था, बल्कि वह रातभर अपने साथियों के साथ मिलकर एक खूनी साजिश को अंजाम देने की योजना बना रहा था। अगले दिन यानी 27 मई की सुबह-सुबह, जब पूरा गांव अभी ठीक से जागा भी नहीं था, मोहम्मद आसिफ खान ने अपने पिता वारिस अली और अपने अन्य भाइयों व साथियों साजिद खान, सलीम उर्फ सालिम अली, माजिद अली, आकिब और वाजिद को इकट्ठा किया।

यह कोई अचानक हुआ झगड़ा नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी और योजनाबद्ध हत्या की कोशिश थी। आरोपित अपने घरों से लाठी, डंडे, लोहे की रॉड और धारदार हथियारों से लैस होकर आए थे। उनका एकमात्र मकसद राजू मौर्य और उनके परिवार को सबक सिखाना और अपनी दबंगई कायम करना था।

आरोपितों ने बिना किसी हिचकिचाहट के राजू मौर्य के घर पर धावा बोल दिया। घर के बाहर पहुँचते ही उन्होंने गाली-गलौज शुरू कर दी और जैसे ही राजू मौर्य बाहर आया, इन सभी दरिंदों ने उस पर बेरहमी से हमला कर दिया।

बीच-बचाव करने आए पूरे परिवार को बनाया निशाना

राजू मौर्य की चीख-पुकार सुनकर उनके परिवार के लोग उन्हें बचाने के लिए दौड़े। हमलावरों की क्रूरता का आलम यह था कि उन्होंने बीच-बचाव करने आए बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं में से किसी को नहीं बख्शा। हमलावर इस कदर अंधाधुंध वार कर रहे थे कि जो भी सामने आया, उसे लहूलुहान करते गए। इस अमानवीय हमले में धनराज मौर्य (जिन्होंने अपने भाई को बचाने का प्रयास किया) के सिर पर लोहे की रॉड और लाठियों से कई घातक वार किए गए।

इसके साथ ही मीना देवी (महिला होने के बावजूद अपराधियों ने उन पर जरा भी रहम नहीं खाया और उन्हें गंभीर रूप से पीटकर मरणासन्न कर दिया), हीरालाल मौर्य, सोहनलाल मौर्य और आकाश मौर्य को भी बुरी तरह पीटा गया, जिससे वे सभी गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े।

FIR की कॉपी

पूरे घर में खून बिखर गया और चीख-पुकार मच गई। जब ग्रामीणों की भीड़ जुटने लगी, तो आरोपित जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। अपराधियों का यह कृत्य उनकी अत्यंत हिंसक और समाज-विरोधी मानसिकता को उजागर करता है।

अस्पताल में जिंदगी की जंग और धनराज मौर्य का दुःखद अंत

घटना के तुरंत बाद सभी घायलों को आनन-फानन में स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद अन्य घायलों की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ, लेकिन धनराज मौर्य की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई थी। उनके सिर में गंभीर चोटें आई थीं और अंदरूनी रक्तस्राव हो रहा था। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल लखनऊ के उच्च चिकित्सा संस्थान (ट्रॉमा सेंटर) के लिए रेफर कर दिया।

शनिवार (30 मई 2026) को लखनऊ में कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद आखिरकार धनराज मौर्य ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। जैसे ही धनराज की मौत की खबर पिपराराम गाँव पहुँची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। वहीं दूसरी ओर घायल महिला मीना देवी की स्थिति भी अभी पूरी तरह खतरे से बाहर नहीं है और उनका इलाज अस्पताल में जारी है। धनराज की मौत के बाद पुलिस को मजबूरन दर्ज प्राथमिकी में हत्या की संगीन धाराएँ बढ़ानी पड़ीं।

शव पहुँचते ही भड़का जन-आक्रोश, बस्ती-बलरामपुर मार्ग पर किया चक्काजाम

रविवार (31 मई 2026) सुबह जब धनराज मौर्य का शव पोस्टमार्टम के बाद एम्बुलेंस से पिपराराम गाँव पहुँचा, तो परिजनों के सब्र का बाँध टूट गया। मृतक के रोते-बिलखते बूढ़े माता-पिता, पत्नी और मासूम बच्चों को देखकर पूरे गाँव का कलेजा मुंह को आ गया। अपराधियों की इस घिनौनी हरकत के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और पीड़ित परिवार के सदस्य शव को लेकर बलरामपुर-बस्ती मार्ग पर उतर आए। उन्होंने मुख्य सड़क के बीचों-बीच शव को रखकर चक्काजाम कर दिया।

ग्रामीणों का साफ कहना था कि क्षेत्र में इन दबंगों का हौसला इतना बढ़ गया है कि अब लोग अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं।

इस चक्काजाम के कारण उत्तर प्रदेश के इस व्यस्ततम मार्ग पर दोनों तरफ वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। भीषण गर्मी में यात्री परेशान होते रहे, लेकिन ग्रामीणों का रुख स्पष्ट था कि जब तक न्याय का ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।

अपराधियों को जानिए, जिन्होंने दिनदहाड़े बहाया खून

पुलिस रिकॉर्ड और दर्ज एफआईआर के अनुसार, इस खूनी खेल में एक ही परिवार के कई लोग और उनके साथी शामिल थे। अब्बू वारिस अली ने अपने बेटों को सही रास्ता दिखाने के बजाय खुद इस जघन्य अपराध में उनका साथ दिया, जो यह साबित करता है कि पूरा परिवार ही आपराधिक मानसिकता से ग्रस्त है।

इस मामले में मुख्य आरोपित मोहम्मद आसिफ खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके साथ ही आसिफ के अब्बू वारिस अली, उसके साथी साजिद खान, सलीम उर्फ सालिम अली, माजिद अली और आकिब को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं वाजिद नाम का अपराधी अब तक फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

FIR में दर्ज हत्यारोपितों के नाम

प्रशासनिक मुस्तैदी और राजनीतिक हस्तक्षेप से खुला जाम

मामले की संवेदनशीलता और दो अलग-अलग समुदायों से जुड़े होने के कारण जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया था। किसी भी अप्रिय स्थिति या सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए क्षेत्राधिकारी (सीओ) उतरौला राघवेंद्र प्रताप सिंह, उपजिलाधिकारी (एसडीएम) उतरौला मनोज कुमार सरोज, गैंड़ास बुजुर्ग के प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार मिश्र और उतरौला के प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज सिंह भारी पुलिस बल और पीएसी (PAC) के साथ मौके पर पहुँचे।

अधिकारियों ने कई दौर की वार्ता की, ग्रामीणों को कानून का हवाला दिया और आश्वासन दिया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन ग्रामीण इस बात पर अड़े थे कि पूर्व में भी ऐसी घटनाओं में ढीली कार्रवाई होती रही है, इसलिए उन्हें उच्च स्तरीय ठोस आश्वासन चाहिए।

जब प्रशासनिक स्तर पर गतिरोध नहीं टूटा, तो क्षेत्रीय भाजपा विधायक राम प्रताप वर्मा अपने सहयोगियों (विधानसभा संयोजक सुधीर श्रीवास्तव, चेयरमैन प्रतिनिधि अनूप चंद गुप्त, विकास गुप्त, महेंद्र प्रताप सिंह, आयुष जायसवाल और राम गोपाल चौधरी) के साथ प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे।

विधायक राम प्रताप वर्मा ने सीधे पीड़ित परिवार के बीच बैठकर उनका दर्द साझा किया। उन्होंने तात्कालिक राहत के रूप में 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की तत्काल घोषणा की। साथ ही उन्होंने वादा किया कि शासन स्तर (मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष) से अतिरिक्त वित्तीय मदद और परिवार के एक सदस्य के पुनर्वास के लिए वे स्वयं पैरवी करेंगे। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपराधियों पर ऐसी कार्रवाई की जाए जो एक मिसाल बने।

विधायक के इस ठोस आश्वासन और कठोरतम कानूनी कार्रवाई के वादे के बाद, ग्रामीण और परिजन शांत हुए। करीब दो से तीन घंटे के बाद मार्ग से जाम हटाया गया और परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने को राजी हुए। कड़ी सुरक्षा के बीच धनराज मौर्य का अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।

समाज में ऐसे अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं

इस पूरे मामले में सीओ राघवेंद्र प्रताप सिंह ने मीडिया से बताया कि कुल 7 नामजद आरोपितों में से 6 को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और फरार वाजिद की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तीन विशेष टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया को फास्ट-ट्रैक पर रखा जाएगा और आरोपितों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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