Friday, July 30, 2021
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हिन्दुओं की जिस परिक्रमा को अकबर ने करवा दिया था बंद, योगी सरकार ने करवाई विधिवत शुरुआत

550 साल पहले प्रयागराज की यह परिक्रमा मुगल बादशाह अकबर ने बन्द करवा दी थी। जिसके बाद लम्बे कालखंड तक स्थगित रही।

कुम्भ 2019 कई मामलों में ऐतिहासिक है। चाहे वह अकबर के समय से बंद पंचकोसी यात्रा की शुरुआत हो या भारत को संपेरो और भिखारियों का देश समझने वाले अन्य देशों को कुम्भ में लाकर नतमस्तक कर देने की पहल। आज वही देश अपने-अपने झंडों के साथ कुम्भ को विश्व धरोहर बनाने में लगे हुए हैं। यूनेस्को तो खैर पहले ही कुम्भ को विश्व धरोहर की संज्ञा दे चुका है। मोदी के साथ-साथ योगी सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह मुस्तैद है।

पंचकोसी यात्रा की बात करें तो कुम्भ में आए साधु संतों का कहना है कि ये धार्मिक परिक्रमा गंगा पूजन के बाद प्राचीन काल से ही होती रही है। लेकिन 550 साल पहले ये परिक्रमा मुगल बादशाह अकबर ने बन्द करवा दी थी। जिसके बाद यह लम्बे कालखंड तक स्थगित रही। कई दशक पहले संतों के प्रयास से किसी तरह शुरू भी हुई पर बीच में ही व्यवस्था के अभाव में 1993 में फिर बंद हो गई थी।

बता दें कि दशकों पहले से रुकी हुई परिक्रमा को चालू करने के लिए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और अखाड़ा परिषद की पहल पर प्रयागराज परिक्रमा का रूट तय किया गया। प्रयागराज पंचकोसी परिक्रमा के तहत प्रयागराज के प्राचीन पावन तीर्थों की परिक्रमा की जाती है। साधु संतों की माँग पर योगी सरकार ने इस अति प्राचीन पंचकोसी परिक्रमा को फिर से शुरू किया है। संतो द्वारा मार्ग निर्धारण के बाद से पंचकोसी परिक्रमा के सभी रास्ते पुनः निर्मित किए गए। इस पहल से काशी, मथुरा और वृन्दावन की तरह अब प्रयागराज में भी श्रद्धालु परिक्रमा का लाभ उठा पाएँगे और मनोवांछित पूण्य के भागी होंगे।

प्रयागराज में पूर्व दिशा में दुर्वासा ऋषि का आश्रम है तो पश्चिम में भारद्वाज ऋषि का, उत्तर में पाण्डेश्वर महादेव विराजमान हैं तो दक्षिण में पराशर ऋषि की कुटिया बनी हुई है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रयागराज पहुँचकर इन चारों पावन स्थानों के दर्शन मात्र से ही प्रयाग की परिक्रमा पूरी मानी जाती है।

दो दिन पहले, दशकों से स्थगित प्रयागराज पंचकोसी परिक्रमा की शुरुआत से संतों, महात्माओं से लेकर आम श्रद्धालुओं में भी हर्ष का वातावरण है। संगम तट पर साधु संतों और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने परिक्रमा का शुभारम्भ गंगा आरती से की।

प्रयागराज परिक्रमा के शुभारम्भ से पहले गंगा पूजन

गंगा पूजन के बाद अक्षयवट के दर्शन के बाद ये परिक्रमा शुरू होती है। जिसमे 12 माधव मंदिरों की पूजा और परिक्रमा के साथ उपरोक्त चारो तीर्थ स्थानों को परिक्रमा पथ में शामिल किया गया है। जिला प्रशासन का कहना है कि अब से इस परिक्रमा का आयोजन प्रयागराज में हर साल माघ मेले में किया जाएगा। परिक्रमा मार्ग पर साधु संतों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम भी किए गए हैं।

दूसरी तरफ सरकार ने पहली बार कुम्भ में कार्य कर रहे कर्मचारियों, सफाई कर्मियों के लिए पाँच अस्थायी प्राथमिक विद्यालयों की व्यवस्था भी की है। यहाँ बच्चों को पढ़ाने के लिए टीचर हैं और मिड-डे-मील की भी व्यवस्था की गई है। शासन द्वारा दो महीने की पढ़ाई फ्री रखी गई है। साथ ही लर्निंग कॉर्नर और आंगनबाड़ी केंद्र भी खोला गया है।

मेले में सेक्टर-2 में स्थापित प्राथमिक विद्यालय के अध्यापक हितेश बताते हैं कि 15 दिसंबर से कुम्भ मेला क्षेत्र में 5 सेक्टर्स में पाँच अलग-अलग स्कूल चल रहे हैं। ये वे सेक्टर हैं, जहाँ मजदूर वर्ग के कैम्प बने हैं। चूँकि उनके माता-पिता रोज काम पर निकल जाते हैं, ऐसे में उनके बच्चे इन स्कूलों में पढ़ने आते हैं। यहाँ उन्हें ड्रेस, मोजे, जूते, बैग और किताबें दी गई हैं। उन्हें फल और दोपहर का खाना भी दिया जा रहा है।

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रवि अग्रहरि
अपने बारे में का बताएँ गुरु, बस बनारसी हूँ, इसी में महादेव की कृपा है! बाकी राजनीति, कला, इतिहास, संस्कृति, फ़िल्म, मनोविज्ञान से लेकर ज्ञान-विज्ञान की किसी भी नामचीन परम्परा का विशेषज्ञ नहीं हूँ!

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