भीषण गर्मी ने देशभर में दस्तक दे दी है और लोग सूरज की तपिश से बेहाल हैं। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण तक तापमान रिकॉर्ड तोड़ रहा है। इसी बीच अब साल के सबसे गर्म दिनों यानी ‘नौतपा’ की शुरुआत होने वाली है।
ज्योतिष और विज्ञान दोनों ही नजरिए से यह समय बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान सूरज की किरणें सीधे धरती पर प्रहार करती हैं। लू और उमस लोगों का जीना मुहाल कर देती है। नौतपा क्या होता है और इससे बचने के लिए क्या करें। नीचे पढ़ें।
क्या होता है नौतपा और कब से है इसकी शुरुआत
नौतपा का शाब्दिक अर्थ है नौ दिनों की भारी तपिश या गर्मी। हिंदू पंचांग के अनुसार, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो उस समय के शुरुआती नौ दिनों को नौतपा कहा जाता है। साल 2026 में नौतपा 25 मई से शुरू हो रहा है और 2 जून तक चलेगा।
इन नौ दिनों में सूर्य अपनी सबसे तीव्र ऊर्जा के साथ पृथ्वी पर प्रभाव डालते हैं। इस दौरान तापमान सामान्य से काफी ज्यादा रहता है। दिल्ली-NCR समेत देश के कई हिस्सों में भीषण लू चलने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग ने भी हीटवेव को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है।
क्यों कहा जाता है इसे नौतपा और क्या है इसका कारण
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ज्येष्ठ मास में सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में जाना एक बड़ी खगोलीय घटना है। रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं, जो शीतलता के कारक माने जाते हैं। जब सूर्य इस नक्षत्र में आते हैं, तो वे चंद्रमा की शीतलता को सोख लेते हैं।
इस वजह से पृथ्वी पर अग्नि तत्व बहुत सक्रिय हो जाता है। सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी कम होने से किरणें सीधे और तेजी से जमीन पर पड़ती हैं। धार्मिक मान्यताओं के साथ इसका वैज्ञानिक आधार भी है। इन दिनों सूर्य की स्थिति ऐसी होती है कि वायुमंडल में नमी कम हो जाती है और शुष्क गर्मी बढ़ जाती है।
मानसून और खेती के लिए क्यों है यह शुभ संकेत
भले ही नौतपा की गर्मी हमें परेशान करती हो, लेकिन यह प्रकृति के लिए वरदान है। ऐसी प्राचीन मान्यता है कि नौतपा के दौरान जितनी ज्यादा गर्मी पड़ेगी, मानसून उतना ही अच्छा आएगा। भीषण गर्मी के कारण समुद्र के पानी का वाष्पीकरण तेजी से होता है।
इससे आसमान में बादलों के बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। यदि नौतपा के दौरान अच्छी तपिश होती है, तो खरीफ की फसलों के लिए बारिश भरपूर मिलती है। किसान भी अच्छी फसल की उम्मीद में इस तपिश का स्वागत करते हैं। इसे एक अच्छे और लंबे मानसून का संकेत माना जाता है।
नौतपा के दौरान क्या करें और क्या न करें
धर्म शास्त्रों में इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। नौतपा के नौ दिनों में सूर्य देव की उपासना करना बहुत फलदायी होता है। प्रतिदिन तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए। जल में लाल फूल और अक्षत डालने से सूर्य की कृपा प्राप्त होती है।
इन दिनों में दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। राहगीरों को ठंडा पानी पिलाना और प्याऊ लगवाना पुण्य का काम है। हालाँकि, इस दौरान विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। दोपहर के समय लंबी यात्रा करने से बचना चाहिए क्योंकि यह सेहत बिगाड़ सकता है।
भीषण गर्मी से बचने के लिए खास खान-पान
नौतपा की लू से बचने के लिए डाइट पर ध्यान देना सबसे जरूरी है। डायटीशियन के अनुसार, इस दौरान हल्का और पानी से भरपूर भोजन करना चाहिए। तरबूज, खरबूजा, खीरा और ककड़ी जैसे मौसमी फल शरीर को हाइड्रेटेड रखते हैं। सब्जियों में लौकी, तोरई और कद्दू का सेवन करना चाहिए क्योंकि ये आसानी से पच जाते हैं।
दोपहर के समय एक गिलास छाछ या दही का सेवन पेट की गर्मी को शांत करता है। सत्तू का शरबत और आम पन्ना लू से बचने के अचूक उपाय हैं। ये शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करते हैं।
भूलकर भी न करें इन चीजों का सेवन
नौतपा के दौरान कुछ चीजों से परहेज करना सेहत के लिए बेहतर होता है। बहुत ज्यादा मसालेदार और तला-भुना खाना शरीर का तापमान बढ़ा देता है। इससे एसिडिटी और पाचन की समस्या हो सकती है। चाय और कॉफी का सेवन कम से कम करें क्योंकि इनमें कैफीन होता है।
कैफीन शरीर से पानी बाहर निकालता है जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादा चीनी वाले कोल्ड ड्रिंक्स और शराब से भी दूर रहना चाहिए। गर्मियों में बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं, इसलिए बासी खाने से बचें। हमेशा ताजा बना हुआ सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
जरूरी सावधानी और बचाव के तरीके
दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक सूरज की किरणें सबसे ज्यादा घातक होती हैं। कोशिश करें कि इस समय घर से बाहर न निकलें। अगर निकलना जरूरी हो, तो छाता लेकर जाएँ और सिर को कपड़े से ढंक लें। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें जो पसीना सोख सकें। प्यास लगने का इंतजार न करें और हर आधे घंटे में पानी पीते रहें।
बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उनके कमरे में वेंटिलेशन और ठंडक का पूरा इंतजाम रखें। पशु-पक्षियों के लिए भी अपनी छत या बालकनी पर दाना-पानी जरूर रखें। सही जानकारी और सावधानी से आप नौतपा की इस जंग को जीत सकते हैं।


