Thursday, December 3, 2020
Home विविध विषय मनोरंजन मंदिर में छेड़खानी, मस्जिद मतलब शांति: सलीम-जावेद का रामगढ़, जहाँ 'रहीम चाचा' ही एकलौते...

मंदिर में छेड़खानी, मस्जिद मतलब शांति: सलीम-जावेद का रामगढ़, जहाँ ‘रहीम चाचा’ ही एकलौते बेदाग मानुष

मंदिर में जाकर नायक चिल्लाता है। वहीं दरगाह पर जाते ही शांति छा जाती है, लोगों के सिर झुक जाते हैं। मंदिर में अपनी टाँगें भगवान शिव की प्रतिमा पर टिका कर आप लड़की 'पटा'/छेड़छाड़ सकते हैं लेकिन मस्जिद की सीढ़ियाँ तक 'पाक' होती हैं।

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को ऐसी फ़िल्में बनाने के लिए जाना जाता है, जिनमें हिन्दुओं की भावनाओं का तो मजाक उड़ाया ही जाता है, साथ ही इसमें इस्लाम के गुणगान और मुस्लिमों को अच्छे से अच्छा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती। खैर, किसी को अच्छा दिखाने से कोई समस्या न भी हो तो किसी की भावनाओं से खेलना, बार-बार खेलना, निंदा का विषय तो है ही। आज जिस फिल्म की हम बात करने जा रहे हैं, उसका नाम है – ‘शोले’। सलीम-जावेद की लिखी फिल्म ‘शोले’।

जी हाँ, 1975 में आई रमेश सिप्पी की फिल्म ‘शोले’, जिसकी कहानी सलीम-जावेद ने लिखी थी। सलीम खान, सलमान खान के पिता। और जावेद अख्तर के परिचय की कोई ज़रूरत ही नहीं है क्योंकि वो आजकल सोशल मीडिया पर लड़ाई-झगड़ा करने के लिए अच्छे-खासे कुख्यात हो चुके हैं। बॉलीवुड में ‘लुटेरा बनिया, चुगलखोर ब्राह्मण, अच्छा मुस्लिम और गद्दार हिन्दू’ जैसी परिभाषाएँ इन्हीं दोनों की देन है।

कई बार सलीम-जावेद कह भी चुके हैं कि ‘शोले’ में अमजद खान से अच्छा ‘गब्बर सिंह’ का किरदार कोई नहीं निभा पाता। ऐसा लगता भी है कि इस फिल्म के किरदारों में अमजद खान के कैरेक्टर के लिए कहानी में ज्यादा मेहनत की गई है। कहा जाता है कि वो एक बार में ही इस रोल के लिए सलीम-जावेद को पसंद आ गए थे। खैर, किरदारों का तुलनात्मक अध्ययन हम करेंगे लेकिन उससे पहले फिल्म में दिखाई गई कुछ और चीजें हैं, जिन्हें हमें जानना चाहिए।

रामगढ़ गाँव का सबसे अच्छा, सबसे सच्चा व्यक्ति: मौलवी रहीम चाचा

‘शोले’ फिल्म में अगर कोई एक ऐसा किरदार है, जिस में सिर्फ अच्छाइयाँ ही अच्छाइयाँ हैं और एक भी दाग नहीं है, तो वो है रामगढ़ की मस्जिद के मौलवी, जिन्हें लोग ‘रहीम चाचा’ के नाम से जानते हैं। ‘रहीम चाचा’ सबसे शांत, सौम्य और सरल स्वभाव के हैं। जो भी मिलता है, उस पर प्यार बरसाते हैं। पूरा गाँव उनकी हद से ज्यादा इज्जत करता है। सब उनकी बात मानते हैं और ‘रहीम चाचा’ की सभी मदद भी करते हैं।

