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सबसे ऊँची चोटी पर वर्ल्ड रिकॉर्ड तो बना, लेकिन माउंट एवरेस्ट का ‘जाम’ कितना खतरनाक?: 2 भारतीयों की मौत से उठते सवाल

एवरेस्ट की चोटी के पास का हिस्सा 'डेथ जोन' कहलाता है। यह इलाका समुद्र तल से 8,000 मीटर से भी ज्यादा ऊँचा है। इतनी ऊँचाई पर हवा में ऑक्सीजन बहुत कम होती है। इसलिए, इंसान का शरीर यहाँ ज्यादा देर तक जिंदा नहीं रह सकता है। जब रास्ते में भीड़ होती है, तो पर्वतारोहियों को लाइन में खड़ा होना पड़ता है।

दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट पर इस साल इतिहास का सबसे बड़ा ‘ट्रैफिक जाम’ लगा है। नेपाल के रास्ते एक ही दिन में रिकॉर्ड 274 पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट पर चढ़कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। लेकिन इस भारी भीड़ और जाम के बीच एक बहुत ही दुखद खबर आई है।

एवरेस्ट की चोटी से नीचे उतरते समय दो भारतीय पर्वतारोहियों की तबियत अचानक बिगड़ गई। इस वजह से उन दोनों की मौत हो गई है। मरने वाले भारतीयों के नाम अरुण कुमार तिवारी और संदीप आरे हैं। चोटी के पास पर्वतारोहियों की बहुत लंबी कतार लगी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जाम में फँसने के कारण ऑक्सीजन की कमी हो गई। साथ ही वहाँ अत्यधिक ठंड थी, जिसे इस बड़े हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।

दो भारतीय पर्वतारोहियों ने गँवाई अपनी जान

नेपाल के इस पर्वतारोहण सीजन में भारी भीड़ लगी है। इस भीड़ के बीच 2 भारतीय पर्वतारोहियों की मौत हो गई है। इस दुखद खबर ने सबको झकझोर दिया है। एवरेस्ट पर यात्रा कराने वाली एजेंसी ‘द पायनियर एडवेंचर्स’ ने इस बात की पुष्टि की है।

पहले भारतीय पर्वतारोही का नाम अरुण कुमार तिवारी था। उनकी मौत चोटी के ठीक नीचे मशहूर ‘हिलारी स्टेप’ के पास हुई। वे चोटी से नीचे उतर रहे थे। तभी वे अचानक बहुत बीमार पड़ गए। चार शेरपा गाइडों ने उन्हें बचाने की बहुत कोशिश की। लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। डॉक्टर्स को शक है कि ज्यादा ऊँचाई की वजह से उनके फेफड़ों में पानी भर गया था।

दूसरी मौत 46 साल के संदीप आरे की हुई। संदीप ने 20 मई को एवरेस्ट की चोटी पर कामयाबी से तिरंगा फहराया था। लेकिन नीचे उतरते समय वे बर्फीले अंधेपन का शिकार हो गए। उन्हें अचानक कुछ भी दिखना बंद हो गया था। इसके बाद पाँच शेरपा गाइडों ने मिलकर उन्हें साउथ समिट से बचाया। उन्हें किसी तरह कैंप-2 तक लाया गया। लेकिन वहाँ पहुँचते ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

एवरेस्ट की चोटी पर 5 किलोमीटर लंबा जाम

इस साल एवरेस्ट पर चढ़ने वालों की बहुत भारी भीड़ है। भीड़ के मामले में इस बार सारे पुराने रिकॉर्ड टूट गए हैं। चोटी के रास्ते पर पर्वतारोहियों की करीब 5 किलोमीटर लंबी लाइन देखी गई है। सोशल मीडिया पर इस भीड़ की तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं। इस साल चीन ने तिब्बत की तरफ से चढ़ाई करने की इजाजत नहीं दी थी।

इस वजह से दुनिया भर के सभी लोग नेपाल के रास्ते ही एवरेस्ट चढ़ने पहुँच गए। पहाड़ पर चढ़ने के लिए अच्छा मौसम सिर्फ कुछ दिनों के लिए ही रहता है। इसलिए सैकड़ों लोग एक साथ चोटी की तरफ निकल पड़े। इसी वजह से रास्ते में यह भयानक जाम लग गया है।

एक ही दिन में 274 लोगों का नया रिकॉर्ड

नेपाल के पर्यटन विभाग ने एक बड़ी जानकारी दी है। बुधवार को सुबह तड़के 3 बजे से ही पहाड़ पर चढ़ाई शुरू हो गई थी। यह चढ़ाई लगातार 11 घंटे तक चलती रही। इस दौरान कुल 274 पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट की चोटी पर अपने कदम रखे। नेपाल के रास्ते एक ही दिन में चढ़ने वालों की यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।

इससे पहले 22 मई 2019 को एक दिन में 223 लोग चोटी पर पहुँचे थे। वैसे दुनिया भर में एक दिन में सबसे ज्यादा 354 लोगों के चढ़ने का रिकॉर्ड है। यह रिकॉर्ड 23 मई 2019 को नेपाल और तिब्बत दोनों तरफ के रास्तों को मिलाकर बना था। इस बार तिब्बत का रास्ता बंद था। इसके बावजूद सिर्फ नेपाल के रास्ते से ही एक नया रिकॉर्ड बन गया है।

एवरेस्ट की दौड़ में भारत तीसरे नंबर पर

इस साल एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए भारत से बहुत सारे लोग पहुँचे हैं। नेपाल सरकार ने इस सीजन में कुल 494 विदेशी पर्वतारोहियों को पहाड़ पर चढ़ने की इजाजत (परमिट) दी थी। इसमें सबसे ज्यादा 109 परमिट चीन के लोगों को मिले।

दूसरे नंबर पर अमेरिका रहा, जिसके 77 नागरिकों को यह इजाजत मिली। भारत इस सूची में तीसरे स्थान पर है। भारत के 61 पर्वतारोहियों को इस बार परमिट मिला था। इसके अलावा ब्रिटेन के 32 और रूस के 18 लोगों ने भी इस बार एवरेस्ट पर चढ़ाई की है।

जाम से क्यों आ जाती है मौत की नौबत?

