Homeविविध विषयमनोरंजन'वो सुपर रिच, पैसे की खातिर बिक गई?': सुष्मिता सेन और ललित मोदी के...

‘वो सुपर रिच, पैसे की खातिर बिक गई?’: सुष्मिता सेन और ललित मोदी के रिश्ते पर बोलीं तसलीमा नसरीन – जिन्हें पैसों से प्यार, वो खो देते हैं आत्मसम्मान

"अब वो अलग-अलग अपराधों में शामिल एक व्यक्ति के साथ अपना जीवन बिता रही हैं। वह व्यक्ति बहुत ही अनाकर्षक है।"

बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन और ललित मोदी के अफेयर की खबरों के बीच प्रसिद्ध बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने एक्ट्रेस पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि जिन्हें पैसों से प्यार हो जाता है वो बहुत ही जल्दी अपने आत्म सम्मान को भी खो देता है। हाल ही में ललित मोदी ने भी सुष्मिता सेन को अपना बेटर हाफ बताया था।

तसलीमा नसरीन ने दोनों के बीच नजदीकियों की खबरों को लेकर कहा, “मुझे सुष्मिता सेन का व्यक्तित्व बहुत अधिक पसंद आया था। उन्होंने कम उम्र में ही दो बेटियों को गोद ले लिया था। मुझे उनकी ईमानदारी, दृढ़ता, बहादुरी, सीधापन अच्छा लगा था। लेकिन, अब वो अलग-अलग अपराधों में शामिल एक व्यक्ति के साथ अपना जीवन बिता रही हैं। वह व्यक्ति बहुत ही अनाकर्षक है। क्या इसका मतलब ये है कि वो व्यक्ति सुपर रिच है? क्या वो पैसे की खातिर बिक गईं?”

लेखिका कहती हैं कि हो सकता है कि सुष्मिता सेन को उस व्यक्ति से प्यार हो, लेकिन मैं इस पर विश्वास नहीं कर सकती। पैसों से प्यार करने वाले मेरी नजरों में अपनी इज्जत खो देते हैं। पूर्व मिस यूनिवर्स के साथ अपनी मुलाकात को याद कर तसलीमा ने लिखा, “मैं सुष्मिता सेन से केवल एक बार मिली थी वो भी कोलकाता एयरपोर्ट पर। उन्होंने मुझे गले लगाया और ‘आई लव यू’ कहा। वो अच्छी-खासी लंबी हैं, इसलिए उनके बगल में खड़े होकर मुझे लगा कि मैं अचानक से छोटी हो गई हूँ। मैं उनकी सुंदरता को अपनी आँखों से आसानी से नहीं हटा पा रही थी।”

क्यों ट्रोल हो रही सुष्मिता सेन

गौरतलब है कि हाल ही में आईपीएल फिक्सिंग के आरोपित भगोड़े ललित मोदी ने एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने एक्ट्रेस को बेटर हाफ करार दिया था। बाद में ललित मोदी ने ये स्पष्ट किया कि वे दोनों एक दूसरे को डेट कर रहे हैं। ललित मोदी मौजूदा वक्त में एक व्यवसायी हैं। फिक्सिंग मामले में फंसने के बाद ललित मोदी लंदन भाग गए थे।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?

मुस्लिमों को रिझाने में 2017 में औंधे मुँह गिरे थे अखिलेश, आरक्षण का वादा किया लेकिन घोषणापत्र खाली रहा: 2027 के चुनावी रण में...

मुस्लिम आरक्षण पर अखिलेश बयानों से लेकर मुलायम सिंह यादव की मुस्लिम राजनीति अपने पुराने ढर्रे पर रही है। हालाँकि अब यूपी में वोटर्स अपनी प्रथमिकताएँ बदल रहे हैं।
- विज्ञापन -