Monday, June 17, 2024
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‘चली मैं गदर मचा के’: जिन्हें पुराण कहते हैं ‘मूल प्रकृति’, उन राधा रानी का फिर अश्लील चित्रण, सनी लियोनी का गाना ‘बेअदबी’ या नहीं?

लेकिन नहीं, बॉलीवुड के लिए राधा 'सेक्स बॉडी वाली' और 'पार्टी करने वाली' है, जो 'ग़दर मचा कर' नाचती है। बॉलीवुड के लिए रासलीला का अर्थ एक से अधिक लड़कियों के साथ अश्लील नृत्य करना है। बॉलीवुड के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान देने वाले भगवान श्रीकृष्ण एक 'मनचला आशिक' हैं।

यूट्यूब (YouTube) पर ‘सारेगामा म्यूजिक (Saregama Music)’ नामक चैनल पर सनी लियोनी (Sunny Leone) का एक गाना आया है, जिसका नाम है – ‘मधुबन (Madhuban)’, जिसमें वो गणेश आचार्य द्वारा कोरियोग्राफ किए गए अदाओं पर नृत्य करती हुई दिख रही हैं। इस गाने की मुख्य पंक्ति ‘नाचे, मधुबन में राधिका नाचे’ है। आप समझ सकते हैं कि राधा/राधिका शब्द को बॉलीवुड किस तरह से लेता है और श्रीकृष्ण एवं राधा की ‘रासलीला’ को वो किस रूप में देखता है।

अक्टूबर 2012 में करण जौहर की एक फिल्म आई थी – स्टूडेंट ऑफ द ईयर, जिससे सिद्धार्थ मल्होत्रा, वरुण धवन और आलिया भट्ट ने मुख्य किरदारों में अपना डेब्यू किया था। इसका एक गाना आपको याद होगा – ‘ओ राधा तेरी चुनरी, ओ राधा तेरा झल्ला, ओ राधा तेरी नटखट नजरिया’। इसकी पंक्तियाँ “राधा ओन दी डांस फ्लोर.. राधा लाइक्स टू पार्टी.. राधा लाइक्स तो मूव देट.. सेक्सी राधा बॉडी..” से आप समझ सकते हैं कि हिन्दू देवी-देवताओं के लिए बॉलीवुड के मन में क्या इज्जत है। अमृतसर और कपूरथला में ‘बेअदबी’ के आरोप में मॉब लिंचिंग के बीच हिन्दुओं का मजाक बनाने की आज़ादी पूरी है।

अब वापस ताज़ा गाने पर आते हैं, ‘जिसकी शुरुआत ही ‘नाचे मधुबन में राधिका, जंगल में नाचे जैसे मोर रे साँवरिया मोरे’ पंक्ति से होती है। गाने की अन्य पंक्तियाँ देखिए – ‘चली मैं बिजली गिरा कर, मधुबन में राधिका नाचे’, ‘घनघोर जवानी हूँ, तेरी प्रीत पुरानी हूँ, बाय बर्थ दीवाली हूँ, चली मैं ग़दर मचा के – मधुबन में राधिका नाचे।’ साथ ही इसमें सनी लियोनी ‘रिवीलिंग ड्रेस’ में भी दिख रही है और पानी से लेकर डांस मूव्स तक के इस्तेमाल से गाने को सेक्सी बनाने की भरपूर कोशिश की गई है।

अब आते हैं इस गाने के अन्य विवरण के बारे में। इसे गाया है कनिका कपूर ने। वही कनिका कपूर, जिन पर कोरोना की पहली लहर के दौरान मार्च 2020 में अपना संक्रमण छिपा कर सैकड़ों लोगों की ज़िन्दगी खतरे में डालने के आरोप लगे थे। जब उन्हें लखनऊ के PGIMS में भर्ती कराया गया, तब भी वहाँ उनके नखरे से अस्पताल के कर्मचारी परेशान हो गए थे। उनका कहना था कि अस्पताल में वो जेल जैसा महसूस कर रही हैं। लंदन से वापस आकर कई पार्टियों में तब शामिल हुईं कनिका कपूर पर डॉक्टरों के साथ भी अभद्रता के आरोप लगे थे।

इस गाने का संगीत दिया है तोशी सबरी और शारिब सबरी ने, जो भाई ही हैं। कान पकाऊ संगीत के लिए जानी जाने वाली इस संगीतकार जोड़ी ने इससे पहले ‘वीरप्पन (2016)’ और ‘जेल (2009)’ जैसी फिल्मों में गाने कम्पोज किए हैं। हालाँकि, तोशी सबरी की आवाज़ अच्छी है और 2009 की फिल्म ‘राज़ – द मिस्ट्री कन्टीन्यूज’ में उनके गाने ‘माही माही’ को काफी लोकप्रियता मिली थी। अब उन्होंने हिन्दुओं, खासकर वैष्णव समाज के लिए पुण्य मानी जाने वाली राधा को लेकर अश्लीलता फैलाने वाला गाना बनाया है।

इस गाने के बोल मनोज यादव ने लिखे हैं। ज़ोहेब खान ने गाने को रिकॉर्ड किया है और इसे मिक्स व मास्टर करने का काम तौसीफ शेख ने किया है। जब इस तरह के लोग किसी प्रोजेक्ट से जुड़े रहे हों तो आप समझ सकते हैं कि हिन्दू धर्म और हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बना आकर उन्हें अपमानित करना कोई आश्चर्यजनक नहीं है। सनी लियोनी कभी ‘पोर्न स्टार’ हुआ करती थीं, लेकिन बॉलीवुड में ‘जिस्म 2’ से 2012 में डेब्यू करने के बाद वो ‘रागिनी एमएमएस 2 (2014)’ ‘एक पहेली लीला (2015)’ और ‘मस्तीजादे (2016)’ जैसी फिल्मों से सुर्खियाँ बटोर चुकी हैं।

