Friday, July 30, 2021
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हिटलर ने बंकर में अपने डॉक्टर से पूछा- आत्महत्या का सबसे अच्छा तरीका क्या – जहर या बंदूक की गोली?

अडोल्फ़ हिटलर के अंदर 'शुद्ध नस्ल' से लेकर अच्छी नई नस्ल का बीजारोपण वर्साय की संधि की निराशा ने किया था। यही वो समय था, जब वो मानने लगा कि यहूदियों को अच्छे फैसले लेने का अधिकार नहीं होना चाहिए और उसने यहूदियों के खिलाफ फतवा जारी कर एक क्रूरतम अध्याय की नींव रखी।

इतिहास में 30 अप्रैल की तारीख दुनिया के नक्शे पर जर्मन नेता अडोल्फ हिटलर की मौत के दिन के तौर पर दर्ज है। नाजी और ‘आर्यों’ के उद्भव (Good Aryan blood) का सपना लेकर अप्रैल 1945 में अडोल्फ़ हिटलर पचास फुट नीचे बने बंकर में भूमिगत हो गया था। उसने अपनी प्रेमिका ईवा ब्राउन को सलाह दी कि उसे शहर छोड़कर चला जाना चाहिए लेकिन ईवा ने उसकी बात नहीं मानी और आखिरी समय तक उसके साथ रहने का फैसला किया।

मरने से कुछ दिन पहले, 20 अप्रैल को एक वीभत्स दृश्य में, हिटलर ने अपने सैनिकों और साथियों के छोटे समूह के साथ अपना 56वाँ जन्मदिन मनाया। यह उसका आखिरी जन्मदिन होने वाला था। हिटलर उस दिन बंकर से बाहर आखिरी बार नजर आया था। उसने सोवियत संघ की रेड आर्मी से लड़ने वाले अपने सैनिकों को आइरन क्रॉस भेंट किए।

आखिरकार, हिटलर ने खुलकर अपने अंत के बारे में बात करनी शुरू करते हुए कहा-

“मैं व्यक्तिगत रूप से नहीं लड़ूँगा। हमेशा यह खतरा रहेगा कि मैं केवल घायल होकर रूस के लोगों के हाथों लग जाउँगा। मैं नहीं चाहता कि मेरे दुश्मन मेरे शरीर को अपमानित करें। मैंने आदेश दिया है कि मेरा अंतिम संस्कार किया जाए। ब्राउन ने मेरे साथ जीवन का अंत करने का फैसला किया है…।”

बर्लिन का युद्ध 16 अप्रैल को शुरू हुआ था। इसके बाद मित्र राष्ट्रों की सेनाएँ धीरे-धीरे बर्लिन की ओर बढ़ रही थीं। अब हिटलर के पास प्रतिक्रिया करने के लिए सेना नहीं थी। आखिर में उसने घोषणा की कि हम जंग हार चुके हैं।

आत्महत्या: सायनाइड या गोली से?

बंकर में उन लोगों के बीच चर्चा का विषय यह था कि आत्महत्या करने का सबसे अच्छा तरीका क्या हो सकता है- जहर या बंदूक की गोली? वहाँ पसरी उदासी के बीच भी जश्न का माहौल था। ईवा ब्राउन, हिटलर के बरगॉफ रिट्रीट में बिताए खुशनुमा पलों की यादें साझा कर रही थी।

हिटलर और ईवा ब्राउन

हिटलर ने एक चिकित्सक से सुझाव माँगा कि आत्महत्या किस तरह से की जाए। इस पर चिकित्सक ने उसे सायनाइड की गोली लेने या सिर में गोली मार लेने का सुझाव दिया था। हिटलर चाहता था कि सायनाइड की गोली से मौत का उसके पास प्रमाण हो, इसके लिए उसने इस दवा का प्रयोग अपनी प्यारी पालतू बिल्ली ब्लॉन्डी पर किया। उसके सैनिकों ने उसे बताया कि प्रयोग सफल रहा और बिल्ली ने बस कुछ ही पलों में दम तोड़ दिया था।