70 के दशक की फिल्मों में जहाँ एक तरफ ‘हरे कृष्णा, हरे राम’ के नाम पर लूटने के किस्से दिखाए जा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ मौलवियों का ऐसा चित्रण हो रहा था – जैसे भारत के गाँवों में सबसे अच्छे वही हों। ‘रहीम चाचा’ की एंट्री वाले दृश्य में ही दर्शा दिया गया है कि सारे गाँव वाले उनकी कितनी इज्जत करते हैं। वो बसंती से कहते हैं कि हमेशा कोई न कोई उन्हें छोड़ने के लिए आ ही जाता है। इससे बताया गया है कि गाँव में सबसे ज्यादा सम्मान ‘रहीम चाचा’ का ही है।

‘शोले’ फिल्म में ‘रहीम चाचा’ का चित्रण ऐसा है, जिससे किसी भी मौलवियों से सहज ही प्रेम हो जाए और उनके लिए मन में सम्मान की भावना अपने-आप ही आ जाए। इस चित्रण को और अच्छे से समझने के लिए हमें उस दृश्य को देखना पड़ेगा, जिसमें ‘रहीम चाचा’ के बेटे अहमद की लाश के पास सारे ग्रामीण खड़े हैं। अहमद अपने मामा के यहाँ बीड़ी की फैक्ट्री में कमाने जाता रहता है, तभी ‘गब्बर सिंह’ उसे मार डालता है और घोड़े के साथ उसकी लाश गाँव में भेजता है।

इस दृश्य को सिर्फ ‘इतना सन्नाटा क्यों है भाई‘ वाले डायलॉग के लिए ही याद रखा गया है लेकिन इसमें गौर करने लायक और भी बहुत कुछ है। यहाँ ‘रहीम चाचा’ पूरे गाँव में देशभक्त बन कर उभरते हैं और ‘इज्जत की मौत जिल्लत की ज़िंदगी से कहीं अच्छी है‘ जैसे डायलॉग बोलते हुए अफ़सोस जताते हैं कि उनके दो-चार और बेटे होते, जिन्हें वो ‘गाँव के लिए शहीद’ कर देते। यहाँ जय-वीरू के सबसे बड़े ‘Saviour’ वही हैं – ‘रहीम चाचा’।

सबसे बड़ी बात तो ये है कि यहाँ गाँव वाले उस ठाकुर तक से लड़ते हैं, जिसके दो बेटे, एक बहू और एक पोते को ‘गब्बर सिंह’ ने मार डाला है लेकिन उस मौलवी की बात को वो सर-आँखों पर रखते हैं, जिसके एक बेटे की हत्या हो गई है। ये अंतर ही बॉलीवुड की सच्चाई है। साथ ही बैकग्राउंड में लगातार बजती नमाज की आवाज़ और समय होते ही बेटे की लाश छोड़ कर ‘रहीम चाचा’ का नमाज के लिए जाना – गाँव के सबसे ‘अच्छे व्यक्ति’ यहाँ मौलवी साहब ही हैं।

सलीम-जावेद की ‘शोले’: मंदिर मतलब छेड़छाड़, होली मतलब छेड़छाड़

जहाँ एक तरफ ‘रहीम चाचा’ सबसे अच्छे व्यक्ति हैं और मस्जिद सबसे पवित्र जगह, गाँव का शिव मंदिर किसी भी नौटंकी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। बसंती बताती है कि वो मौसी के कहने से हर सोमवार शिवजी की पूजा करने जाती है, जिससे उसे अच्छा पति मिलेगा। अब इस पर तंज कसते हुए इसे अन्धविश्वास की तरह प्रदर्शित किया गया है या आस्था की तरह, ये तो नहीं पता। लेकिन, इतना ज़रूर है कि मंदिर को ‘लड़की पटाने’ के लिए उपयुक्त जगह बताया गया है।

अगस्त 2014 में अपने पिता और दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की 70वीं जयंती पर राहुल गाँधी ने हिंदुत्व और मंदिरों को महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ के साथ जोड़ा था। ये अचानक नहीं था। बॉलीवुड में सलीम-जावेद जैसों ने ऐसे नैरेटिव बनाने के लिए खासी मेहनत की है। ‘शोले’ भी इसका एक उदाहरण है। ‘बसंती’ के पीछे-पीछे धर्मेंद्र भी पहुँच जाते हैं मंदिर और अपनी टाँगें भगवान शिव की प्रतिमा पर टिका कर पीछे खड़े हो जाते हैं।

मंदिर में शिव प्रतिमा के पीछे खड़े होकर हीरो लड़की के साथ छेड़खानी करता है और लड़की को भी लगता है कि भगवान शिव ही बोल रहे हैं। वो तो भला हो ‘जय’ का, जो समय रहते ‘बसंती’ के सामने इसका खुलासा कर देता है। मंदिरों को इसी तरह की नाटक-नौटंकियों की जगह दिखाने का चलन रहा है, जहाँ जाकर नायक चिल्लाता है। वहीं दरगाह पर जाते ही शांति छा जाती है, लोगों के सिर झुक जाते हैं। ये नैरेटिव बॉलीवुड में कब से चला आ रहा है।

मंदिर तो छेड़छाड़ के लिए ही बने होते हैं: ‘शोले’ फिल्म का दृश्य

अब आते हैं होली पर। आजकल तो होली पर ‘सीमेन भरे बैलून्स’ के भी अफवाह फैला दिए जाते हैं। होली को ‘Regressive’ त्यौहार कहा जाता है। असल में बॉलीवुड के गानों ने ही इन चीजों का सामान्यीकरण किया है। सलीम-जावेद की लिखी फिल्म ‘शोले’ में ‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं‘ गाने में मौलवी साहब भी बड़े प्रेम से बैठ कर रंगों का कार्यक्रम देखते रहते हैं। लेकिन, इस गाने का लिरिक्स या बोल जो है, वो भी गौर करने लायक है।

जारे जा दीवाने तू होली के बहाने तू छेड़ ना मुझे बेसरम पूछ ले ज़माने से ऐसे ही बहाने से लिए और दिए दिल जाते हैं

जा रे जा दीवाने तू होली के बहाने तू
जा रे जा दीवाने तू होली के बहाने तू
छेड़ ना मुझे बेशरम
पूछ ले ज़माने से ऐसे ही
बहाने से लिए और दिए दिल जाते हैं

इस गाने के बोल 40 बार फिल्मफेयर के लिए नॉमिनेट होने वाले आनंद बख्शी ने लिखा है। इसका सीधा अर्थ है कि होली मतलब छेड़छाड़, होली के बहाने ही ‘ऐसी-वैसी’ चीजें दी जा सकती है। ‘होली के बहाने छेड़छाड़‘ वाले इस नैरेटिव को काफी फिल्मों में प्रयोग किया गया है। इसी का बड़ा रूप आज हम ‘सीमेन भरे बैलून्स’ वाले अफवाह के रूप में देखते हैं। होली जैसे हिन्दू त्योहारों को बदनाम किया जाना तभी से चल रहा है।

लाचार ठाकुर, जो अपनी रक्षा भी नहीं कर सकता

एक और चीज जो इस फिल्म में गौर करने लायक है, वो है ठाकुर का चित्रण। ठाकुर में कोई गड़बड़ी नहीं है लेकिन व इतना असहाय है कि वो खुद की रक्षा नहीं कर सकता, तो ग्रामीणों की रक्षा क्या करेगा। ठाकुर जमींदार है, पुलिस अधिकारी है, गाँव में उसका प्रभाव है – लेकिन उसके पूरे परिवार को मौत की नींद सुला दिए जाने के बावजूद ग्रामीणों को उतना दुःख नहीं होता, जितना ‘रहीम चाचा’ के बेटे की मौत के बाद।

‘शोले’ ने इस नैरेटिव को आगे बढ़ाने में सफलता पाई है कि ‘ठाकुर तो अपना भी नहीं धो सकता’ तो वो गाँव वालों की रक्षा क्या करेगा? लाचार ठाकुर को चोर-बदमाशों की ज़रूरत पड़ती है, ताकि वो अपने खिलाफ हुए अत्याचार का बदला ले सके। कहते हैं कि ‘शोले’ के अंत में ठाकुर ने ‘गब्बर सिंह’ को मार डाला था लेकिन एंडिंग बदल कर उसके न्यायप्रिय होने के कारण दिखाया गया कि ठाकुर क़ानून अपने हाथ में नहीं ले सकता।

अधिकतर चीजें हॉलीवुड के ‘वेस्टर्न जॉनर’ की फिल्मों से उठा कर उसमें अच्छे ‘रहीम चाचा’ और ‘मंदिर व हिन्दू त्योहारों में महिलाओं से छेड़छाड़’ वाला एंगल जोड़ते ही वो सलीम-जावेद की फिल्म ‘शोले’ बन जाती है। अमिताभ बच्चन ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन द वेस्ट’ (1968) के चार्ल्स ब्रॉन्सन की तरह माउथ ऑर्गन बजाते हैं, ‘गब्बर सिंह’ का पूरा किरदार और हावभाव ही ‘फॉर अ फ्यू डॉलर्स मोर’ (1965) में जायन मरिया वोलोंटे के किरदार से प्रेरित है।

जब सलीम खान और जावेद अख्तर जैसे लोगों का प्रभाव हो तो फ़िल्में ऐसी ही बनती हैं। तब भारत में विदेशी फ़िल्में नहीं देखी जाती थीं, लोगों के पास इंटरनेट नहीं थे कि वो तुरंत हॉलीवुड फ़िल्में डाउनलोड कर के देख लें – इसका इन दोनों ने खूब फायदा उठाया। कई अन्य फ़िल्में हैं, जिनमें इन दोनों ने हिन्दूफ़ोबिया को आगे बढ़ाया है, जिनकी बात हम इसी सीरीज की अगली कड़ी में करेंगे। बता दें कि अमजद खान ‘शोले’ के बाद इस स्तर का कोई परफॉरमेंस नहीं दे पाए।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

कैसा दिखता है वैज्ञानिक कृषि वाला खेत: अजीत भारती का वीडियो | Raj Narayan’s farm and training centre, Keshabe

इस दौरान हमने जानने की कोशिश की कि ये किस तरह से कृषि, गौपालन आदि करते हैं और इसे समाज में भी ले जाने की कोशिश करते हैं।

चिंतित मत होइए, यहाँ से कुछ ले नहीं जा रहे, नया फिल्म सिटी बना रहे हैं: CM योगी का संजय राउत को करारा जवाब

सीएम योगी ने कहा कि मुंबई फिल्म उद्योग वहीं बना रहेगा और एक नई फिल्म सिटी को उत्तर प्रदेश में नए परिवेश में नई आवश्यकताओं के अनुसार विकसित किया जाएगा।

‘अब्बा कहीं जाते थे तो मैं बीमार हो जाती थी’ से ‘अब्बा घरेलू हिंसा करते हैं’: शेहला रशीद की आपबीती

शेहला का एक पुराने ट्वीट का स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है। इसमें शेहला ने लिखा है कि बचपन में जब कभी उनके अब्बा कहीं बाहर जाते थे तो वह बीमार हो जाती थी।

‘अवार्ड वापसी’ की घरवापसी: किसानों के प्रदर्शन के बीच पंजाब के पूर्व खिलाड़ियों ने पुरस्कार लौटने की दी धमकी

पद्म श्री और अर्जुन अवार्डी पहलवान करतार सिंह, अर्जुन अवार्डी बास्केटबॉल खिलाड़ी सज्जन सिंह चीमा और अर्जुन अवार्डी हॉकी खिलाड़ी राजबीर कौर उन लोगों में से हैं जो अपने पुरस्कार वापस करना चाहते हैं।

‘किसी भी केंद्रीय मंत्री को महाराष्ट्र में घुसने नहीं देंगे’: उद्धव के पार्टनर ने दी धमकी, ‘किसान आंदोलन’ का किया समर्थन

उन्होंने आरोप लगाया कि सुधार के नाम पर केंद्र कॉर्पोरेट और बड़े औद्योगिक संस्थानों को शक्तियाँ देना चाहती है।

‘बॉलीवुड को कहीं और ले जाना आसान नहीं’: मुंबई पहुँचे CM योगी अक्षय से मिले, महाराष्ट्र की तीनों सत्ताधारी पार्टियों ने किया विरोध

योगी आदित्यनाथ इसी सिलसिले में मुंबई भी पहुँचे हुए हैं, इसीलिए शिवसेना और ज्यादा चिढ़ी हुई है। वहाँ अभिनेता अक्षय कुमार ने उनसे मुलाकात की।

प्रचलित ख़बरें

‘दिल्ली और जालंधर किसके साथ गई थी?’ – सवाल सुनते ही लाइव शो से भागी शेहला रशीद, कहा – ‘मेरा अब्बा लालची है’

'ABP न्यूज़' पर शेहला रशीद अपने पिता अब्दुल शोरा के आरोपों पर सफाई देने आईं, लेकिन कठिन सवालों का जवाब देने के बजाए फोन रख कर भाग खड़ी हुईं।

‘गुजराती कसम खा कर पलट जाते हैं, औरंगजेब की तरह BJP नेताओं की कब्रों पर थूकेंगे लोग’: क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता की धमकी

जब उनसे पूछा गया कि इस 'किसान आंदोलन' में इंदिरा गाँधी की हत्या को याद कराते हुए पीएम मोदी को भी धमकी दी गई है, तो उन्होंने कहा कि जिसने जो बोया है, वो वही काटेगा।

‘जो ट्विटर पर आलोचना करेंगे, उन सब पर कार्रवाई करोगे?’ बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र की उद्धव सरकार पर दागा सवाल

बॉम्बे हाई कोर्ट ने ट्विटर यूजर सुनैना होली की गिरफ़्तारी के मामले में सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं।

दुर्घटना में घायल पिता के लिए ‘नजदीकी’ अखिलेश यादव से मदद की गुहार… लेकिन आगे आई योगी सरकार

उत्तर प्रदेश में दुर्घटनाग्रस्त एक व्यक्ति की बेटी ने मदद के लिए गुहार तो लगाई अखिलेश यादव से, लेकिन मदद के लिए योगी सरकार आगे आई।

‘हिंदू लड़की को गर्भवती करने से 10 बार मदीना जाने का सवाब मिलता है’: कुणाल बन ताहिर ने की शादी, फिर लात मार गर्भ...

“मुझे तुमसे शादी नहीं करनी थी। मेरा मजहब लव जिहाद में विश्वास रखता है, शादी में नहीं। एक हिंदू को गर्भवती करने से हमें दस बार मदीना शरीफ जाने का सवाब मिलता है।”

राजनीतिक के कारण किसान यूनियन ने लिया बड़ा यू-टर्न: पिछले साल खुद ही उठाई थी नए कानून में शामिल सभी माँग

हैरान होने वाली बात तो है कि आखिर एक साल में बीकेयू इतना बड़ा यूटर्न कैसे ले सकती है। वह लगातार कृषि क्षेत्र में किसानों के हित के लिए बिचौलियों को हटाना चाहते थे।
00:30:45

कैसा दिखता है वैज्ञानिक कृषि वाला खेत: अजीत भारती का वीडियो | Raj Narayan’s farm and training centre, Keshabe

इस दौरान हमने जानने की कोशिश की कि ये किस तरह से कृषि, गौपालन आदि करते हैं और इसे समाज में भी ले जाने की कोशिश करते हैं।

चिंतित मत होइए, यहाँ से कुछ ले नहीं जा रहे, नया फिल्म सिटी बना रहे हैं: CM योगी का संजय राउत को करारा जवाब

सीएम योगी ने कहा कि मुंबई फिल्म उद्योग वहीं बना रहेगा और एक नई फिल्म सिटी को उत्तर प्रदेश में नए परिवेश में नई आवश्यकताओं के अनुसार विकसित किया जाएगा।

