कभी मुंबई अंडरवर्ल्ड का सबसे खतरनाक शार्पशूटर और दाऊद इब्राहिम के सबसे करीबियों में एक मुन्ना झिंगाडा एक बार फिर एक्टिव है। ISI और दाऊद इब्राहिम की आतंकी साजिश में मुन्ना झिंगाडा का नाम आने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट हो गई हैं। हाल ही में 9 आतंकवादियों की गिरफ्तारी के बाद से वह एक बार फिर चर्चा में है। वह पाकिस्तान में बैठकर भारत में आईएसआई के आतंकी हमलों के नेटवर्क को हैंडल कर रहा था।
झिंगाड़ा के मॉड्यूल का पता चलते ही ये बात भी सामने आ गई है कि दाऊद इब्राहिम के आपराधिक गिरोह और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के बीच पुराना गठजोड़ एक बार फिर भारत के खिलाफ साजिश रच रहा है। लंबे समय से चले आ रहे इस गठजोड़ ने ही मुंबई समेत देश के कई हिस्सों को दहलाया था। अधिकारियों ने कहा कि यह दाऊद इब्राहिम द्वारा सिकुड़ते डी-कंपनी नेटवर्क में अपनी प्रासंगिकता को पुनः स्थापित करने के प्रयासों का संकेत देता है।
मुंबई के जोगेश्वरी की गलियों से शुरू हुआ मुन्ना का सफर अब पाकिस्तान से भारत पर हमला करने के मंसूबे तक पहुँच गया है।
कौन है मुन्ना झिंगाड़ा?
मुन्ना झिंगाडा उर्फ सैयद मुदस्सर हुसैन उर्फ सैयद मुजक्किर हुसैन अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसकी डी-कंपनी का एक कुख्यात शार्प शूटर है। वह मुंबई के जोगेश्वरी का रहने वाला है। 90 के दशक में वह दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील के गैंग में एक खतरनाक शूटर के तौर पर जाना जाता था। दाऊद को उसके अचूक निशाने पर इतना भरोसा था कि गैंग के सबसे मुश्किल काम भी मुन्ना को सौंपे जाते थे। उसपर मर्डर, एक्सटॉर्शन और गैंग वॉर से जुड़े 70 से ज्यादा केस दर्ज हैं।
झिंगाड़ा का आपराधिक इतिहास दाऊद इब्राहिम और उसके पूर्व सहयोगी छोटा राजन के बीच हुए गैंगवार से भी जुड़ा हुआ है।
थाईलैंड में छोटा राजन पर हमला किया
2000 में बैंकॉक में छोटा राजन की हत्या करने की कोशिश की गई थी। उस वक्त झिंगाड़ा काफी सुर्खियों में आया था। दाऊद के खासमखास छोटा शकील के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए झिंगाड़ा अपने गिरोह के कुछ शूटरों के साथ थाईलैंड गया और राजन पर जानलेवा हमला किया। राजन बुरी तरह घायल हुआ, लेकिन उसकी जान बच गई, लेकिन उसका करीबी रोहित वर्मा इस हमले में मारा गया।
इस हमले के कारण छोटा राजन को लगभग दो साल तक छिपकर रहना पड़ा। इस दौरान अंडरवर्ल्ड के गुटों के बीच काफी खूनखराबा हुआ।
थाईलेंड में झिंगाड़ा को वहाँ की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और रोहित वर्मा की हत्या के आरोप में उसे 10 साल जेल की सजा सुनाई। जब थाई पुलिस ने मुन्ना झिंगाड़ा को गिरफ्तार किया, तो उसके पास से ‘मोहम्मद सलीम’ के नाम का एक पाकिस्तानी पासपोर्ट भी मिला था।
इसके बाद उसकी राष्ट्रीयता और निर्वासन को लेकर लगभग दो दशकों तक भारत और पाकिस्तान के बीच थाईलेंड की कोर्ट में लड़ाई चली। झिंगाड़ा ने मोहम्मद सलीम नाम से पाकिस्तानी पासपोर्ट पर थाईलैंड में प्रवेश किया था, इसलिए पाकिस्तान का दावा था कि वह पाकिस्तानी नागरिक है, जबकि भारत का कहना था कि वह मुंबई के जोगेश्वरी में पैदा हुआ भारतीय नागरिक है।
हालाँकि थाई कोर्ट ने शुरू में भारत के प्रत्यर्पण करने की माँग के पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन बाद में कानूनी कार्यवाही के बाद 2019 में थाईलैंड ने झिंगाडा को पाकिस्तान को सौंप दिया। इससे झिंगाड़ा को भारत लाने के प्रयासों को बड़ा झटका लगा।
कराची से नए हमले की प्लानिंग बना रहा झिंगाड़ा
2019 में बैंकॉक जेल से रिहा होने के बाद आईएसआई मुन्ना को सीधे कराची ले गई। वहाँ पहुँच कर वह फिर से दाऊद के नेटवर्क में शामिल हो गया। दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 9 आतंकवादियों की जांच में यह बात सामने आई है कि मुन्ना झिंगाडा अब पाकिस्तान में बैठकर भारत विरोधी गतिविधियों को कोऑर्डिनेट कर रहा है। मुन्ना और उसके साथियों को दिल्ली, मुंबई और दूसरे बड़े शहरों में हमला करने का काम सौंपा है।
मुंबई धमाकों के बाद दाऊद गैंग जिस तरह से आतंकी कार्रवाईयों को अंजाम देता रहा है, उसमें मुन्ना झिंगाडा का रोल अहम है। सिर्फ गैंगस्टर के तौर पर जाना जाने वाला मुन्ना अब ISI के कहने पर सीधे आतंकवादी मॉड्यूल संभाल रहा है। मुन्ना झिंगाडा नाम एक बार फिर भारत की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है, सुरक्षा एजेंसियां अब उसके नेटवर्क की जाँच कर रही हैं।
9 आतंकियों की हुई थी गिरफ्तारी
जिन 9 आतंकियों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उससे पूछताछ और प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि ये लोग देश की राजधानी समेत अन्य प्रमुख शहरों में संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहे थे। स्पेशल सेल के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों के संपर्क विदेशी हैंडलरों से थे, जो उन्हें एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के माध्यम से निर्देश दे रहे थे।
जाँच एजेंसियों का कहना है कि गिरफ्तार आतंकियों को महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रेकी करने, स्थानीय स्तर पर नेटवर्क तैयार करने और संभावित हमलों की योजना बनाने का जिम्मा सौंपा गया था।
पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से हथियारों, ग्रेनेड और विस्फोटक सामग्री का बड़ा जखीरा बरामद किया है। बरामद सामग्री की जाँच की जा रही है, ताकि उसके स्रोत और संभावित उपयोग का पता लगाया जा सके। जाँच में यह भी सामने आया है कि आरोपित देश के रणनीतिक महत्व वाले स्थानों, जैसे ऊर्जा प्रतिष्ठान, हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन को निशाना बना सकते थे।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि हाल के वर्षों में विदेशों में बैठे आतंकी संचालक भारत में भर्ती, कट्टरपंथी फैलाने और स्लीपर सेल सक्रिय करने के लिए डिजिटल माध्यमों का अधिक उपयोग कर रहे हैं।


