Homeविविध विषयअन्यअतीक अहमद जाएँगे गुजरात के जेल में: 5 बार विधायक और एक बार के...

अतीक अहमद जाएँगे गुजरात के जेल में: 5 बार विधायक और एक बार के सांसद पर चला SC का ‘डंडा’

5 बार विधायक और एक बार सांसद रहे अतीक अहमद 11 फरवरी, 2017 से जेल में बंद हैं। अतीक के खिलाफ 1979 से 2019 तक कुल 109 केस लंबित है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (अप्रैल 23, 2019) को पूर्व सांसद और ‘गुंडा’ (मेनस्ट्रीम मीडिया ऐसे लोगों के लिए बाहुबली शब्द का इस्तेमाल करती है, जो निंदनीय है) अतीक अहमद व उसके साथियों द्वारा रियल एस्टेट डीलर मोहित जायसवाल के कथित अपहरण और अत्याचार के मामले में सीबीआई जाँच का आदेश दिया है। यह आदेश चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के नैनी जेल में बंद अतीक को गुजरात के जेल में ट्रांसफर करने का भी आदेश है। अतीक अहमद को कुछ दिन पहले ही नैनी जेल लाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अतीक अहमद के खिलाफ सभी लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने के साथ ही इस मामले में सभी गवाहों को संरक्षण देने के लिए भी कहा है। सर्वोच्‍च अदालत ने अतीक अहमद के खिलाफ लंबित 106 मामलों में उत्तर प्रदेश प्रशासन से चार हफ्ते में स्‍टेटस रिपोर्ट माँगी है। कोर्ट ने लापरवाही बरतने वाले जेल अधिकारियों को निलंबित किया और उसके खिलाफ मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए भी कहा है।

गौरतलब है कि अतीक अहमद पर आरोप है कि दिसंबर 2018 में देवरिया जेल में बंद रहने के दौरान अतीक ने अपने साथियों के द्वारा लखनऊ के आलमबाग क्षेत्र के निवासी मोहित जायसवाल को अपहरण करवा लिया और फिर जेल में ले जाकर उसके साथ मारपीट की गई। मोहित का आरोप है कि इस दौरान उनसे संपत्ति से जुड़े कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी करा लिए गए। राज्य सरकार ने भी इस घटना की पुष्टि की थी और कहा था कि उस दिन जेल में लगे सीसीटीवी कैमरों के साथ छेड़छाड़ की गई थी। 5 बार विधायक और एक बार सांसद रहे अतीक अहमद 11 फरवरी, 2017 से जेल में बंद हैं। अतीक के खिलाफ 1979 से 2019 तक कुल 109 केस लंबित है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -