Tuesday, September 21, 2021
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मोदी ‘दुश्मन’ था जिस मुसलमान के लिए, महेश भट्ट और सीनियर कॉन्ग्रेसी नेता ने कैसे बदली उनकी सोच

"कॉन्ग्रेस का कोई मुख्यमंत्री एक तो इतना वक्त नहीं देगा और दूसरा मुसलमानों के लिए इतना काम कर ही नहीं सकता है, जितना मोदी ने किया।" - यह बात कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कही थी।

नरेंद्र मोदी मुस्लिमों को किस रूप में देखते हैं? क्या मुस्लिमों को नरेंद्र मोदी से बच कर रहना चाहिए? किसी BJP या RSS वाले का जवाब नरेंद्र मोदी के फेवर में ही रहेगा, हिंदू हृदय सम्राट के तौर पर ही पेश किया जाएगा। लेकिन तब क्या, जब इन्हीं सवालों के जवाब जफर सरेशवाला (एक मुसलमान) से मिले? वो जफर सरेशवाला, जिसने नरेंद्र मोदी के खिलाफ वैश्विक अभियान चलाया था। वो जिसके कारण नरेंद्र मोदी को अमेरिका एक समय वीजा तक नहीं देता था।

ऋचा अनिरुद्ध शायद इन्हीं सवालों को जानना चाहती थीं। ऐसे में खुद जफर सरेशवाला से बेहतर कौन इन सवालों का जवाब देता। बस अपने यूट्यूब चैनल के लिए इंटरव्यू लिया। जफर सरेशवाला ने पूरी कहानी कुछ ऐसे कही कि लिबरलों/वामपंथियों से लेकर कॉन्ग्रेसियों तक को यह लंबी चुभेगी।

शुरुआत होती है 2002 के गुजरात दंगों से। जफर सरेशवाला बताते हैं कि उनकी फैक्ट्री, उनका ऑफिस और घर तक दंगों से प्रभावित हुआ था। वो लोग लगभग सड़क पर आ गए थे। लेकिन कमाल की बात वो ये बताते हैं कि अहमदाबाद में 2002 का दंगा इकलौता दंगा नहीं था। इससे पहले 1969, 85, 87, 90 और 1992 में इस शहर ने हिंदू-मुस्लिम दंगा देखा था। लेकिन इंसाफ मिला सिर्फ 2002 के दंगा पीड़ितों को।

वसूलों की लड़ाई

2002 के गुजरात दंगों के बाद जफर सरेशवाला को लगा कि ‘बस अब बहुत हुआ’। उन्होंने लंदन में रहते हुए तब के गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मुहिम छेड़ दी। तब के यूनाइटेड किंग्डम के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से लेकर अमेरिकी के सिक्यॉरिटी ऑफ स्टेट कॉलिन पॉवेल तक से मिल कर CM मोदी के खिलाफ वैश्विक अभियान चलाया था। यह अभियान एक तरह से सफल भी रहा था क्योंकि तभी लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए किसी मुख्यमंत्री को कोई देश वीजा से मना करता है।

जफर सरेशवाला की यह लड़ाई अकेले की थी। वो किसी ऑर्गेनाइजेशन से जुड़कर ये नहीं कर रहे थे। वो जो कर रहे थे, उसको रोकने या CM मोदी की छवि को खराब नहीं करने को लेकर कभी भी गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से दबाव नहीं आया। इसी बीच नरेंद्र मोदी दोबारा चुनाव जीत कर मुख्यमंत्री बनते हैं।

अब तक जफर सरेशवाला एक ‘एक्टिविस्ट’ बन चुके थे। और यही उनकी सोच को प्रभावित भी कर रही थी कि क्यों? इसके आगे क्या? इसी समय अहमदाबाद से उनके पास फोन आने लगे। फोन इसलिए क्योंकि नरेंद्र मोदी दोबारा मुख्यमंत्री बन चुके थे और बातचीत की शुरुआत करके मसले को लंबा खींचने के बजाय उसका हल खोजा जाए। लेकिन बातचीत कैसे हो? खासकर उससे कैसे हो, जिसके खिलाफ आपने अभियान छेड़ा हो?

महेश भट्ट की एंट्री

गुजरात दंगों के बाद जफर सरेशवाला लंदन में रह कर नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभियान जरूर चला रहे थे लेकिन उनके मेन्टॉर (मानसिक ताकत) थे महेश भट्ट। मोदी से मुलाकात करके मसले को हल करने की उहापोह को इन्हीं महेश भट्ट ने विराम दिया था। उन्हीं के कहने पर जफर सरेशवाला ने मिलने का मन भी बनाया। उन्हीं ने अपने और नरेंद्र मोदी के कॉमन दोस्त रजत शर्मा से इस मुलाकात के लिए बात आगे बढ़ाई। मेलबाजी हुई। CM मोदी के सलाहकारों/ऑफिसरों ने मना किया लेकिन मोदी मन बना चुके थे।

जफर सरेशवाला जहाँ चाहते थे, वहीं मुलाकात भी हुई। अपने साथ जिन इस्लामिक स्कॉलर को लेकर जाना चाहते थे, उनको भी बुलाया गया। बोलने, भड़ास निकालने का भरपूर मौका दिया गया। हर एक बात सुनी। टोकाटोकी नहीं की। जितने भी सवाल दागे गए, सब का तसल्ली से जवाब दिया। ‘न्याय के बिना शांति रह सकती है’ के सवाल पर CM मोदी का स्पष्ट जवाब था – ‘नहीं’ और वादा भी किया कि न सिर्फ भारतीय कानून के तहत न्याय होगा बल्कि यह (दंगा) दोहराया नहीं जाएगा। और तो और, मीटिंग खत्म होने को आई तो नरेंद्र मोदी ने अपना पर्सनल नंबर भी एक कागज पर लिख कर दिया और बोला – 24*7 मैं अवेलेबल हूँ।

‘दुश्मन’ बना दोस्त

2003 की इस मुलाकात को याद करके जफर सरेशवाला बताते हैं कि दोनों ही वादे पर CM मोदी खरे उतरे। जफर सरेशवाला के अनुसार जाँच के दौरान 425 हिंदू जेल में गए और कम से कम 90 हिंदुओं को सजा हुई। जफर सरेशवाला यह भी बताते हैं कि इसके पहले के हिंदू-मुस्लिम दंगों में कभी किसी पावरफुल लोगों पर कानून का शिकंजा नहीं फँसा जबकि गुजरात दंगों में नेता से लेकर पुलिसवाले तक जेल गए।

गुजरात दंगों के बाद नरेंद्र मोदी की छवि को मुस्लिम-विरोधी जैसा बना दिया गया था। मीडिया का इसमें बड़ा रोल था। लेकिन जफर सरेशवाला इससे इत्तेफाक नहीं रखते। और इसके लिए वो प्रमाण भी देते हैं। लंदन से फोन करके मुस्लिम समुदायों की समस्या CM मोदी को बता कर हल करवाना हो या खुद अहमदाबाद जाकर उनसे मिल कर… हर बार समस्या का समाधान किया गया… सरकारी गति से नहीं, मोदी के द्रुत गति स्टाइल से।

हिम्मत नगर की एक समस्या को लेकर जफर सरेशवाला मुस्लिम समुदाय के साथ CM मोदी से मिलने अहमदाबाद गए थे। मोदी ने इस मुलाकात के दौरान ही वहीं से फोन मिलाया और समस्या खत्म। मुस्लिम समुदायों की लगभग 250 समस्याओं को CM मोदी से मिलकर डायरेक्ट खत्म करवाने वाले जफर सरेसवाला तब अपनी मुलाकात का एक वाकया याद कर बताते हैं। लंदन में 2003 में दोनों की पहली मुलाकात में CM मोदी ने कहा था – “मैं तुम्हारा भी मुख्यमंत्री हूँ। वोट मत दो, लेकिन कम से कम अपने काम तो करवाओ।”

कॉन्ग्रेसियों की कॉन्ग्रेस के नेता ने खोली पोल

इस बीच जफर सरेशवाला किसी काम के सिलसिले में कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से मिलने गए। उस नेता ने काम करवाया या नहीं, इसका जिक्र नहीं है लेकिन जो कहा वो सुनने लायक है – “कॉन्ग्रेस का कोई मुख्यमंत्री एक तो इतना वक्त नहीं देगा और दूसरा मुसलमानों के लिए इतना काम कर ही नहीं सकता है, जितना मोदी ने किया।”

मुस्लिम समुदाय की समस्याओं को हल करना हो या मुस्लिम इलाकों में विकास के काम… CM मोदी ने कभी भेदभाव नहीं किया। यही कारण रहा होगा कि जफर सरेशवाला बताते हैं कि वाजपेयी से भी ज्यादा मुस्लिम वोट मोदी को मिले। सरेशवाला के अनुसार गुजरात के मुस्लिम मोदी को समस्या मानना छोड़ चुके हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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