अप्रैल 25, 1945 के बाद से हिटलर पूरी तरह से अपनी मौत की तैयारियाँ करने लगा था। इसी दिन उसने अपने निजी अंगरक्षक हींज़ लिंगे को बुला कर खुद को गोली मारने के बाद उसके शव को जलाने की अपनी इच्छा के बारे में विस्तृत तरीके से समझाया। उसने कहा कि जब मैं खुद को गोली मारूँ तो वो मृत शरीर को चांसलरी के बगीचे में ले जा कर उसमें आग लगा दे ताकि मौत के बाद कोई उसे देख ना सके और न ही पहचान पाए।

हिटलर चाहता था कि उसके खुद को गोली मारते ही उससे जुड़ी सभी वस्तुओं को समाप्त कर दिया जाए। उसकी वर्दी, कागज़ और हर चीज़, जिसे उसने इस्तेमाल किया हो, उसे एकसाथ आग के हवाले कर दिया जाए। इसके साथ ही हिटलर ने अपने बॉडीगार्ड हींज़ लिंगे से कहा कि उसे सिर्फ़ अंटन ग्राफ़ के बनाए गए फ़्रेडरिक महान की आयल पेंटिंग को नहीं छूना है। हिटलर ने अपने ड्राइवर को उसकी मौत के बाद सुरक्षित बर्लिन से बाहर ले जाने का निर्देश दिया था।

आखिरी दिनों में बूढ़े गिद्ध जैसा दिखने लगा था हिटलर

हिटलर का आखिरी दिनों में बर्ताव पूरी तरह से हार चुके व्यक्ति के समान था। उसका शरीर जर्जर था, उसके कपड़े मैले थे। हिटलर के आखिरी दिनों की हालत का वर्णन हिटलर पर लिखी मशहूर पुस्तक ‘द लाइफ़ एंड डेथ ऑफ़ अडोल्फ़ हिटलर’ लिखने वाले रॉबर्ट पेन ने कुछ इस तरह लिखा है-

“तब तक हिटलर का चेहरा सूज गया था और उसमें असंख्य झुर्रियाँ पड़ गई थीं। उनकी आँखों में जीवन जाता रहा। कभी-कभी उसका दायाँ हाथ बुरी तरह से काँपने लगता और उस कंपकपाहट को रोकने के लिए वो उसे अपने बाएँ हाथ से पकड़ता था।”

रॉबर्ट पेन ने लिखा कि हिटलर किसी बूढ़े गिद्ध की तरह अपने कंधों के बीच अपने सिर को झुकाता था और उसकी चाल लडखड़ाने लगी थी। किताब में लिखा है- “शायद एक बम विस्फोट में उनके कान की एक बारीक झिल्ली को हुए नुकसान की वजह से ऐसा हुआ था। वो थोड़ी दूर चलते और रुक कर किसी मेज़ का कोना पकड़ लेते। छह महीनों के अंदर वो दस साल बूढ़े हो गए थे।”

ईवा हिटलर ब्राउन से शादी

हिटलर ने बंकर में बिताए अपने अंतिम दिनों में ही फैसला किया था कि वो ईवा ब्राउन से शादी कर उस रिश्ते को वैधता देगा। रॉबर्ट पेन ने इस पुस्तक में लिखा है कि किस तरह से शादी के लिए गवाह और आवश्यक लोगों को बंकर तक लाया गया। इसके बाद रॉबर्ट पेन इन दोनों की शादी के बारे में लिखते हैं –

“शादी के सर्टिफ़िकेट पर अडोल्फ़ हिटलर का हस्ताक्षर एक मरे हुए कीड़े की तरह नजर आ रहा था। ईवा ब्राउन ने एक बार शादी से पहले वाला अपना नाम ब्राउन लिखना चाहा। उसने ‘बी’ लिख भी दिया, लेकिन तभी उसे याद आया कि आखिरकार हिटलर के नाम के साथ अपना नाम लेने का सौभाग्य उसे प्राप्त हो रहा था। फिर उसने ‘बी’ को काटा और फिर साफ़-साफ़ ‘ईवा हिटलर ब्राउन’ लिखा। नाजी प्रोपेगेंडा मंत्री जोसेफ़ गोएबेल्स ने मकड़ी के जाले जैसा हस्ताक्षर किया और नाम के पहले वह डॉक्टर लगाना नहीं भूला। सर्टिफ़िकेट पर तारीख लिखी थी 29 अप्रैल जो कि ग़लत थी, क्योंकि शादी होते-होते रात के बारह बज कर 25 मिनट हो चुके थे। कायदे से उस पर 30 अप्रैल लिखा जाना चाहिए था।”

शादी की औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद ईवा हिटलर के साथ वहाँ मौजूद लोगों ने शराब और शैंपेन पी। हिटलर ने बंकर के अंदर ही ईवा से शादी की और उसे अपनी पत्नी का दर्जा दिया। उनके आस-पास का इलाका आग में जल रहा था और वे बंकर में शादी कर रहे थे। हिटलर ने भी शैंपेन का एक घूंट लिया और वो भावुक होकर उन पुराने दिनों के बारे में बातें करने लगा, जब वो जोसेफ़ गोएबेल्स की शादी में शामिल हुए थे। बात करते हुए अचानक हिटलर का मूड बदल गया और उसने कहा- “सब ख़त्म हो गया, मुझे हर एक ने धोखा दिया।”

आखिरी दिन

अप्रैल 30, 1945 की दोपहर एक बजे दोनों ने अपने साथियों से विदा ली और बंकर में चले गए। कुछ देर बाद बाहर खड़े लोगों ने गोली की आवाज सुनी, दरवाजे पर खड़े गार्ड को जले हुए बारूद की बू आई। उन्हें आभास हुआ कि अंदर गोली चली है और सायनाइड का इस्तेमाल भी हुआ है।

जब वो लोग अंदर गए तो वहाँ दुल्हा-दुल्हन के शव पड़े हुए थे। हिटलर ने खुद को गोली मार ली थी और ईवा ने साइनाइड कैप्सूल खा कर अपने प्रेमी के साथ जान दे दी थी। यह बीसवीं सदी की एक प्रेम कहानी थी, जिसका नायक एक क्रूर तानाशाह था।

इसके बाद हिटलर और ईवा ब्राउन के शव को बंकर के बाकी लोग एक बागीचे में ले गए, जैसा कि हिटलर ने कहा था। वहाँ उस पर पेट्रोल डालकर जलाने की कोशिश की लेकिन पहली कोशिश नाकाम हो गई। सोवियत के सैनिक उनकी तरफ तेजी से बढ़ रहे थे। हिटलर के सैनिक उनके शव को बमों से बने एक गड्ढे में खींचकर ले गए जहाँ उसे आखिर में जला दिया गया।

अगले दिन रेडियो से हिटलर की मौत की घोषणा की गई। स्टालिन को जब हिटलर की आत्महत्या के बारे में पता चला तो उसने पहले इस बात की पुष्टि करनी चाही। हिटलर के जीवनी लिखने वाले इयान करशॉ (Ian Kershaw) लिखते हैं- “जैसे ही शवों को आग लगाई गई, वहाँ मौजूद सभी लोगों ने हाथ ऊँचे कर ‘हेल हिटलर’ कहा और वापस अपने बंकर में लौट गए।”

इयान ने इस जीवनी में आगे लिखा है – “जब लपटें कम हुई तो उन पर और पेट्रोल डाला गया। ढाई घंटे तक लपटें उठती रहीं। कुछ दिनों बाद जब सोवियत जाँचकर्ताओं ने हिटलर और उनकी पत्नी ईवा के अवशेषों को बाहर निकाला तो सब कुछ समाप्त हो चुका था। वहाँ एक डेंटल ब्रिज ज़रूर मिला। 1938 से हिटलर के दंत चिकित्सक के लिए काम करने वाले एक शख़्स ने इस बात की पुष्टि की कि वो डेंटल ब्रिज हिटलर के ही थे।”

हिटलर की मौत के बाद मई 08, 1945 को जर्मनी ने सरेंडर कर दिया। इसके लिए जर्मनी की ओर से किसी तरह की शर्त नहीं रखी गई थी। आख़िर में यहूदियों का नरसंहार करने वाले हिटलर के अध्याय को विराम मिला। वह नीली आँखों और ऊँचे कद वाले आर्यन्स की नस्ल का सपना देखता था।

अडोल्फ़ हिटलर के अंदर ‘शुद्ध नस्ल’ से लेकर अच्छी नई नस्ल का बीजारोपण वर्साय की संधि की निराशा ने किया था। यही वो समय था जब वो मानने लगा कि यहूदियों को अच्छे फैसले लेने का अधिकार नहीं होना चाहिए और उसने यहूदियों के खिलाफ फतवा जारी कर एक क्रूरतम अध्याय की नींव रखी।

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आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

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