ग्रुप स्टेज के दौरान आपने मोरक्को के अठारह वर्षीय मिडफील्डर अयूब बोउदादी को ब्राज़ील जैसी सितारों से सजी टीम के सामने बेखौफ़ होकर खेलते देखा था। विश्व कप केवल चैंपियन नहीं चुनता, वह नई किंवदंतियाँ भी गढ़ता है। हर संस्करण किसी नए सितारे को दुनिया के सामने लाता है। इस बार वह नाम है, गिल्बर्टो राफेल मोरा ज़ामब्रानो। बीती सुबह दुनिया ने उस नए नाम को पहचाना- गिल्बर्टो मोरा; यह नाम याद रखिए। आने वाले वर्षों में विश्व फुटबॉल की कई बड़ी कहानियाँ शायद इसी नाम के इर्द-गिर्द लिखी जाएँगी।
महज़ सत्रह वर्ष की आयु में, ‘मेक्सिकन पेड्री’ के नाम से पहचाने जाने वाले गिल्बर्टो मोरा ने उस मंच पर ऐसा प्रदर्शन किया, जहाँ अक्सर अनुभवी खिलाड़ी भी दबाव में बिखर जाते हैं। पेले (1958) के बाद विश्व कप के नॉकआउट मुकाबले में उतरने वाले दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी बने मोरा ने यह एहसास ही नहीं होने दिया कि वह मैदान पर सबसे कम उम्र के फुटबॉलर थे। उनके खेल में परिपक्वता थी, आत्मविश्वास था और सबसे बढ़कर वह निर्भीकता थी, जो महान खिलाड़ियों की पहचान होती है।
इक्वाडोर के अनुभवी मिडफील्डरों के बीच गिल्बर्टो ने जिस सहजता से खेल को नियंत्रित किया, उसने हर दर्शक को प्रभावित किया। दो अवसर तैयार किए, पाँच रिकवरीज़ दर्ज कीं और अपने सभी लॉन्ग पास सफलतापूर्वक पूरे किए। आँकड़े केवल उनके प्रदर्शन की कहानी का एक हिस्सा हैं; असली कहानी उस आत्मविश्वास की थी, जिसके साथ उन्होंने पूरे मुकाबले की गति को प्रभावित किया। अंतिम सीटी बजते ही स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। दर्शक जानते थे कि उन्होंने केवल एक बेहतरीन मैच नहीं देखा था, बल्कि विश्व फुटबॉल के एक संभावित भविष्य का जन्म देखा था।
मेक्सिको के टुक्सत्ला गुटिएरेज़ से निकला यह किशोर अब केवल अपने देश की उम्मीद नहीं रहा। यदि उसका विकास इसी गति से जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में वह विश्व फुटबॉल के सबसे प्रभावशाली मिडफील्डरों में गिना जा सकता है।
विश्व कप के पिछले कुछ दिनों ने हमें चौंकाने वाले उलटफेरों का रोमांच दिया है, लेकिन कल रात खेले गए नॉकआउट मुकाबलों ने इस टूर्नामेंट को ऐसे यादगार कमबैक्स दिए, जिनका ज़िक्र आने वाले कई दशकों तक किया जाएगा।
अटलांटा की रात में स्टेडियम इंग्लैंड के समर्थकों से भरा था, लेकिन शुरुआती मिनटों से ही स्पष्ट हो गया कि डीआर कांगो यहाँ केवल भाग लेने नहीं, इतिहास रचने आया है।
अटलांटा में थॉमस टुकेल की इंग्लिश टीम के सामने थी डीआर कांगो- एक ऐसी टीम, जिसने पूरे टूर्नामेंट में अपने अनुशासित और संगठित खेल से बड़े-बड़े प्रतिद्वंद्वियों को परेशान किया था। कोच सेबास्टियन देसाब्रे अपनी स्पष्ट रणनीति के साथ मैदान में उतरे थे। उद्देश्य केवल एक था; किसी भी कीमत पर इंग्लैंड की आक्रमण पंक्ति की धार को कुंद करना, उन्हें गोल से दूर रखना और मुकाबले को जितना संभव हो सके उतना लंबा खींचना।
कोच सेबास्टियन देसाब्रे ने क्वालिफाइंग राउंड में अपनी चार डिफेंडरों वाली पारंपरिक 4-4-2 फॉर्मेशन के विपरीत, इस टूर्नामेंट में पुर्तगाल और कोलंबिया जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ 5-3-2 की फॉर्मेशन अपनाई थी। इसी रणनीति के दम पर वह इन दोनों टीमों के विरुद्ध एक-एक अंक जुटाने में सफल रहे थे। लेकिन कल रात उन्होंने एक बार फिर अपनी टीम को 4-4-2 की फॉर्मेशन के साथ मैदान पर उतारा। उनका प्रयास यही था कि किसी भी तरह इंग्लैंड को गोल के लिए तरसाया जाए और मैच को पेनाल्टी शूटआउट तक खींचा जाए।
मगर इंग्लिश कोच थॉमस टुकेल भी क्लब फुटबॉल के एक उच्च स्तरीय कोच माने जाते हैं, जिन्हें अपनी चुस्त रणनीतियों के लिए जाना जाता है। वह चेल्सी के साथ चैंपियंस लीग का खिताब भी जीत चुके हैं। कोच थॉमस टुकेल ने इंग्लैंड की टीम को 4-3-3 की फॉर्मेशन के साथ मैदान पर उतारा। अटैकिंग लाइन में हैरी केन, नोनी मादुएके और मार्कस रैशफोर्ड मौजूद थे। इनके ठीक पीछे स्टार अटैकिंग मिडफील्डर ज्यूड बेलिंघम खेल रहे थे।
रेफरी की व्हिस्ल के साथ मैच का शंखनाद होता है। इंग्लैंड आज फेवरेट था। लेकिन तमाम दर्शकों को चौंकाते हुए डीआर कांगो ब्रायन सिपेंगा के गोल की बदौलत मैच के सातवें मिनट में ही इंग्लैंड पर बढ़त बना लेता है। यह क्या! क्या इस टूर्नामेंट में एक और बड़ा उलटफेर होने जा रहा था?
एक गोल से पिछड़ने के बाद इंग्लैंड लगातार प्रयास करता रहता है कि किसी तरह बराबरी का गोल दागकर मैच में वापसी की जाए, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा था। वह मिले हुए मौकों को भुना नहीं पा रहे थे। पहला हाफ समाप्त हो जाता है। बढ़त अब भी डीआर कांगो के पास थी। लग रहा था कि आज ‘थ्री लायंस’ का सफर यहीं समाप्त हो जाएगा।
खैर, दूसरे हाफ की शुरुआत होती है। इंग्लैंड को 2016 में आइसलैंड जैसे छोटे राष्ट्र ने उलटफेर करते हुए टूर्नामेंट से बाहर कर दिया था। ऐसा लग रहा था कि आज फिर वैसा ही कुछ होने वाला है। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ रहा था, इंग्लिश टीम काफी दबाव में नज़र आ रही थी। कांगो के गोलकीपर लियोनेल मपासी आज अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल खेलते दिखाई दे रहे थे। वह लगातार असाधारण सेव किए जा रहे थे। इंग्लिश अटैकिंग तिकड़ी के पास उनका कोई जवाब नहीं था। उनके शानदार बचावों की बदौलत कांगो अब तक मुकाबले में बढ़त बनाए हुए था।
मैच के 61वें मिनट में कोच टुकेल मार्कस रैशफोर्ड को बाहर बुलाते हुए, हाल ही में स्पेनिश क्लब बार्सिलोना से जुड़ने वाले एंथोनी गॉर्डन को मैदान में भेजते हैं। साथ ही बुकायो साका, नोनी मादुएके की जगह लेते हैं। इसके बाद मैच का रुख पूरी तरह बदल जाता है। एकाएक इंग्लैंड बेहद तेज़ गति से आक्रमण करने लगता है।
मैच के 75वें मिनट में आखिरकार वह गोल आ ही जाता है, जिसका स्टेडियम में सफेद जर्सी पहने हजारों दर्शकों को इंतज़ार था। एंथोनी गॉर्डन गेंद को अपने कप्तान की ओर बढ़ाते हैं और हैरी केन क्लोज़ रेंज से शानदार हेडर लगाते हुए स्कोर 1-1 कर देते हैं। बेहद मुश्किलों के बाद अंततः इंग्लैंड की टीम गोलकीपर लियोनेल मपासी के गोलपोस्ट में सेंध लगाने में सफल हो जाती है।
और फिर, महज़ दस मिनट के भीतर, मैच के 86वें मिनट में एक बार फिर एंथोनी गॉर्डन के ही असिस्ट को कप्तान हैरी केन गोल में बदल देते हैं। शुरुआती क्षणों में जो इंग्लिश टीम मैच में पिछड़ रही थी, अब वही बढ़त बना चुकी थी। केवल दस मिनट के भीतर कांगो का यह बेहद हसीन ख़्वाब टूट जाता है। कप्तान हैरी केन के दो गोलों की बदौलत इंग्लैंड शानदार वापसी करते हुए 2-1 के स्कोर से यह मैच जीत लेता है। इस मुकाबले को लियोनेल मपासी के असाधारण सेव्स के लिए भी याद किया जाएगा, जिन्होंने ज्यूड बेलिंघम और हैरी केन को कई मौकों पर बेहतरीन बचाव करते हुए गोल करने से वंचित रखा।
इंग्लैंड आज एक बड़े उलटफेर का शिकार होते-होते रह गया। उनके कप्तान ने आगे बढ़कर जिस अंदाज़ में खेल का रुख मोड़ा, उससे इस टूर्नामेंट में डीआर कांगो की ड्रीम रन का समापन हो गया। डीआर कांगो की टीम आज बहुत अच्छा खेली, मगर इस जीत के साथ इंग्लैंड ने अगले दौर में जगह बना ली, जहाँ उसका सामना होगा मेक्सिको से, वह भी उनके गढ़ एज़्टेका स्टेडियम में। मेक्सिको को उसके गढ़ एज़्टेका स्टेडियम में हराना निश्चित ही टेढ़ी खीर साबित होगा।
इसके बाद, भारतीय समयानुसार रात डेढ़ बजे सिएटल स्टेडियम में बेल्जियम बनाम सेनेगल का मैच खेला गया। तमाम फुटबॉल पंडित इस मुकाबले में रेड डेविल्स को ही फेवरेट मान रहे थे। बेल्जियम की स्टार्टिंग लाइन-अप में केविन डी ब्रुएने के नेतृत्व में लिआंड्रो ट्रोसार्ड और जेरेमी डोकू अटैकिंग जिम्मेदारियाँ निभाने वाले थे। मिडफील्ड में कप्तान यूरी टीलेमांस मौजूद थे और गोलपोस्ट की रक्षा का जिम्मा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपरों में शुमार, रियल मैड्रिड के मुख्य गोलकीपर थिबो कूर्तुआ के कंधों पर था। वहीं, अपने स्टार खिलाड़ी सादियो माने के नेतृत्व में सेनेगल 4-3-3 की फॉर्मेशन के साथ मैदान पर उतरा था। सेनेगल पिछले दौर में इराक को 5-0 से रौंदते हुए यहाँ पहुँचा था।
मैच शुरू होता है। दोनों ही टीमें एक-दूसरे के गोलपोस्ट की दिशा में गेंद ले जाने की कोशिश करती नज़र आती हैं। शुरुआती क्षणों में दोनों टीमों के खिलाड़ी गोल करने के प्रयास करते हैं, मगर उन्हें सफलता नहीं मिलती। सेनेगल लगातार बेल्जियम के किले को भेदने के प्रयास करता रहता है।
लेकिन मैच के 24वें मिनट में हबीब दियारा एक शानदार गोल दाग देते हैं। सेनेगल मैच में बढ़त बना लेता है। केविन डी ब्रुएने लगातार कोशिश करते हैं कि उनकी टीम मैच में वापसी करे, लेकिन पहले हाफ की समाप्ति पर सेनेगल 1-0 के स्कोर के साथ बढ़त बनाए हुए था। उसने अब तक बेहद शानदार खेल का प्रदर्शन किया था और पूरी तरह बिना दबाव के खेल रहा था।
दूसरा हाफ शुरू होता है। बेल्जियम के कोच अनुभवी रोमेलू लुकाकू को मैदान में उतारते हैं। अचानक ही एक मौका मिलते ही सेनेगल की टीम गेंद के साथ बेल्जियम के गोलपोस्ट की ओर बढ़ती है। मूसा नियाखाते, इस्माइला सार को गोलपोस्ट के समीप खाली पाते ही गेंद उनकी ओर बढ़ाते हैं। इस्माइला सार तेज़ राइट फुटर के साथ इस पास को गोल में तब्दील कर देते हैं। सेनेगल 2-0 के स्कोर के साथ एक आरामदायक बढ़त बना लेता है।
खेल आगे बढ़ता है। इस बीच मैक्सिम डी क्यूपर, ट्रोसार्ड और केविन डी ब्रुएने लगातार सेनेगली गोलपोस्ट पर सेंध लगाने के प्रयास करते रहते हैं, लेकिन सेनेगल की रक्षापंक्ति पूरी तरह चौकस थी। जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ता है, दोनों ही टीमें कुछ बदलाव करती हैं। ऐसा लगने लगा था कि जैसे सेनेगल ने 2002 विश्व कप में तत्कालीन विश्व चैंपियन फ्रांस को ग्रुप स्टेज में चौंकाया था, आज वैसे ही वह 2018 विश्व कप की कांस्य पदक विजेता बेल्जियम को घर का रास्ता दिखा देगा।
80 मिनट का खेल खेला जा चुका था। बेल्जियम 2-0 से पीछे थी। क्योंकि अब केवल दस मिनट का खेल बाकी था, ऐसे में बेल्जियम के कई समर्थक स्टेडियम से बाहर निकलने लगे थे। मगर रेड डेविल्स को उनका यह उपनाम यूँ ही नहीं मिला है।
लेकिन विश्व कप में अंतिम सीटी बजने से पहले कहानी कभी समाप्त नहीं होती। अगले चार मिनट में स्टेडियम ने वह देखा जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
मैच के 86वें मिनट में थॉमस म्यूनियर से मिले पास को रोमेलू लुकाकू गोल में तब्दील कर देते हैं। स्कोर 2-1 हो जाता है। सेनेगल की टीम कुछ समझ पाती, उससे पहले ही महज़ तीन मिनट के भीतर लिआंड्रो ट्रोसार्ड के क्रॉस को बेल्जियम के कप्तान यूरी टीलेमांस गोलपोस्ट के भीतर पहुँचा देते हैं। स्कोर बराबर हो जाता है।
स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को यकीन ही नहीं होता। अभी तीन मिनट पहले तक सेनेगल 2-0 की आरामदायक बढ़त बनाए हुए था और अचानक यह क्या हो गया! कोई कुछ समझ ही नहीं पा रहा था। कुछ ही मिनट पहले तक ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सेनेगल अगले दौर में जगह बना चुका है और अब यह मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में जाता दिखाई दे रहा था।
90 मिनट का खेल समाप्त होता है। क्योंकि यह नॉकआउट चरण का मुकाबला था और दोनों टीमें बराबरी पर थीं, इसलिए मैच एक्स्ट्रा टाइम में चला जाता है। सभी की धड़कनें तेज़ हो चुकी थीं। अब कुछ भी हो सकता था।
दोनों ही टीमें एक बार फिर मैदान में उतरती हैं। इस बार दोनों टीमें काफी सतर्कता के साथ आगे बढ़ रही थीं। दर्शकों को अब भी यकीन नहीं हो रहा था कि कुछ मिनटों में मैच की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। खैर, दोनों टीमें सावधानी के साथ खेलते हुए मौका मिलने पर गोल करने का प्रयास भी करती दिखती हैं। 105 मिनट का खेल पूरा हो जाता है। स्कोर अब भी 2-2 ही था।
एक्स्ट्रा टाइम का दूसरा हाफ शुरू होता है। ऐसा लगने लगता है कि मैच का फैसला अब पेनाल्टी शूटआउट से ही निकलेगा। दबाव दोनों ही टीमों पर बराबर बना हुआ था। कोई भी अब हार का दर्द नहीं झेलना चाहता था। 117 मिनट का खेल पूरा हो चुका था। अब केवल तीन मिनट बाद रेफरी मैच समाप्त कर देंगे और फैसला पेनाल्टी शूटआउट से होगा। दोनों टीमों के कोच पेनाल्टी लेने वाले अपने पाँच खिलाड़ियों की सूची तैयार करने में जुट जाते हैं।
लेकिन तभी, 118वें मिनट में बेल्जियम के कप्तान यूरी टीलेमांस को सेनेगल के पेनाल्टी बॉक्स में फाउल कर दिया जाता है। लंबी बहस होती है। रेफरी VAR की सहायता लेते हैं। बेल्जियम को पेनाल्टी मिल जाती है। कप्तान यूरी टीलेमांस पूरे संयम के साथ पेनाल्टी लेने के लिए आगे बढ़ते हैं। शानदार किक के साथ वह गेंद को गोलपोस्ट के भीतर पहुँचा देते हैं। तमाम साथी खिलाड़ी उनसे लिपटने के लिए दौड़ पड़ते हैं। स्टेडियम में लाल जर्सी पहने हजारों दर्शकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। वहीं, सेनेगल के समर्थकों की आँखें नम हो जाती हैं। मैच के 86वें मिनट तक उनकी टीम 2-0 से आगे थी, लेकिन अब वही टीम टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी थी। यह वाकई बेहद क्रूर अंत था। इतना शानदार खेल दिखाने के बावजूद सेनेगल शायद इस तरह टूर्नामेंट से बाहर होने की हकदार नहीं थी। स्टेडियम में मौजूद तमाम समर्थक नम आँखों से सेनेगल के खिलाड़ियों का हौसला बढ़ा रहे थे। यह दृश्य सचमुच बेहद भावुक कर देने वाला था।
यह शायद एक अद्भुत संयोग था कि 2 जुलाई, 2018 को रूस में खेले गए विश्व कप के राउंड ऑफ 16 मुकाबले में जापान के विरुद्ध दूसरे हाफ के शुरुआती पलों में 2-0 से पिछड़ने के बावजूद बेल्जियम ने शानदार वापसी की थी और स्टॉपेज टाइम में गोल दागकर मुकाबला 3-2 से जीत लिया था। आज भी, 2 जुलाई, 2026 को, उन्होंने सेनेगल के खिलाफ मैच के 86वें मिनट तक पिछड़ने के बावजूद शानदार कमबैक करते हुए 3-2 के स्कोर से अपना नॉकआउट मुकाबला जीत लिया।
यह भी शायद संयोग ही था कि दोनों ही मुकाबलों में कमबैक की पटकथा 86वें मिनट में हुए गोल के साथ शुरू हुई। इंग्लैंड की जीत के नायक उनके कप्तान हैरी केन रहे, वहीं बेल्जियम को टूर्नामेंट में जीवित बनाए रखने का काम उनके कप्तान यूरी टीलेमांस ने किया। ऐसा बिल्कुल नहीं था कि उनकी विरोधी टीमों ने अच्छा खेल नहीं दिखाया, लेकिन कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखते हुए दोनों टीमों ने जिस तरह शानदार वापसी की, वह लंबे समय तक याद रखी जाएगी। इन दोनों ही टीमों की जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम है।
हालाँकि, ऐसा कुछ जर्मनी के अनुभवी खिलाड़ियों की ओर से देखने को नहीं मिला, जिसके चलते आज उनकी जमकर आलोचना हो रही है। गौरतलब है कि सडन-डेथ के दौरान जब कप्तान जोशुआ किमिख ने अपने अनुभवी साथियों से पेनाल्टी लेने का आग्रह किया, तो कई खिलाड़ियों ने पेनाल्टी लेने से इनकार कर दिया था। ऐसे में आज मैच में पिछड़ने के बावजूद वापसी करते हुए इंग्लैंड और बेल्जियम द्वारा दर्ज की गई ये जीतें और भी बड़ी हो जाती हैं। ये वही मुकाबले हैं, जो नन्हे बच्चों के दिलों में अमिट छाप छोड़ जाते हैं और इस खेल के प्रति उनके मन में आजीवन प्रेम जगा देते हैं।
अगले मैच में, आज सुबह साढ़े पाँच बजे सैन फ्रांसिस्को के स्टेडियम में अपने घरेलू समर्थकों के बीच अमेरिकी टीम का सामना बोस्निया एवं हर्ज़ेगोविना से हुआ। जैसा कि कल चर्चा हुई थी, यहाँ मॉरिसियो पोचेतीनो की अमेरिकी टीम का पलड़ा भारी नज़र आ रहा था। यूएसए ने मैच के दोनों हाफ में एक-एक गोल दागते हुए 2-0 से यह मुकाबला जीत लिया और राउंड ऑफ 16 में जगह बना ली, जहाँ उसका सामना बेल्जियम से होगा। गौरतलब है कि इस मैच में यूएसए का खाता खोलने वाले उनके स्टार सेंटर-फ़ॉरवर्ड फोलारिन बालोगन को मुकाबले के 64वें मिनट में रेफरी ने रेड कार्ड दिखा दिया, जिसके चलते वह अगले दौर के अहम मुकाबले में टीम का हिस्सा नहीं होंगे।
अब नज़रें अगले दो दिनों पर हैं, जहाँ विश्व कप का रोमांच एक बार फिर अपने चरम पर पहुँचने वाला है। फुटबॉल प्रेमियों के लिए कई ऐसे मुकाबले इंतज़ार कर रहे हैं, जो इस टूर्नामेंट की दिशा बदल सकते हैं।
आज रात भारतीय समयानुसार साढ़े बारह बजे लॉस एंजेलिस में स्पेन और ऑस्ट्रिया आमने-सामने होंगे। दोनों टीमें अपनी-अपनी शैली के लिए जानी जाती हैं और ऐसे में यह मुकाबला सामरिक कौशल की एक दिलचस्प परीक्षा साबित हो सकता है।
इसके बाद, कल सुबह साढ़े चार बजे टोरंटो में विश्व फुटबॉल की दो पारंपरिक ताकतों के बीच एक और बड़ा मुकाबला खेला जाएगा, जहाँ पुर्तगाल का सामना क्रोएशिया से होगा। कागज़ पर पलड़ा भले ही पुर्तगाल का भारी दिखाई देता हो, लेकिन नॉकआउट फुटबॉल में इतिहास बार-बार यह साबित कर चुका है कि एक छोटी-सी चूक भी पूरे अभियान का अंत कर सकती है।
यह मुकाबला पुर्तगाल के लिए केवल अगले दौर में पहुँचने की चुनौती नहीं होगा। ठीक एक वर्ष पहले इसी दिन उन्होंने अपने प्रिय साथी और स्टार फ़ॉरवर्ड डियोगो जोटा को एक दुखद कार दुर्घटना में खो दिया था। ऐसे में यह मानना कठिन नहीं कि जब पुर्तगाली खिलाड़ी मैदान पर उतरेंगे, तो उनके मन में केवल जीत का लक्ष्य ही नहीं, बल्कि अपने दिवंगत साथी की स्मृतियाँ भी होंगी। यदि पुर्तगाल विजयी होता है, तो वह जीत निश्चित ही जोटा को समर्पित सबसे भावनात्मक श्रद्धांजलियों में से एक होगी। विश्व कप अक्सर केवल ट्रॉफियाँ नहीं, भावनाएँ भी समेटे होता है। यह मुकाबला भी शायद उन्हीं दुर्लभ क्षणों में से एक बन सकता है।
इसके बाद भी रोमांच थमने वाला नहीं है। कल रात स्विट्ज़रलैंड का सामना अल्जीरिया से होगा, जबकि डलास में मिस्र के ‘फ़राओज़’ ऑस्ट्रेलिया की चुनौती का सामना करेंगे। चारों टीमें अगले दौर में जगह बनाने के लिए अपना सर्वस्व झोंक देंगी और यही विश्व कप की सबसे बड़ी खूबसूरती है- यहाँ हर नब्बे मिनट एक नई कहानी लिख सकते हैं।
विश्व कप अपने निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका है। अब हर मैच इतिहास लिख सकता है, हर गोल किसी देश का सपना बचा सकता है और हर रात किसी नए नायक को जन्म दे सकती है। यही कारण है कि फीफा विश्व कप केवल एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे महान खेल उत्सव कहलाता है।
बने रहिएगा साथ। ऑपइंडिया पर फीफा विश्व कप की हर बड़ी कहानी, हर ऐतिहासिक मुकाबला और हर यादगार पल आपके लिए इसी तरह लेकर आते रहेंगे।


