Sunday, May 22, 2022
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संक्रमण से तेज टीके पर अफवाह: कोरोना वैक्सीनेशन प्रोग्राम पर किए जा रहे 7 भ्रामक दावों की हकीकत जानिए

बच्चों का टीकाकरण, कंपल्सरी लाइसेंसिंग, वैक्सीन उत्पादन, विदेशी वैक्सीन... सब पर उठ रहे सवालों का सिलसिलेवार तरीके से जवाब दिया गया है।

एक ओर कोरोना वायरस संक्रमण से नागरिकों की रक्षा के तमाम प्रयास हो रहे, दूसरी ओर कुछ लोग अफवाहों के जरिए इन प्रयासों पर पानी फेरने की कोशिश में हैं। कोरोना वैक्सीन पर भ्रामक दावों को देखते हुए सरकार ने लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) और टीकाकरण कार्यक्रम के एक्सपर्ट ग्रुप (NEGVAC) के प्रमुख डॉ. विनोद पाल ने देश में टीकाकरण पर आधारित कुछ ऐसे ही मिथकों के बारे में तथ्य पूर्ण जानकारी दी है।

मिथक 1 : विदेशों से वैक्सीन खरीदने के लिए केंद्र सरकार के प्रयास नाकाफी

यह कहना पूरी तरह गलत है कि सरकार विदेशी वैक्सीन निर्माताओं के संपर्क में नहीं है। 2020 के मध्य में ही इन वैक्सीन निर्माता कंपनियों से बातचीत शुरू हो गई थी। लेकिन जिस प्रकार हमारे वैक्सीन निर्माता पहले भारत को प्राथमिकता देते हैं, ठीक उसी प्रकार सभी वैक्सीन कंपनियों की अपनी प्राथमिकताएँ हैं। सरकार लगातार फाइजर, मॉडर्ना और जॉनसन एण्ड जॉनसन के संपर्क में थी। यह सरकार का ही प्रयास था कि रूस की वैक्सीन स्पूतनिक V के ट्रायल को मँजूरी मिली और वैक्सीन अप्रूव कर दी गई। हाल ही में फाइजर ने वैक्सीन की उपलब्धता के विषय में जानकारी दी है, जिसके बाद सरकार कंपनी के साथ वैक्सीन आयात करने पर बात आगे बढ़ा रही है।

मिथक 2 : केंद्र ने विदेशी वैक्सीनों को भारत में अनुमति नहीं दी

तथ्य तो यह है कि केंद्र सरकार ने देश में अप्रैल में ही अमेरिका की FDA, EMA, यूके के MHRA, जापान की PMDA और WHO में आपातकाल उपयोग के लिए सूचित सभी वैक्सीनों के लिए नियमों में आसानी प्रदान कर दी थी। किसी भी विदेशी वैक्सीन का भारत में अप्रूवल पेंडिंग नहीं है।

मिथक 3 : केंद्र सरकार वैक्सीन उत्पादन बढ़ाने के लिए नहीं कर रही प्रयास

भारत में सिर्फ एक ही कंपनी ‘भारत बायोटेक’ है जिसके पास बौद्धिक संपदा अधिकार हैं लेकिन भारत सरकार के प्रयासों के कारण अब तीन और कंपनियाँ भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का उत्पादन करेंगी। भारत बायोटेक की क्षमता भी अक्टूबर तक बढ़कर 10 करोड़ डोज प्रतिमाह हो जाएगी। इसके अलावा सरकार ने कोविशील्ड को भी सहायता प्रदान की जिसके कारण कंपनी की क्षमता बढ़कर 11 करोड़ डोज प्रतिमाह हो जाएगी। इन दो कंपनियों के अलावा रूस की स्पूतनिक भी भारत में 6 कंपनियों द्वारा उत्पादित की जाएगी। भारत सरकार कोविड सुरक्षा योजना के तहत जायडस कैडिला, बायोई और जेनोवा जैसी कंपनियों को न केवल फंडिंग, बल्कि तकनीकी सहायता भी कर रही है। सरकार के इन्हीं प्रयासों के कारण 2021 के अंत तक भारत में 200 करोड़ डोज उपलब्ध होंगे।

मिथक 4 : केंद्र को कंपल्सरी लाइसेंसिंग का समर्थन करना चाहिए

इसके विषय में सरकार का कहना है कि कंपल्सरी लाइसेंस उतना मायने नहीं रखता है। मायने रखता है ‘फॉर्मूला’। तकनीकी हस्तांतरण शोध और विकास कार्य करने वाली कंपनियों के हाथ में होता है। भारत सरकार ने कंपल्सरी लाइसेंसिंग से आगे बढ़ते हुए भारत बायोटेक के अलावा तीन और कंपनियों को कोवैक्सीन निर्माण की अनुमति दी है। स्पूतनिक के साथ भी इसी प्रक्रिया का पालन किया गया है।

मिथक 5 : केंद्र ने राज्यों के प्रति जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा

जनवरी से अप्रैल तक केंद्र सरकार ने मई की तुलना में बेहतर तरीके से देश में टीकाकरण कार्यक्रम चलाया। राज्यों को देश में वैक्सीन उत्पादन और विदेशों से वैक्सीन खरीद की प्रक्रिया में होने वाली कठिनाइयों की पूरी जानकारी है, लेकिन फिर भी राज्य पहले से ज्यादा विकेन्द्रीकरण की माँग कर रहे हैं। स्वास्थ्य राज्य का विषय है और राज्यों की निरंतर माँग पर ही एक उदार वैक्सीन नीति अपनाई गई। हालाँकि पिछले 3 महीने में राज्य स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को भी टीकाकरण कार्यक्रम में कवर कर पाने में असमर्थ रहे हैं। फिर भी राज्यों को वैक्सीन प्रक्रिया में अधिक शक्तियाँ चाहिए।

मिथक 6 : केंद्र, राज्यों को पर्याप्त वैक्सीन नहीं दे रहा

केंद्र सरकार, राज्यों को पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से पर्याप्त टीके उपलब्ध करा रही है। अब यह भी निश्चित है कि आगे आने वाले समय में टीकों की उपलब्धता और राज्यों को वितरण भी बढ़ेगा लेकिन कुछ नेता रोज टीवी पर आकर लोगों के सामने भय का माहौल बनाते हैं। सरकार ने कहा कि राज्य टीकों के वितरण की प्रक्रिया से पूरी तरह से परिचित हैं। यह समय राजनीति करने का नहीं है। सरकार ने बताया कि भारत सरकार के कोटे के अलावा राज्यों को 25% टीके मिलते हैं और 25% निजी अस्पतालों को।

मिथक 7 : बच्चों के टीकाकरण में केंद्र प्रयासरत नहीं

इसके विषय में डॉ. पाल ने बताया कि विश्व के न तो किसी देश में और न ही डबल्यूएचओ के द्वारा बच्चों के टीकाकरण को लेकर कोई अधिसूचना जारी की गई है। जहाँ तक रही बात भारत में बच्चों के टीकाकरण की तो देश में बच्चों पर ट्रायल शुरू होने वाला है। हालाँकि यह फैसले वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के द्वारा लिया जाएगा, व्हाट्सऐप पर प्रसारित सूचनाओं और राजनीति करने वाले नेताओं के दबाव में आकर नहीं।  

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार भारत में अब तक 20,26,95,874 लोगों को टीका लगाया जा चुका है। साथ ही पूरी तरह से वैक्सीनेट (जिन्हें दोनों डोज लग चुके हुए) लोगों की संख्या भी बढ़कर 4 करोड़ से अधिक हो चुकी है।  

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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