Saturday, May 25, 2024
Homeविविध विषयधर्म और संस्कृतिगोस्वामी तुलसीदास के गाँव में मौजूद है उनके हाथ से लिखी रामचरितमानस, 400 वर्षों...

गोस्वामी तुलसीदास के गाँव में मौजूद है उनके हाथ से लिखी रामचरितमानस, 400 वर्षों से ग्रंथ की सेवा कर रहा रामाश्रय का परिवार

गोस्वामी तुलसीदास का पैतृक गाँव उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले का राजापुर है। वहाँ उनके द्वारा हस्तलिखित रामचरितमानस आज भी मौजूद है।

भारत में इस्लामी शासन के दौरान जब लोग रामायण को भूल रहे थे, तब गोस्वामी तुलसीदास ने सरल भाषा में ‘रामचरितमानस’ की रचना कर के उत्तर भारत के घर-घर में रामकथा को पुनर्जीवित किया। बता दें कि इसकी रचना 966 दिन में पूरी की गई थी। तुलसीदास ने अयोध्या और वाराणसी से लेकर चित्रकूट सहित उन उन सभी स्थानों का दौरा भी किया था, जहाँ-जहाँ से ये कथा जुड़ी हुई है। इन जगहों पर आज भी रामायण काल के बताए जाने वाले कई साक्ष्य मौजूद हैं।

गोस्वामी तुलसीदास का पैतृक गाँव उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले का राजापुर है। वहाँ उनके द्वारा हस्तलिखित रामचरितमानस आज भी मौजूद है। सावन के महीने में इसके दर्शन का विशेष प्रभाव माना जाता है। फ़िलहाल रामाश्रय इसके ‘सेवक’ हैं। ‘आज तक’ की खबर के अनुसार, रामाश्रय ने बताया कि 76 वर्ष की उम्र में गोस्वामी तुलसीदास ने इस अनमोल कृति की रचना की थी। अब इनमें से सिर्फ अयोध्या कांड ही बचा है। बाकी का भाग विलुप्त हो गया है।

नीचे संलग्न की गई तस्वीर में आप गोस्वामी तुलसीदास की लिखावट को देख सकते हैं। रामाश्रय का दावा है कि इस मूल कृति को पढ़ने और समझने वाले वो अब एकमात्र व्यक्ति हैं। उन्होंने बताया कि वो तुलसीदास के शिष्यों की 11वीं पीढ़ी में आते हैं और 500 वर्षों से उनका परिवार इस ग्रन्थ की सेवा करता आ रहा है। उन्होंने बताया कि 400 वर्षों में कई अक्षरों के लिखने के तरीके में बदलाव आया है और पिछले 50 साल में ही 5 अक्षर बदल गए हैं।

गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘रामचरितमानस’ की हस्तलिखित मूल कृति

बता दें कि रामचरितमानस की इस मूल कृति को भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित रखने के लिए जापानी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। जहाँ-जहाँ से कागज़ हट गए थे, वहाँ विशेष जापानी लेप लगा कर जोड़ा गया है। हर वर्ष श्रावण (सावन) के महीने में शुक्ल पक्ष सप्तमी को तुलसीदास की जयंती के अवसर पर यहाँ मेला लगता है। राजापुर कस्बे को अब तहसील का दर्जा दिया गया है। सन् 1554 में यमुना तट पर जन्मे तुलसीदास ने 126 वर्ष की उम्र में 1680 ईस्वी में देह-त्याग किया था।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

ईवीएम पर नहीं लगा था BJP का टैग, तृणमूल कॉन्ग्रेस ने झूठ फैलाया: चुनाव आयोग ने खोली पोल, बताया- क्यों लिए जाते हैं मशीन...

भारतीय निर्वाचन आयोग ने टीएमसी के आरोपों का जवाब देते हुए झूठे दावे की पोल खोली और बताया कि ईवीएम पर कोई भाजपा का टैग नहीं हैं।

CM केजरीवाल के घर कहाँ हुआ क्या-क्या… दिल्ली पुलिस ने सब सीन री-क्रिएट करवाए, विभव कुमार ने बचने को डाली जमानत याचिका

दिल्ली पुलिस विभव कुमार को मुख्यमंत्री आवास भी लेकर पहुँची, जहाँ स्वाति मालीवाल के साथ हुई घटना का पूरा सीन रिक्रिएट किया गया।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -