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उच्च विकास दर, नियंत्रित महँगाई, घटती बेरोजगारी और संतुलित अर्थव्यवस्था: जानें- कैसे भारत ने 2025 में लिखी विकास की नई परिभाषा

साल 2025 में वैश्विक स्तर पर व्यापारिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक मंदी की आशंकाओं के बावजूद भारत ने अपनी मजबूत घरेलू माँग, दूरदर्शी नीतियों और साहसिक सुधारों के बल पर न केवल स्थिरता बनाए रखी, बल्कि नई ऊँचाइयाँ हासिल कीं।

साल 2025 भारत की आर्थिक यात्रा का एक स्वर्णिम अध्याय साबित हुआ। वैश्विक स्तर पर व्यापारिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक मंदी की आशंकाओं के बावजूद भारत ने अपनी मजबूत घरेलू माँग, दूरदर्शी नीतियों और साहसिक सुधारों के बल पर न केवल स्थिरता बनाए रखी, बल्कि नई ऊँचाइयाँ हासिल कीं। बात चाहे सैन्य ताकत (ऑपरेशन सिंदूर) की हो या आर्थिक ताकत की… पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी ही रफ्तार में आगे बढ़ता रहा।

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई, जो पिछले छह तिमाहियों का उच्चतम स्तर है। यह पिछले वर्ष की इसी तिमाही के 5.6 प्रतिशत और पहली तिमाही के 7.8 प्रतिशत से काफी अधिक है।

इस मजबूत प्रदर्शन ने भारत को दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर बनाए रखा। भारत की जीडीपी अब 4.18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच चुकी है, जिससे हम जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 2.5 से 3 वर्षों में भारत जर्मनी को पछाड़कर तीसरे स्थान पर पहुँच जाएगा और 2030 तक जीडीपी 7.3 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी।

इस विकास की मुख्य वजह मजबूत निजी खपत रही, जो घरेलू माँग का प्रमुख चालक है। साथ ही सरकारी पूंजीगत व्यय की प्राथमिकता, जीएसटी और आयकर सरलीकरण जैसे सुधारों ने उपभोक्ता विश्वास को बढ़ावा दिया।

प्रमुख क्षेत्रों में चौतरफा गति को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने जीडीपी विकास अनुमान को 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी इसी आशावाद को दोहराया है, जिसमें विश्व बैंक ने 2026 में 6.5 प्रतिशत विकास का अनुमान लगाया है। मूडीज को उम्मीद है कि भारत 2026 में 6.4 प्रतिशत और 2027 में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सबसे तेजी से बढ़ने वाली जी-20 अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

आईएमएफ ने 2025 के लिए अपने अनुमान बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत और 2026 के लिए 6.2 प्रतिशत कर दिए हैं। ओईसीडी ने 2025 में 6.7 प्रतिशत और 2026 में 6.2 प्रतिशत विकास का पूर्वानुमान लगाया है, तो एसएंडपी ने जारी वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत और अगले वर्ष 6.7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है।

एशियाई विकास बैंक ने अपने 2025 के पूर्वानुमान को बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है और फिच ने मजबूत उपभोक्ता माँग के कारण वित्त वर्ष 26 के अनुमान को बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है। ये सभी आँकड़े जी-20 देशों में सबसे अधिक है।

विकास के इस सफर में तीन प्रमुख स्तंभ उभरकर सामने आए हैं, उच्च विकास, स्थिरता और आत्मविश्वास। वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं के बीच भारत की घरेलू माँग ने अर्थव्यवस्था को संभाला। हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स जैसे क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई), क्रेडिट वृद्धि और शहरी खपत सभी सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। वाणिज्यिक क्षेत्र में मजबूत क्रेडिट प्रवाह और कॉर्पोरेट बैलेंस शीट की मजबूती ने निवेश को प्रोत्साहित किया।

आम जनता को घटती महँगाई से बड़ी राहत

महँगाई के मोर्चे पर 2025 भारत के लिए राहत भरा वर्ष रहा। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महँगाई जनवरी 2025 में 4.26 प्रतिशत से शुरू होकर नवंबर तक घटकर 0.71 प्रतिशत पर आ गई, जो कई वर्षों का निचला स्तर है। यह आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य (सहिष्णुता बैंड +/-2 प्रतिशत) से काफी नीचे है। मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट रहा, विशेषकर सब्जियाँ, दालें और अनाज में। इसकी वजह से खाद्य महंगाई नवंबर में -3.91 प्रतिशत तक नकारात्मक हो गई।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महँगाई अनुमान को 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2.0 प्रतिशत कर दिया। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) महँगाई भी नवंबर में -0.32 प्रतिशत पर रही। इस अनुकूल महँगाई परिदृश्य ने आरबीआई को नीतिगत रेपो दर को 25 आधार अंक घटाकर 5.25 प्रतिशत करने की गुंजाइश दी। यह स्थिति अर्थव्यवस्था के लिए एक दुर्लभ ‘गोल्डीलॉक्स पीरियड’ है, जहाँ विकास तेज है और महँगाई कम। कम महँगाई से घरेलू बचत बढ़ी, खपत मजबूत हुई और मौद्रिक नीति में लचीलापन आया।

बेरोजगारी में ऐतिहासिक गिरावट दिखी, रोजगार सृजन को नई गति मिली

बेरोजगारी और आर्थिक गतिविधि की गति एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और एक-दूसरे के पूरक हैं। जैसे-जैसे विकास की रफ्तार बढ़ती है, वस्तुओं और सेवाओं के अधिक उत्पादन से श्रम की माँग बढ़ती है, जिससे रोजगार के अधिक अवसर पैदा होते हैं और बेरोजगारी कम होती है। इस संदर्भ में भारत की घटती बेरोजगारी दर इसकी आर्थिक गति की मजबूती को दर्शाती है। विकास की निरंतरता को देखते हुए, भारत के बेहतर होते रोजगार परिणाम निरंतर विकास और रोजगार सृजन के बीच अच्छे तालमेल को दिखाते हैं।

आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के अनुसार, नवंबर 2025 में 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लिए बेरोजगारी दर घटकर 4.8 प्रतिशत हो गई, जो कई महीनों का निचला स्तर है। महिलाओं की बेरोजगारी में भारी कमी आई, ग्रामीण महिलाओं में 4.0 प्रतिशत से 3.4 प्रतिशत और शहरी में 9.7 प्रतिशत से 9.3 प्रतिशत रही, तो ग्रामीण बेरोजगारी 3.9 प्रतिशत और शहरी 6.5 प्रतिशत पर रही।

श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) सात महीनों के उच्चतम स्तर 55.8 प्रतिशत पर पहुँची, जबकि श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) 53.2 प्रतिशत हो गया। ये आँकड़े बताते हैं कि अधिक लोग कार्यबल में शामिल हो रहे हैं और उन्हें रोजगार मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में कृषि और निर्माण तथा शहरी में सेवा क्षेत्र ने रोजगार बढ़ाए। महिलाओं की भागीदारी बढ़ना विशेष रूप से उत्साहजनक है।

भारत की युवा जनसंख्या (10-24 वर्ष आयु वर्ग में लगभग 26 प्रतिशत) एक बड़ा अवसर है। सुधारों से गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन हुआ, जो समावेशी विकास सुनिश्चित कर रहा है। विकास और रोजगार के बीच का चक्र मजबूत हुआ, तेज विकास से अधिक नौकरियां और अधिक नौकरियों से मजबूत खपत।

निर्यात में मजबूती, वैश्विक बाजारों में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी

भारत ने व्यापार के बाहरी क्षेत्र ने भी मजबूती दिखाई। नवंबर 2025 में मर्चेंडाइज निर्यात बढ़कर 38.13 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 19 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। प्रमुख वस्तुएँ जैसे इंजीनियरिंग गुड्स (23 प्रतिशत वृद्धि), इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स और पेट्रोलियम उत्पादों ने योगदान दिया। सेवा निर्यात भी मजबूत रहा, अप्रैल-नवंबर में 8.65 प्रतिशत बढ़कर 270 बिलियन डॉलर के करीब।

विदेशी मुद्रा भंडार 686 बिलियन डॉलर पर पहुँचा, जो 11 महीनों से अधिक के आयात को कवर करता है। चालू खाता घाटा जीडीपी के 1.3 प्रतिशत पर सीमित रहा। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में भारी वृद्धि हुई, जिसमें अप्रैल-सितंबर में शुद्ध एफडीआई 127 प्रतिशत बढ़ा। व्यापार समझौतों से न्यूजीलैंड, ओमान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और ईएफटीए देशों के साथ संबंध मजबूत हुए।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नेक्स्ट-जेनरेशन रिफॉर्म्स से बही सुधारों की बयार

ये उपलब्धियाँ बिना ठोस आधार के हासिल नहीं हुईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लेख में 2025 को ‘सुधारों का वर्ष’ कहा, जहाँ भारत ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर सवार हुआ। सुधारों का इंजन भारत की जनसांख्यिकी, युवा ऊर्जा और लोगों का जज्बा है।