लेकिन, अभिनय से ज्यादा उनकी माँग आइटम सॉन्ग्स में हैं और उसके लिए वो मोटी रकम चार्ज करती हैं। ”शूटआउट एट वडाला (2013)’ का ‘लैला’ हो या ‘रईस (2017)’ का ‘लैला मैं लैला’, उनके आइटम सॉन्ग्स हमेशा चर्चा में रहते हैं। खैर, ये लेख सनी लियोनी के बारे में बताने के लिए नहीं है, बल्कि ये सवाल पूछने के लिए है कि बॉलीवुड को किसने हक़ दिया है कि वो श्रीकृष्ण और राधा का मजाक बनाए? इनका नाम लेकर अश्लीलता फैलाए और फिर रुपए कमाए?

राधा कौन हैं? इसका बेहतर जवाब इस्कॉन से बेहतर आप कहाँ पा सकते है? संस्था का कहना है कि राधा ईश्वर की ही नारी रूप हैं। सौंदर्य और रिश्ते की प्रतिमूर्ति हैं वो। मिठास और दयालुता का रूप हैं वो। ये शब्द हमारे नहीं, प्रबोधानंद सरस्वती के हैं। वो कहते हैं कि राधा प्यार में सुंदरता का रूप हैं। उन्हें देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है, जिनके जन्म को हिन्दू समाज ‘राधा अष्टमी’ के रूप में मनाता है। श्रीकृष्ण और राधा के रिश्ते को ईश्वर और मनुष्य के बीच प्यार और भक्ति के रूप में भी देखा जाता है।

लेकिन नहीं, बॉलीवुड के लिए राधा ‘सेक्स बॉडी वाली’ और ‘पार्टी करने वाली’ है, जो ‘ग़दर मचा कर’ नाचती है। बॉलीवुड के लिए रासलीला का अर्थ एक से अधिक लड़कियों के साथ अश्लील नृत्य करना है। बॉलीवुड के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान देने वाले भगवान श्रीकृष्ण एक ‘मनचला आशिक’ हैं। बृन्दावन और बरसाना में जिन राधा की पूजा होती है, उन्हें बॉलीवुड में ‘रिवीलिंग ड्रेस’ में अश्लील नृत्य करती एक महिला के रूप में पेश किया जाता है। उन्हें हिन्दू धर्मग्रंथों में ‘कृष्णप्रिया’ और ‘वृषभानुसुता’ कहा गया है, जो सुंदर रूप वाली ‘कृष्णात्मिका’ हैं।

इसी का और कट्टर रूप हम तब देखते हैं जब कोई ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ का बहाना बना कर ‘सेक्सी दुर्गा’ नाम की फिल्म लेकर आ जाता है। हिन्दू देवी-देवताओं के पोषक पहन कर उनका मजाक बनाने वाले दृश्य तो हम ‘जाने भी दो यारों (1983)’ से लेकर ‘पीके (2014)’ तक में देख चुके हैं। लेकिन बॉलीवुड उन राधा का अश्लील चित्रण करता है, जिन्हें ब्रह्मवैवर्त पुराण में ‘मूल प्रकृति’ कहा गया है। इसमें बताया गया है कि राधा और कृष्ण एक-दूसरे से ऐसे ही जुड़े हुए हैं, जैसे शरीर और आत्मा।

‘कृष्णाष्टकम’ में ‘वृन्दावनेश्वरी राधा कृष्णो वृन्दावनेश्वरः। जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम॥’ श्लोक आता है, जिसका स्पष्ट अर्थ है कि श्री राधारानी वृन्दावन की स्वामिनी हैं और भगवान श्रीकृष्ण वृन्दावन के स्वामी हैं, इसीलिए मेरे जीवन का प्रत्येक-क्षण श्रीराधा-कृष्ण के आश्रय में व्यतीत हो। जिनके लिए साधु-महात्माओं ने इस तरह की प्रार्थना की हो, इस रूप में देखा हो, क्या उनके लिए कोई पूर्व पोर्न स्टार ‘घघौर जवानी हूँ’ गाते हुए डांस करे तो अच्छा लगता है? बिलकुल भी नहीं।

बॉलीवुड को सीधा सन्देश दिया जाना चाहिए कि वो फिल्मों और वेब सीरीज में हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाना बंद करे। क्या किसी फिल्म में पैगम्बर मुहम्मद का मजाक बनते देखा है? क्या किसी वेब सीरीज में येशु और चर्चों का अपमान किया जाता है? क्या कभी स्क्रीन पर अन्य धर्मों का मजाक बनते हुए देखा है? नहीं। फिर ‘तांडव‘ से लेकर ‘पाताल लोक‘ जैसी वेब सीरीज में हिन्दू ही क्यों निशाना बनते हैं? कोई मुनव्वर फारुकी जैसा कॉमेडियन हिन्दू देवी-देवताओं पर ही क्यों चुटकुले मारता है?

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अनुपम कुमार सिंह
अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
भारत की सनातन परंपरा के पुनर्जागरण के अभियान में 'गिलहरी योगदान' दे रहा एक छोटा सा सिपाही, जिसे भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीति और सिनेमा की समझ है। पढ़ाई कम्प्यूटर साइंस से हुई, लेकिन यात्रा मीडिया की चल रही है। अपने लेखों के जरिए समसामयिक विषयों के विश्लेषण के साथ-साथ वो चीजें आपके समक्ष लाने का प्रयास करता हूँ, जिन पर मुख्यधारा की मीडिया का एक बड़ा वर्ग पर्दा डालने की कोशिश में लगा रहता है।

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