एवरेस्ट की चोटी के पास का हिस्सा ‘डेथ जोन’ कहलाता है। यह इलाका समुद्र तल से 8,000 मीटर से भी ज्यादा ऊँचा है। इतनी ऊँचाई पर हवा में ऑक्सीजन बहुत कम होती है। इसलिए, इंसान का शरीर यहाँ ज्यादा देर तक जिंदा नहीं रह सकता है। जब रास्ते में भीड़ होती है, तो पर्वतारोहियों को लाइन में खड़ा होना पड़ता है।

ज्यादा देर इंतजार करने से उनका ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म होने लगता है। कड़ कड़ाती ठंड में खड़े रहने से उनका शरीर ठंडा पड़ जाता है। हाथ-पैर जमने लगते हैं। ऑक्सीजन की कमी और ठंड के कारण लोग अचानक बीमार हो जाते हैं। थकावट की वजह से कई बार नीचे उतरते समय उनका ध्यान भटक जाता है और वे हादसे का शिकार हो जाते हैं।

ऑक्सीजन की चोरी ने बढ़ाई मुश्किलें

एवरेस्ट पर भीड़ बढ़ने से एक और बड़ी परेशानी शुरू हो गई है। यहाँ ऊँचाई पर पर्वतारोहियों की मदद के लिए पहले से ऑक्सीजन सिलेंडर रखे जाते हैं। अब इन सिलेंडरों की चोरी होने लगी है। कई पर्वतारोहियों ने बताया कि उनके हिस्से के सिलेंडर गायब मिलते हैं।

इतनी ऊँचाई पर किसी की ऑक्सीजन चुराना उसकी जान लेने जैसा है। इसके अलावा, कई ऐसे लोग भी एवरेस्ट चढ़ने आ रहे हैं जो शारीरिक रूप से फिट नहीं हैं। वे रास्ते में बहुत धीरे-धीरे चलते हैं। इस वजह से उनके पीछे चल रहे बाकी लोगों के लिए भी खतरा बढ़ जाता है।

नेपाल सरकार की बंपर कमाई

इस साल नेपाल सरकार ने एवरेस्ट चढ़ने की फीस बढ़ा दी थी। इसे 11,000 डॉलर से बढ़ाकर 15,000 डॉलर (करीब 12 लाख रुपए) कर दिया गया। फीस बढ़ने के बाद भी एवरेस्ट पर आने वाले लोग कम नहीं हुए।

इस सीजन में नेपाल ने 30 अलग-अलग चोटियों के लिए 1,181 पर्वतारोहियों को परमिट दिए। इससे नेपाल सरकार को 1.25 अरब रुपए से ज्यादा की कमाई हुई। इसमें से अकेले माउंट एवरेस्ट से ही सरकार को 1.07 अरब रुपए से अधिक मिले हैं।

कुछ आयोजकों का दावा: भीड़ को संभाला जा सकता है

एक तरफ विशेषज्ञ इस भीड़ को गलत बता रहे हैं। दूसरी तरफ, कुछ ट्रिप प्लानर्स का मानना है कि इस भीड़ को संभाला जा सकता है। ऑस्ट्रिया की एक मशहूर कंपनी का कहना है कि अगर टीमों के पास पूरी ऑक्सीजन हो और सही प्लानिंग हो, तो खतरा कम किया जा सकता है।

उनका कहना है कि यूरोप के आल्प्स पहाड़ों पर एक दिन में 4,000 लोग चढ़ते हैं। एवरेस्ट तो उससे 10 गुना बड़ा है, इसलिए यहाँ 274 लोगों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है। लेकिन, वे एक बड़ी बात भूल जाते हैं। आल्प्स और एवरेस्ट के ‘डेथ जोन’ के मौसम में जमीन-आसमान का अंतर होता है। एवरेस्ट का मौसम बहुत ज्यादा खतरनाक होता है।

रिकॉर्ड्स का भी बना नया इतिहास

इस मुश्किल समय में जहाँ कुछ दुखद मौतें हुईं, वहीं कुछ ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी बने। नेपाल के मशहूर गाइड कामी रीता शेरपा ने 32वीं बार एवरेस्ट पर चढ़कर अपना ही पुराना वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ दिया। वहीं, 52 साल की ल्हाकपा शेरपा ने 11वीं बार चोटी पर कदम रखा। वे दुनिया में सबसे ज्यादा बार एवरेस्ट चढ़ने वाली महिला बन गई हैं।

इसके अलावा, रूस के 34 साल के रुस्तम नबीव ने सबको हैरान कर दिया। उनके दोनों पैर नहीं हैं। उन्होंने बिना नकली पैरों के, सिर्फ अपने हाथों के दम पर एवरेस्ट फतह किया। लेकिन इन बड़ी सफलताओं के बाद भी सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल उठ रहे हैं।

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