जीएसटी सुधारों में दो मुख्य स्लैब (5% और 18%) लागू किए गए। घरों, MSMEs, किसानों और ज्यादा लेबर वाले सेक्टर्स पर टैक्स का बोझ कम किया गया है। इसका मकसद विवादों को कम करना और बेहतर कंप्लायंस सुनिश्चित करना है। इस सुधार से कंज्यूमर सेंटिमेंट और डिमांड को बढ़ावा मिला है। सुधार लागू होने के बाद फेस्टिव सीजन में बिक्री बढ़ी है।

इस साल आयकर में अभूतपूर्व राहत मिली है। पहली बार सालाना 12 लाख रुपए तक कमाने वाले लोगों को कोई इनकम टैक्स नहीं देना पड़ा। साल 1961 के पुराने इनकम-टैक्स एक्ट को आधुनिक और सरल इनकम टैक्स एक्ट, 2025 से बदल दिया गया है। ये सभी सुधार मिलकर भारत को एक पारदर्शी, टेक्नोलॉजी-आधारित टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन की ओर ले जा रहे हैं।

इसके अलावा सरकार ने एमएसएमई के लिए ‘छोटी कंपनियों’ की परिभाषा बढ़ाकर टर्नओवर 100 करोड़ तक कर दिया है। इससे हजारों कंपनियों के लिए कंप्लायंस का बोझ और उससे जुड़ी लागत कम होगी। भारत सरकार ने भारतीय बीमा कंपनियों में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी है। इससे बीमा कवरेज और नागरिकों की सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ-साथ, लोगों को बेहतर बीमा विकल्प मिलेंगे।

भारत सरकार ने लेबर सुधारों में 29 पुराने कानूनों को चार नए कोड में समाहित किया। भारत ने एक ऐसा लेबर फ्रेमवर्क बनाया है जो कर्मचारियों के हितों की रक्षा करता है और साथ ही बिजनेस इकोसिस्टम को भी बढ़ावा देता है। ये सुधार सही वेतन, समय पर वेतन भुगतान, बेहतर औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थलों पर केंद्रित हैं। ये वर्कफोर्स में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित करते हैं। संविदा श्रमिकों सहित असंगठित श्रमिकों को ESIC और EPFO के अंतर्गत लाया गया है, जिससे औपचारिक वर्कफोर्स का दायरा बढ़ा है।

इस साल सबसे महत्वपूर्ण कदम रहा न्यूक्लियर एनर्जी में SHANTI एक्ट से प्राइवेट भागीदारी को खोलने का। SHANTI एक्ट भारत की क्लीन-एनर्जी और टेक्नोलॉजी के सफर में एक बड़ा बदलाव लाने वाला कदम है। न्यूक्लियर साइंस और टेक्नोलॉजी के सुरक्षित, पक्के और जवाबदेह विस्तार के लिए एक मजबूत ढाँचा सुनिश्चित करता है। भारत को AI युग की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है, जैसे डेटा सेंटर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन और हाई-टेक्नोलॉजी इंडस्ट्रीज को पावर देना। इन सबसे ज्यादा रोजगार और ग्रोथ होगी।

मोदी सरकार ने विकसित भारत- G RAM G एक्ट, 2025 रोजगार गारंटी फ्रेमवर्क रोजगार गारंटी को 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है। इससे गाँव के इंफ्रास्ट्रक्चर और आजीविका को मजबूत करने की दिशा में खर्च बढ़ेगा। इसका मकसद ग्रामीण काम को ज्यादा इनकम और बेहतर एसेट्स सुनिश्चित करने का जरिया बनाना है।

शिक्षा के क्षेत्र में देखें तो इस साल मोदी सरकार ने शिक्षा में सिंगल रेगुलेटर का प्रस्ताव रखा है। इसके तरह UGC, AICTE, NCTE जैसी कई ओवरलैपिंग बॉडीज को ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान’ (Viksit Bharat Shiksha Adhishthan) से बदल दिया जाएगा। इस कदम से देश में इंस्टीट्यूशनल ऑटोनॉमी को मजबूत किया जाएगा, साथ ही इनोवेशन और रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा।

विकसित भारत की ओर बढ़ती राष्ट्र की यात्रा

साल 2025 ने साबित किया कि भारत वैश्विक चुनौतियों के बीच भी अपनी राह खुद बनाने में सक्षम है। उच्च विकास, कम महँगाई, घटती बेरोजगारी और मजबूत निर्यात ने अर्थव्यवस्था को नई ताकत दी। सुधारों ने नींव मजबूत की। 2047 के विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में यह वर्ष मील का पत्थर है। आने वाले वर्षों में सुधारों की यह गति जारी रहेगी, क्योंकि भारत की उड़ान अब रुकने वाली नहीं।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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