NGT ने क्रिसमस और न्यू ईयर पर दी पटाखे चलाने की छूट, दिवाली में लागू था पूर्ण प्रतिबंध

एनजीटी ने कहा है कि क्रिसमस और न्यू ईयर के मद्देनजर देश के उन इलाकों में जहाँ एयर क्वालिटी मॉडरेट स्तर पर है, वहाँ पटाखे रात को 11:55 बजे से 12.30 तक यानी 35 मिनट के लिए चलाने की अनुमित होगी।

बब्बू और छब्बू मियाँ: दर्जी और पेंटर भाई कैसे बन गए भूमाफिया?

खजराना थाना क्षेत्र में बब्बू और छब्बू ने अवैध रूप से तीन आलीशान मकान बना लिया था। जिसको नगर निगम और पुलिस ने पहले नोटिस जारी करके खाली करवाया। फिर जेसीबी और पोकलेन की मदद से जमीदोंज कर दिया।

‘अब्बा कहीं जाते थे तो मैं बीमार हो जाती थी’ से ‘अब्बा घरेलू हिंसा करते हैं’: शेहला रशीद की आपबीती

शेहला का एक पुराने ट्वीट का स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है। इसमें शेहला ने लिखा है कि बचपन में जब कभी उनके अब्बा कहीं बाहर जाते थे तो वह बीमार हो जाती थी।

‘अवार्ड वापसी’ की घरवापसी: किसानों के प्रदर्शन के बीच पंजाब के पूर्व खिलाड़ियों ने पुरस्कार लौटने की दी धमकी

पद्म श्री और अर्जुन अवार्डी पहलवान करतार सिंह, अर्जुन अवार्डी बास्केटबॉल खिलाड़ी सज्जन सिंह चीमा और अर्जुन अवार्डी हॉकी खिलाड़ी राजबीर कौर उन लोगों में से हैं जो अपने पुरस्कार वापस करना चाहते हैं।

‘जो इस्लाम में प्रतिबंधित, जिन्ना ने वह सब कुछ किया’: उनके नाम पर बनी शराब की बोतल गिन्ना वायरल, लोगों ने जमकर लिए मजे

लेबल पर लिखा गया है कि एमए जिन्ना को कभी भी यह मंजूर नहीं होगा जबकि उन्होंने पूल बिलियर्ड्स, सिगार, पोर्क सॉसेज के साथ-साथ बढ़िया स्कॉच व्हिस्की और शराब का आनंद लिया।

‘शिहाब ने मेरे शौहर को मुझसे दूर किया, अश्लील संदेश भेजे, जान से मारने की धमकी दी’: कर्नाटक में असिया बनी शांति की पीड़ा

आसिया का कहना है कि उसके पति को कहीं छुपा दिया गया है और उसका मोबाइल बंद कर दिया गया है। जब वह अपने पति के परिवार के घर गई, तो उसे शिहाब ने हत्या की धमकी दी थी।

सड़क से अतिक्रमण हटाने को कहा तो कॉन्ग्रेस नेता के भाई अब्बास सिद्दीकी ने पुलिसकर्मी से की मारपीट, गिरफ्तार

स्थानीय लोगों का कहना है कि अब्बास और उसके साथी सड़क पर कुर्सी लगाकर बैठे हुए थे, जिसे हटाने की बात को लेकर व्यापारियों ने पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता और मारपीट की।

2 कॉन्ग्रेस नेताओं की हत्या, घिर गई केरल की वामपंथी सरकार: सुप्रीम कोर्ट ने दिया CBI जाँच का आदेश

मृतक के परिजन और पार्टी कार्यकर्ताओं की माँग को देखते हुए हाइकोर्ट ने मामले में CBI जाँच के आदेश दिए थे। राज्य सरकार ने हाइकोर्ट के खिलाफ...

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,518FollowersFollow
359,000SubscribersSubscribe