Thursday, July 25, 2024
Homeविविध विषयअन्यसेंट्रल विस्टा परियोजना से हर साल होगी ₹1000 करोड़ की बचत: रिपोर्ट्स

सेंट्रल विस्टा परियोजना से हर साल होगी ₹1000 करोड़ की बचत: रिपोर्ट्स

"सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद सभी ऑफिस एक जगह पर आ जाएँगे। इससे न केवल किराए की बचत होगी, बल्कि बेहतर कार्यस्थल के साथ अच्छा कोर्डिनेशन होगा।"

केंद्र सरकार की सेंट्रल विस्टा परियोजना को लेकर चल रहे विवाद के बीच आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया है कि इस परियोजना से हर साल 1000 करोड़ रुपए की बचत होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार दिल्ली में विभिन्न मंत्रालयों के दफ्तरों के किराए पर सालाना करीब ₹1000 करोड़ खर्च करती है। ऐसे में सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत न केवल आधुनिक तकनीक से लैस, भूकंपरोधी, तीन गुना बड़ा और खूबसूरत भवन मिलेगा, बल्कि एक ही परिसर से केंद्र सरकार के सभी 51 मंत्रालय संचालित होंगे।

उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार के कई कार्यालय अलग-अलग जगहों पर हैं और कई किराए के भवनों में हैं, जिनके लिए बड़ी रकम की आवश्यकता होती है। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद सभी ऑफिस एक जगह पर आ जाएँगे। इससे न केवल किराए की बचत होगी, बल्कि बेहतर कार्यस्थल के साथ अच्छा कोर्डिनेशन होगा।”

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत कुल 10 नए भवनों का निर्माण किया जाएगा, जबकि राजपथ के दोनों ओर मौजूदा ढाँचे को तोड़ा जाएगा। एक नया संसद भवन, एमपी कार्यालय, प्रधानमंत्री और भारत के उपराष्ट्रपति के लिए नए आवासों का निर्माण किया जाएगा। राजपथ में केंद्रीय विस्टा एवेन्यू को फिर से तैयार किया जाएगा। परियोजना की कुल लागत लगभग 20000 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जिसके 2026 तक पूरा होने की संभावना है। मौजूदा विरासत भवनों में से किसी को भी परियोजना के तहत तोड़ा नहीं जाएगा। वर्तमान में केवल नया संसद भवन और सेंट्रल विस्टा एवेन्यू बनाया जा रहा है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक से कर दिया था इनकार

पिछले महीने दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंट्रल विस्टा परियोजना पर रोक लगाने की माँग वाली याचिका को खारिज कर दी थी।  हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाते हुए कहा कि ये ‘राष्ट्रीय महत्व का एक अत्यावश्यक परियोजना है।’ याचिका में कोरोना महामारी के मद्देनजर इस प्रोजेक्ट को रोकने की अपील की गई थी।

याचिका में दावा किया गया था कि सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को सिर्फ इसीलिए ‘ज़रूरी सेवाओं’ के कैटेगरी में डालने के पीछे कोई तर्क नहीं है क्योंकि कोई ठेका सम्बन्धी किसी अनिवार्य समयसीमा में इसे पूरा करना है। वहीं केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया था कि राजपथ और इंडिया गेट पर जो निर्माण कार्य चल रहा है, वह संसद भवन या केंद्र सरकार के अधिकारियों/नेताओं के दफ्तरों से जुड़ा कार्य नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ ने कहा था कि ये एक राष्ट्रीय महत्व का प्रोजेक्ट है जिसे पृथक कर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इससे जनता का हित होना है। साथ ही हाईकोर्ट ने इस याचिका को एक वास्तविक जनहित याचिका (PIL) न मानते हुए ‘मोटिवेटेड’ याचिका करार दिया था।

इससे पहले कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने सेन्ट्रल विस्टा को रुपयों की ‘आपराधिक बर्बादी’ करार दिया था। उन्होंने ऐसा दिखाने का प्रयास किया था जैसे ये प्रोजेक्ट पीएम मोदी का कोई निजी प्रोजेक्ट हो। वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र और राजस्थान की सरकार विधायकों के लिए हॉस्टल बनवा रही है, जिस पर वो चुप्पी साधे हुए हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘दरबार हॉल’ अब कहलाएगा ‘गणतंत्र मंडप’, ‘अशोक हॉल’ बना ‘अशोक मंडप’: महामहिम द्रौपदी मुर्मू का निर्णय, राष्ट्रपति भवन ने बताया क्यों बदला गया नाम

राष्ट्रपति भवन ने बताया है कि 'दरबार' का अर्थ हुआ कोर्ट, जैसे भारतीय शासकों या अंग्रेजों के दरबार। बताया गया है कि अब जब भारत गणतंत्र बन गया है तो ये शब्द अपनी प्रासंगिकता खो चुका है।

जिसका इंजीनियर भाई एयरपोर्ट उड़ाने में मरा, वो ‘मोटू डॉक्टर’ मारना चाह रहा था हिन्दू नेताओं को: हाई कोर्ट से माँग रहा था रहम,...

कर्नाटक हाई कोर्ट ने आतंकी मोटू डॉक्टर को राहत देने से इनकार कर दिया है। उस पर हिन्दू नेताओं की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -